महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव में सत्ता के लिए हो रहे अजीबोगरीब गठबंधन पर अब ब्रेक लग गया है। बीजेपी-कांग्रेस और बीजेपी-एआईएमआईएम गठबंधन को लेकर शर्मिंदगी की स्थिति बनी तो दोनों दलों की ओर से अब सफाई आई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ कह दिया कि बीजेपी का कांग्रेस या असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के साथ गठबंधन बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्थानीय बीजेपी नेताओं को तुरंत इन गठबंधनों को तोड़ने के आदेश दिए हैं। अगर किसी ने पार्टी के नियम तोड़े तो उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। कांग्रेस ने भी गठबंधन में शामिल होने वाले अपने सभी 12 सदस्यों को निलंबित कर दिया है।

ये बयान अंबरनाथ और अकोट नगर परिषद में हुए पोस्ट-पोल गठबंधनों के बाद आया है। इन जगहों पर बीजेपी ने अपने पुराने दुश्मनों से हाथ मिलाकर सत्ता हासिल करने की कोशिश की थी, लेकिन अब पार्टी हाईकमान ने इस पर रोक लगा दी है।
ताज़ा ख़बरें

अंबरनाथ में बीजेपी-कांग्रेस का गठबंधन

ठाणे जिले के अंबरनाथ नगर परिषद में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। उसने 27 सीटें जीतीं। लेकिन सत्ता से बाहर रखने के लिए बीजेपी ने 'अंबरनाथ विकास आघाड़ी' बनाई। इसमें बीजेपी के 14 सदस्य, कांग्रेस के 12 सदस्य, अजित पवार गुट की एनसीपी के 4 सदस्य और एक निर्दलीय शामिल थे। इस आघाड़ी का ग्रुप लीडर बीजेपी के अभिजीत गुलाबराव करंजुले-पाटिल को बनाया गया। इसकी जानकारी ठाणे जिला कलेक्टर को दी गई। इस गठबंधन की मदद से बीजेपी ने नगर अध्यक्ष का पद भी जीत लिया। लेकिन यह गठबंधन स्थानीय स्तर पर बिना राज्य नेतृत्व की इजाजत के हुआ था।

कांग्रेस ने इसे गंभीरता से लिया और तुरंत कार्रवाई की। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के उपाध्यक्ष गणेश पाटिल ने अंबरनाथ ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को पत्र लिखा। पत्र में कहा गया, 'हमने कांग्रेस के झंडे पर चुनाव लड़ा और 12 सीटें जीतीं। लेकिन राज्य नेतृत्व को बताए बिना बीजेपी से गठबंधन कर लिया। यह मीडिया से पता चला। यह अच्छी बात नहीं है। राज्य अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के निर्देश पर आपको पार्टी से निलंबित किया जाता है।' इसके साथ ही कांग्रेस ने सभी 12 नवनिर्वाचित पार्षदों को भी पार्टी से निलंबित कर दिया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि बीजेपी और कांग्रेस का कोई गठबंधन नहीं है, क्योंकि दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ा था। पार्टी ने रिपोर्ट मंगवाई है। रिपोर्ट आने के बाद और बड़ी कार्रवाई होगी।

अकोट में बीजेपी का AIMIM से गठबंधन

अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में भी बीजेपी ने चौंकाने वाला कदम उठाया। यहां 33 सीटों पर चुनाव हुए। बीजेपी को सबसे ज्यादा सीटें मिलीं, लेकिन बहुमत नहीं। मेयर का पद बीजेपी की माया धुले ने जीता। उन्होंने एआईएमआईएम की उम्मीदवार फिरोजाबी सिकंदर राणा को 5271 वोटों से हराया था।

बहुमत के लिए बीजेपी ने 'अकोट विकास मंच' बनाया। इसमें एआईएमआईएम के 5 पार्षदों के अलावा दोनों शिवसेना गुट (शिंदे और उद्धव ठाकरे), दोनों एनसीपी गुट (अजित पवार और शरद पवार) और बच्चू कडू की प्रहार जनशक्ति पार्टी शामिल हुई। इस मंच की कुल ताकत 25 सदस्य हो गई यानी मेयर सहित 26 हो गई। ग्रुप लीडर बीजेपी के रवि ठाकुर बने। यह जानकारी अकोला जिला कलेक्टर को मंगलवार को दी गई। 13 जनवरी को डिप्टी मेयर और अन्य पदों के चुनाव होने हैं। विपक्ष में सिर्फ 6 कांग्रेस पार्षद और 2 वंचित बहुजन आघाड़ी के सदस्य रह गए।
महाराष्ट्र से और ख़बरें

फडणवीस की सख्ती- यह स्वीकार नहीं

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को कहा, 'कांग्रेस और एआईएमआईएम से गठबंधन स्वीकार नहीं है। इसे तोड़ना होगा। इसके लिए निर्देश दे दिए गए हैं। मामले की जांच होगी और अगर किसी ने आदेश तोड़े तो कार्रवाई होगी। बीजेपी कांग्रेस या एआईएमआईएम से गठबंधन स्वीकार नहीं कर सकती। हमने यह साफ कर दिया है।' फडणवीस की यह नाराजगी ठाणे जिले से आने वाले शिंदे गुट और बीजेपी नेताओं के बीच सत्ता की लड़ाई से भी जुड़ी बताई जा रही है।

राजनीतिक हलचल मची

ये गठबंधन स्थानीय स्तर पर सत्ता की चाह में हुए थे, लेकिन राज्य स्तर पर बीजेपी की विचारधारा से मेल नहीं खाते। विपक्षी दल अब बीजेपी पर हमलावर हैं। वे कह रहे हैं कि 'कांग्रेस मुक्त भारत' और हिंदुत्व की बात करने वाली बीजेपी सत्ता के लिए कुछ भी कर सकती है। शिवसेना यूबीटी नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा है, 'तो अगली बार जब भी किसी भी पॉलिटिकल पार्टी का कोई भी समर्थक यहाँ फैसलों के बारे में नैतिकता की बड़ी-बड़ी बातें करने की कोशिश करे तो चुप रहने में ही भलाई है। इसके साथ ही बीजेपी ने अकोला की अकोट नगर पालिका में सत्ता हासिल करने के लिए एआईएमआईएम के साथ गठबंधन किया है। महाराष्ट्र की राजनीति नए लोगों के लिए नहीं है, यह प्रो मैक्स लेवल की है।'
सर्वाधिक पढ़ी गयी ख़बरें
अब सभी की नजर इस पर है कि बीजेपी इन गठबंधनों को कितनी जल्दी तोड़ती है और क्या स्थानीय नेताओं पर कार्रवाई होती है। कांग्रेस की सख्ती से अंबरनाथ में सत्ता का समीकरण बदल सकता है। महाराष्ट्र में निकाय चुनावों की राजनीति में यह घटना दिखाती है कि सत्ता के खेल में दुश्मनी और दोस्ती कितनी जल्दी बदल जाती है, लेकिन पार्टी हाईकमान की लकीर से बाहर जाना महंगा पड़ सकता है।