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अर्णब को मानहानि का नोटिस, पैसे नहीं दिए तो ख़बर दिखाई?

क्या अर्णब गोस्वामी और उनके रिपब्लिक चैनल ने सुशांत सिंह राजपूत प्रकरण में ख़बरें न दिखाने के लिए पैसों की मांग की थी? या फिर ये कहें कि पैसे या आर्थिक फायदा नहीं पहुंचाने पर उन्होंने इस मामले में फ़िल्म प्रोड्यूसर और डायरेक्टर संदीप सिंह को निशाना बनाया था? 

संदीप सिंह की मानें तो इस प्रकरण में उन्हें बदनाम करने की कोशिश की गयी थी और पैसे नहीं देने पर उनके ख़िलाफ़ तथ्यहीन ख़बरें चलाई गयीं और उनकी छवि खराब की गयी। संदीप सिंह की तरफ से इस संबंध में प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी और चैनल को 200 करोड़ रुपये की मानहानि का नोटिस जारी किया गया है। 

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संदीप सिंह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर फ़िल्म बना चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने अलीगढ़, भूमि और सरबजीत फ़िल्म भी बनायी हैं। संजय लीला भंसाली के सहायक के रूप में काम करने के बाद संदीप सिंह ने लीजेंड ग्लोबल स्टूडियो नाम से कंपनी बनायी। संदीप सिंह पर साल 2018 में एक सरकारी प्रमोशनल दौरे पर मॉरीशस में स्विट्ज़रलैंड के एक बच्चे के यौन उत्पीड़न का आरोप भी लगा है। 

मोदी की जीवनी पर आधारित उनकी फ़िल्म ‘पीएम नरेंद्र मोदी’ का पोस्टर महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जारी किया था। जब सुशांत मामले से उनका नाम जुड़ा तब कांग्रेस ने सवाल खड़ा किया था कि संदीप सिंह ने मुंबई स्थित बीजेपी मुख्यालय में दर्जनों बार फोन क्यों किये थे? 

इसी दौरान महाराष्ट्र के गृहमंत्री का भी बयान आया था कि संदीप सिंह के ड्रग्स कनेक्शन को लेकर उनके पास कई शिकायतें आयी हैं और वे इसे सीबीआई से साझा करेंगे। 

रिपब्लिक चैनल और अर्णब गोस्वामी पर पहले से ही टीआरपी घोटाला, पालघर में साधुओं की लिंचिंग और लॉकडाउन के दौरान बांद्रा स्टेशन पर जुटी प्रवासी श्रमिकों की भीड़ को लेकर की गई रिपोर्टिंग को लेकर मामले दर्ज हो चुके हैं और जांच जारी है।

अदालतों में चल रहे मुक़दमे

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की रिपोर्टिंग के दायरे पर एक तरफ अदालत में उनके चैनल और उन जैसे कुछ अन्य चैनलों के ख़िलाफ़ मामले की सुनवाई जारी है दूसरी तरफ आये दिन नए-नए आरोपों के साथ उनके ख़िलाफ़ कानूनी नोटिस जारी हो रहे हैं। अब संदीप सिंह ने कानूनी नोटिस भेजकर मुआवजे के रूप में 200 करोड़ रुपये का दावा किया है। इंस्टाग्राम के अपने आधिकारिक अकाउंट से इस नोटिस को संदीप सिंह ने शेयर भी किया है। 

"हत्यारा" बताने का आरोप 

संदीप सिंह ने दावा किया है कि इस समाचार चैनल ने उनको "आपराधिक इरादे" और जबरन वसूली के इरादे से कई संदेश भेजे हैं। कानूनी नोटिस में कहा गया है कि रिपब्लिक चैनल और उसके प्रधान संपादक द्वारा उन्हें सुशांत सिंह राजपूत मामले का  "मुख्य षड्यंत्रकारी" और "हत्यारा" कहा गया था। 

संदीप सिंह ने यह भी आरोप लगाया है कि इस समाचार चैनल के अधिकारियों में से एक उनके संपर्क में था और उसने उनसे कहा था कि जब तक वह "वित्तीय रूप से चैनल को लाभ" देने के लिए सहमत नहीं होंगे, तब तक उनके ख़िलाफ़ ख़बर चलाई जाएगी और ऐसा हकीकत में हुआ भी क्योंकि चैनल द्वारा उनके ख़िलाफ़ बिना आधार या तथ्यों वाली ख़बरें चलाई गयीं। 

