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अन्वय केस: अर्णब के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर, रुकवाने पहुंचे थे कोर्ट

आर्किटेक्ट अन्वय नाइक और उनकी मां की आत्महत्या के मामले में रिपब्लिक टीवी के एडिटर अर्णब गोस्वामी के ख़िलाफ़ अलीबाग पुलिस ने चार्जशीट दायर कर दी है। इस मामले में 4 नवंबर को अर्णब की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से लेकर दर्जनों नेताओं-मंत्रियों ने इसे महाराष्ट्र में आपातकाल जैसे हालात तथा पत्रकारिता पर हमला बताया था। चार्जशीट शुक्रवार को दायर की गई और इसे दायर होने से रोकने के लिए अर्णब गुरूवार को बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचे थे। 

सीबीआई को सौंपने की मांग

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने इस मामले में सीआईडी को फिर से जांच करने के आदेश दिए थे। अर्णब ने हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा है कि गृह मंत्री के पास ऐसा करने के अधिकार नहीं हैं। गोस्वामी ने रायगढ़ पुलिस द्वारा की गई उनकी गिरफ़्तारी को अवैध बताया है और इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई कहा है। अर्णब ने हाई कोर्ट से अपील की है कि इस मामले को सीबीआई या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी को सौंप दिया जाए। 

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अन्वय कॉनकॉर्ड डिजाइन्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध संचालक थे। अन्वय व उनकी मां कुमुद ने 5 मई, 2018 को मुंबई के अलीबाग के कावीर गांव स्थित अपने घर में आत्महत्या की थी। अन्वय ने सुसाइड नोट में लिखा था कि पत्रकार अर्णब गोस्वामी, फिरोज़ शेख और नीतीश शारदा ने उनके पांच करोड़ 40 लाख रुपये नहीं दिए हैं। 

chargesheet against Arnab Goswami in Anvay naik case - Satya Hindi
अर्णब के पक्ष में उतरी थी बीजेपी।

1914 पन्नों की चार्जशीट 

अलीबाग पुलिस ने चार्जशीट में लिखा है, ‘अर्णब गोस्वामी, फिरोज़ शेख और नीतीश शारदा ने अपने दफ़्तरों के लिए अन्वय को इंटीरियर डिजाइन, सिविल और इलेक्ट्रिकल से जुड़ा काम दिया था। अन्वय ने सारा काम किया और इसके बाद उन्हें अतिरिक्त काम दिया गया और उन्होंने वो भी किया। लेकिन तीनों ने अन्वय से काम ज़्यादा कराया और पैसे कम दिए।’ 1914 पन्नों की यह चार्जशीट अलीबाग के जिला न्यायालय में दायर की गई है। 

देखिए, अर्णब को जमानत मिलने पर चर्चा- 

लटकाते रहे बकाया

चार्जशीट में आगे लिखा है, ‘तीनों अभियुक्तों ने अन्वय का बकाया नहीं दिया और उनके पेमेंट्स को लटकाए रखा। इस वजह से अन्वय जिन लोगों से इनके दफ़्तरों में काम के लिए ज़रूरी रॉ मैटीरियल लेकर लाए थे, उन्होंने उन्हें फ़ोन करना शुरू कर दिया। नाइक तीनों अभियुक्तों से मिले, उन्हें मेल भेजे और बकाया देने के लिए कहा लेकिन ये लोग देर करते रहे या इन्होंने पैसे नहीं दिए जिससे वह वह मानसिक तनाव में आ गए और उन्हें यह आत्मघाती क़दम उठाना पड़ा।’ 

पुलिस ने चार्जशीट के साथ इन लोगों के अन्वय के साथ हुए कांट्रैक्ट एग्रीमेंट्स, अन्वय ने जो रॉ मैटीरियल मंगाया था उसके बिल, अन्वय की ओर से भेजे गए ई-मेल, काम और बकाया पेमेंट को लेकर भेजे गए वॉट्स ऐप और मैसेज की कॉपी को बतौर सबूत नत्थी किया है। 

कोर्ट के फ़ैसले की आलोचना

नवंबर में गिरफ़्तारी के बाद अर्णब ने रिहाई के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली थी और अदालत ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद अर्णब के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट का रूख़ किया था, जहां से उन्हें जमानत मिल गई थी और इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट की आलोचना हुई थी। 

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सुप्रीम कोर्ट ने अर्णब को जमानत देते हुए 'व्यक्तिगत आज़ादी' की सुरक्षा की बात कही थी। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद जेलों में बंद कुछ लोगों का जिक्र सोशल मीडिया पर छेड़ा गया और अदालत से पूछा गया कि क्या इन लोगों की भी कोई 'व्यक्तिगत आज़ादी' है या नहीं और अगर है तो उन्हें इससे क्यों वंचित रखा गया है। 

इस मामले में दिल्ली के एक पत्रकार सिद्दीक़ी कप्पन, सामाजिक कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज, 79 साल के वरवर राव जिनकी तबीयत बेहद ख़राब है, 83 साल के स्टेन स्वामी, जेएनयू के छात्र शरजील इमाम, जामिया के छात्र मीरान हैदर व अन्य लोगों का जिक्र किया गया। 

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