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फ्लैट्स को लेकर कंगना ने किया नियमों का उल्लंघन, याचिका खारिज

विवादित ट्वीट्स के लिए सुर्खियों में बनी रहने वालीं सिने अदाकारा कंगना रनौत को मुंबई की एक अदालत के आदेश से करारा झटका लगा है। अदालत ने कंगना की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) को उनके फ़्लैट्स पर कार्रवाई से रोके जाने की गुहार लगाई थी। 

जज एलएस चव्हाण ने अपने आदेश में कहा है कि कंगना रनौत के खार के इलाक़े में स्थित एक बिल्डिंग में अपने तीनों फ़्लैट्स को आपस में मिलाकर एक कर लिया और ऐसा करके उन्होंने संक एरिया, डक्ट एरिया और सामान्य रास्ते को फ़्लोर स्पेस इंडेक्स में बदलकर रहने वाली जगह बना लिया। अदालत ने कहा कि यह स्वीकृत की गई योजना का घनघोर उल्लंघन है और ऐसा करने के लिए सक्षम प्राधिकरण की अनुमति ज़रूरी है। 

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बीएमसी ने मार्च, 2018 में कंगना को इन फ़्लैट्स में अनाधिकृत निर्माण के लिए नोटिस दिया था। इसके बाद उन्हें एक और नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उनसे इन फ़्लैट्स को स्वीकृत योजना की ही तरह बनाने के लिए कहा गया था। बीएमसी ने इस नोटिस में चेतावनी दी थी कि ऐसा न करने पर अनाधिकृत निर्माण को ध्वस्त कर दिया जाएगा। 

कंगना रनौत ने अदालत में इस नोटिस को चुनौती दी थी और अनुरोध किया था कि बीएमसी को ऐसा करने से रोका जाए। तब अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। लेकिन 23 दिसंबर को दिए गए ताज़ा आदेश में जज एलएस चव्हाण ने सिने अदाकारा की याचिका को निरस्त करते हुए कहा है कि इस मामले में उनकी अदालत के दख़ल की कोई ज़रूरत नहीं है। 

कंगना ने दिया जवाब

अदालत के आदेश के बाद कंगना ने ट्वीट कर जवाब दिया है। उन्होंने उद्धव सरकार को महाविनाशकारी सरकार बताते हुए कहा है कि यह उसका फ़ेक प्रोपेगेंडा है और उन्होंने किसी भी फ़्लैट को नहीं जोड़ा है। कंगना ने कहा है कि पूरी बिल्डिंग इसी तरह बनी हुई है और बीएमसी उन्हें परेशान कर रही है। उन्होंने कहा कि वह ऊंची अदालत में जाकर इसके ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ेंगी। 
Kangana ranaut khar flat issue  - Satya Hindi

हालांकि अदालत ने कंगना को छह हफ़्ते का वक़्त दिया है, जिसमें वे इस आदेश को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दे सकती हैं। 

9 सितंबर को बीएमसी ने कंगना के पाली हिल इलाक़े में स्थित बंगले के कुछ हिस्से को गिरा दिया था। बीएमसी का कहना था कि इसमें अनाधिकृत निर्माण किया गया है। तब कंगना ने बीएमसी की कार्रवाई के ख़िलाफ़ बॉम्बे हाई कोर्ट का रूख़ किया था। इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें राहत दी थी। कोर्ट ने कहा था कि उनके बंगले पर दुर्भावना में कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने कहा था कि इसके नुक़सान की भरपाई की जानी चाहिए। 

इसके साथ ही कोर्ट ने कंगना को भी हिदायत दी थी और कहा था कि वह फिल्म उद्योग में कथित माहौल और स्थिति को देखते हुए याचिकाकर्ता (कंगना रनौत) द्वारा लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं करती और याचिकाकर्ता को सार्वजनिक प्लेटफार्मों पर संयम बनाए रखने का सुझाव दिया जाता है। 

सितंबर में तब जोरदार बवाल हुआ था जब बीएमसी ने कंगना के ऑफ़िस मणिकर्णिका फ़िल्म्स के बाहर बनी एक बालकनी और कुछ जगहों पर तोड़फोड़ की थी। इसके बाद कंगना रनौत और शिव सेना के नेताओं के बीच ज़बरदस्त बयानबाज़ी हुई थी।

बंगले के एक हिस्से को गिराए जाने से पहले कंगना ने एक के बाद एक कई ट्वीट करके महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा था। कंगना ने बीएमसी को बाबर और उसके अधिकारियों को उसकी सेना बताया था। कंगना ने ट्वीट कर कहा था, ‘मणिकर्णिका फ़िल्म्स मेरे लिए एक इमारत नहीं राम मंदिर ही है, आज वहां बाबर आया है, आज इतिहास फिर खुद को दोहराएगा राम मंदिर फिर टूटेगा मगर याद रख बाबर यह मंदिर फिर बनेगा यह मंदिर फिर बनेगा, जय श्री राम, जय श्री राम, जय श्री राम।’ 

महाराष्ट्र सरकार के साथ कंगना के विवाद पर देखिए वीडियो- 

शिव सेना नेताओं और कंगना रनौत के बीच ज़बरदस्त ज़ुबानी जंग की शुरुआत सुशांत सिंह मौत के मामले में भाई-भतीजावाद, ड्रग्स जैसे आरोप लगाने से हुई थी लेकिन बात महाराष्ट्र में क़ानून-व्यवस्था तक पहुंच गई थी। कंगना ने मुंबई को पीओके और महाराष्ट्र को पाकिस्तान कहा था और इसके बाद शिव सेना ने इस पर पलटवार किया था।  

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किसानों पर अभद्र टिप्पणी

कंगना रनौत ने कुछ दिन पहले बदजुबानी की सरहदों को लांघते हुए केंद्र सरकार के कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे किसानों को आतंकी बता दिया था। कंगना ने लिखा था- ‘ये वही आतंकी हैं, नागरिकता क़ानून (सीएए) से एक भी इंसान की नागरिकता नहीं गयी मगर इन्होंने ख़ून की नदियां बहा दीं।’ इसे लेकर कंगना के ख़िलाफ़ कर्नाटक में एफ़आईआर भी दर्ज की गई थी। 

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