कानूनी नोटिस में रिपब्लिक टीवी द्वारा चलाये गए कार्यक्रमों की एक श्रृंखला (सीरीज) का भी जिक्र किया गया है। संदीप सिंह ने कहा है कि एक सिलसिलेवार तरीके से चैनल ने ये कार्यक्रम उन्हें बदनाम करने के लिए चलाये थे। नोटिस में कहा गया है कि बार-बार यह बात दोहराई गयी कि संदीप सिंह ने जबरदस्ती या जोर देकर एम्बुलेंस से सुशांत सिंह राजपूत के मृत शरीर को "कूपर अस्पताल" ले जाने को कहा। 

नोटिस में कहा गया है कि संदीप सिंह के ख़िलाफ़ झूठे आरोप लगाए गए थे ताकि यह साबित हो सके कि वह राजपूत की मौत के मामले की सीबीआई जांच नहीं चाहते थे। 

देखिए, इस विषय पर चर्चा- 

घर में घुसने की कोशिश

कानूनी नोटिस के मुताबिक़, रिपब्लिक चैनल ने  हैशटैग #ArrestSandeepSsingh के साथ एक अभियान भी चलाया था। साथ ही ये ख़बरें भी चलाईं कि संदीप सिंह जांच से बचने के लिए "यूके भाग जाना" चाहता था। संदीप सिंह ने नोटिस के माध्यम से कहा है कि 22 अगस्त से 24 अगस्त तक रिपब्लिक टीवी के संवाददाताओं ने उनके घर में घुसने की कोशिश की, "सुरक्षा गार्ड" और "घरेलू सहायकों" को परेशान किया और उनकी छवि  छवि को बदनाम किया। 

अपने अधिवक्ता राजेश कुमार के माध्यम से भेजे गए नोटिस में संदीप सिंह ने कहा है कि चैनल की कार्रवाई भारतीय दंड संहिता की धारा 499 के तहत मानहानि की है, जो संहिता की धारा 500 के तहत दंडनीय है। नोटिस में चैनल से कहा गया है कि वह सभी दुर्भावनापूर्ण फुटेज, लेख और संदीप सिंह के बारे में रिपोर्ट को हटाए और माफी भी मांगे, जिसमें संदीप सिंह की ईमानदारी और निर्दोष होने के बारे में सही तथ्य शामिल हों। 

सिंह ने मुआवजा मांगने के साथ ही चेतावनी दी है कि यदि नोटिस का 15 दिनों के भीतर पालन नहीं किया जाता है तो अदालत में मुक़दमा दायर किया जाएगा और मानहानि के लिए हर्जाना मांगा जाएगा।

सरकार ने भी भेजा नोटिस

संदीप सिंह के अलावा महाराष्ट्र सरकार ने भी विशेषाधिकार हनन मामले में अर्णब गोस्वामी को दूसरा नोटिस भेजा है। पहले नोटिस के अनुसार, अर्णब को पांच अक्टूबर तक जवाब देना था लेकिन उन्होंने नहीं दिया। बताया जाता है कि अर्णब गोस्वामी उस संबंध में सुप्रीम कोर्ट से राहत चाहते थे लेकिन अभी तक मिली नहीं। 

कार्रवाई होगी?

दूसरे नोटिस के मुताबिक़, यदि अर्णब गोस्वामी ने 20 अक्टूबर तक नोटिस का जवाब नहीं दिया तो सरकार उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगी। इसके अलावा बॉम्बे हाई कोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की रिपोर्टिंग के दायरे को लेकर चल रही याचिका की सुनवाई में बुधवार को केंद्र सरकार ने कहा कि वह अभिव्यक्ति और मीडिया की आजादी को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी पूर्व के आदेशों से सहमत है। इस मामले में अभी तक रिपब्लिक टीवी की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। रिपब्लिक टीवी की प्रतिक्रिया मिलने पर लेख को अपडेट किया जायेगा।

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संजय राय
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