लीजिए, अब ये भी हो गया। बीजेपी और कांग्रेस के बीच गठबंधन! बीजेपी का असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के साथ गठबंधन! अब इससे ज़्यादा क्या ही हो सकता है! ये कोई व्यंग्य नहीं है। चौंकिए मत। यह महाराष्ट्र में हो रहे स्थानीय निकाय चुनावों का सच है! बीजेपी अपने ही सहयोगी एकनाथ शिंदे की पार्टी को अबंरनाथ नगर परिषद से बाहर करने के लिए कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया। इधर, अकोला की अकोट नगर पालिका में बीजेपी की 'बी' टीम कही जाने वाली असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम अब 'बी' टीम नहीं रही, बल्कि दोनों के बीच गठबंधन हो गया। यानी वह 'ए' टीम ही बन गई। बवाल तो होना था। हुआ भी। आलोचना हुई तो बीजेपी और कांग्रेस दोनों दल पलट गये। कांग्रेस ने गठबंधन में शामिल होने वाले स्थानीय नेताओं को निलंबित कर दिया है तो देवेंद्र फडणवीस ने तुरंत ही दोनों गठबंधनों से बाहर निकलने का निर्देश दिया है।

गठबंधन पर बीजेपी और कांग्रेस की ओर से इस ताज़ा फ़ैसले से पहले गठबंधन कैसे हुआ, यह जान लीजिए। महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों कुछ ऐसे घटनाक्रम हो रहे हैं जो सबको चौंका रहे हैं। सत्ता के लिए पार्टियां अपने पुराने दुश्मनों से भी हाथ मिला रही हैं। ठाणे जिले की अंबरनाथ नगर परिषद और अकोला जिले की अकोट नगर पालिका में बीजेपी ने ऐसे गठबंधन किए हैं जिनकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। एक तरफ कांग्रेस के साथ मिलकर शिंदे गुट की शिवसेना को बाहर किया, तो दूसरी तरफ असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के साथ सत्ता साझा की। इन घटनाओं से राज्य में राजनीतिक हलचल मच गई है।
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अंबरनाथ में शिंदे सेना के खिलाफ बीजेपी-कांग्रेस साथ

अंबरनाथ नगर परिषद में हाल के चुनावों के बाद सत्ता की कुंजी बनाने के लिए बीजेपी और कांग्रेस ने हाथ मिला लिया। इस गठबंधन को 'अंबरनाथ विकास आघाड़ी' का नाम दिया गया है। इसका मकसद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना को सत्ता से बाहर रखना था। शिंदे गुट की शिवसेना यहां सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत नहीं मिला। बीजेपी ने कांग्रेस और अजित पवार गुट की एनसीपी के साथ मिलकर बहुमत जुटा लिया और नगर अध्यक्ष का पद भी जीत लिया।

हालाँकि, कांग्रेस ने साफ़ इनकार किया है कि यह बीजेपी के साथ सीधा गठबंधन है। कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने सोशल मीडिया पर लिखा, "अंबरनाथ में पार्टी के झंडे और नाम छोड़कर कई पार्टियों के कार्यकर्ता और निर्दलीय लोग एक साथ आए हैं। यह 'अंबरनाथ विकास आघाड़ी' शिंदे गुट की शिवसेना के स्थानीय स्तर पर फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ बनी है। इसलिए कांग्रेस और बीजेपी के गठबंधन की खबरें ग़लत हैं।"
शिंदे गुट के विधायक बालाजी किनिकर ने इसे 'अनैतिक गठबंधन' बताया और बीजेपी पर विश्वासघात का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस मुक्त भारत की बात करने वाली पार्टी अब कांग्रेस के साथ सत्ता साझा कर रही है। यह शिवसेना के साथ धोखा है।'

बीजेपी की तरफ़ से उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल ने पलटवार किया। उन्होंने शिंदे गुट पर पिछले 25 सालों से भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया और कहा कि शिवसेना के साथ गठबंधन की कई कोशिशें की गईं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसलिए शिवसेना के साथ गठबंधन करना ही अनैतिक होता।

अकोट में बीजेपी-AIMIM का दुर्लभ गठबंधन

अकोला जिले की अकोट नगर पालिका में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। यहाँ 35 सदस्यों वाली परिषद में चुनाव हुए, जिसमें बीजेपी को सिर्फ 11 सीटें मिलीं। मेयर का पद बीजेपी की माया धुले ने जीत लिया, लेकिन बहुमत के लिए समर्थन चाहिए था। बहुमत जुटाने के लिए बीजेपी ने 'अकोट विकास मंच' बनाया, जिसमें एआईएमआईएम के 5 पार्षदों के अलावा दोनों शिवसेना गुट (शिंदे और उद्धव), अजित पवार की एनसीपी, शरद पवार की एनसीपी और प्रहार जनशक्ति पार्टी शामिल हो गए।
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इस गठबंधन की कुल ताक़त अब 25 सदस्यों की हो गई है यानी मेयर सहित 26 हो गए हैं। आज तक की रिपोर्ट के अनुसार ग्रुप लीडर बीजेपी के रवि ठाकुर होंगे। दिलचस्प बात यह है कि मेयर चुनाव में बीजेपी की माया धुले ने एआईएमआईएम की उम्मीदवार फिरोजाबी सिकंदर राणा को हराया था, लेकिन अब वही एआईएमआईएम बीजेपी की सत्ता में साझेदार बन गई। इस गठबंधन को जिला मजिस्ट्रेट के पास रजिस्टर कराया गया है। 13 जनवरी को डिप्टी मेयर और अन्य पदों के चुनाव में यह गठबंधन एकजुट होकर वोट डालेगा।

रिपोर्ट के अनुसार विपक्ष में सिर्फ 6 कांग्रेस पार्षद और 2 वंचित बहुजन आघाड़ी के सदस्य रह गए हैं। एआईएमआईएम पर अक्सर बीजेपी की 'बी टीम' होने के आरोप लगते हैं, लेकिन यहां तो वह सत्ता की मुख्य साझेदार बन गई।
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उद्धव ठाकरे की शिवसेना और अन्य नेता बीजेपी पर दोहरे मापदंड का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि हिंदुत्व और 'कांग्रेस मुक्त भारत' की बात करने वाली बीजेपी सत्ता के लिए कुछ भी कर सकती है। शिवसेना यूबीटी नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा है, 'तो अगली बार जब भी किसी भी पॉलिटिकल पार्टी का कोई भी समर्थक यहाँ फैसलों के बारे में नैतिकता की बड़ी-बड़ी बातें करने की कोशिश करे तो चुप रहने में ही भलाई है। इसके साथ ही बीजेपी ने अकोला की अकोट नगर पालिका में सत्ता हासिल करने के लिए एआईएमआईएम के साथ गठबंधन किया है। महाराष्ट्र की राजनीति नए लोगों के लिए नहीं है, यह प्रो मैक्स लेवल की है।'

महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव की राजनीति में सत्ता की यह जुगाड़बाजी दिखाती है कि चुनावी दुश्मनी कितनी जल्दी दोस्ती में बदल सकती है। बहरहाल, अब सवाल यह है कि ये गठबंधन कितने दिन टिकते हैं और राज्य स्तर पर इसका क्या असर पड़ता है।