राज ठाकरे ने कहा है कि अयोध्या राम मंदिर से दान के रुपये गायब हुए और सिद्धि विनायक मंदिर से भी हर साल 18 करोड़ रुपये चोरी हो रहे थे। मंदिर ट्रस्ट चेयरमैन सदा सरवणकर ने सवाल किया कि क्या मंदिर की प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश है।
राज ठाकरे का आरोप- सिद्धिविनायम मंदिर में दान की चोरी हुई।
यूपी के अयोध्या में राम मंदिर के बाद अब मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर में कथित दान चोरी का विवाद गहरा गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे के यह दावा करने के बाद कि मंदिर से हर साल करीब 18 करोड़ रुपये का दान चोरी हो रहा था, महाराष्ट्र सरकार के विधि एवं न्याय विभाग ने सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट से पूरी रिपोर्ट मांगी है। हालाँकि मंदिर ट्रस्ट ने दावा किया है कि सरकार की यह कार्रवाई राज ठाकरे के आरोपों के कारण नहीं, बल्कि ट्रस्ट की ओर से मई 2026 में कराए जाने वाले ऑडिट के अनुरोध के आधार पर शुरू हुई है।
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी राहुल लोंढे ने बताया कि विधि एवं न्याय विभाग ने मंदिर प्रशासन से पूरी वित्तीय रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य सरकार आगे की कार्रवाई पर फ़ैसला करेगी। ट्रस्ट का कहना है कि उसने पहले ही मंदिर के दान और वित्तीय लेनदेन का विस्तृत ऑडिट कराने का अनुरोध सरकार से किया था।
राज ठाकरे ने क्या लगाया आरोप?
महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेना के स्थापना दिवस कार्यक्रम में दो दिन पहले ही राज ठाकरे ने दावा किया था कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को भेजे गए एक पत्र में कहा गया है कि सिद्धिविनायक मंदिर से हर साल लगभग 18 करोड़ रुपये की चोरी हो रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर के दानपात्र से लगातार पैसे निकाले जा रहे थे और यह मामला लंबे समय तक चलता रहा।
राज ठाकरे ने कहा कि चोरी पकड़े जाने से पहले मंदिर के दान की साप्ताहिक राशि 50 लाख रुपये से भी कम रहती थी, लेकिन चोरी का खुलासा होने के बाद वही इकट्ठा दान बढ़कर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये प्रति सप्ताह तक पहुँच गया। उन्होंने कहा कि इससे साफ़ संकेत मिलता है कि लंबे समय से दान की रकम में हेराफेरी हो रही थी।राज ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले पर बोलने की मांग की और कहा कि जब मंदिर जैसे आस्था के केंद्र भी सुरक्षित नहीं हैं तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
ट्रस्ट ने आरोपों को बताया भ्रामक
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट ने राज ठाकरे के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को ऐसा कोई पत्र ट्रस्ट की ओर से नहीं भेजा गया था। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार ट्रस्ट अध्यक्ष एवं महाराष्ट्र सरकार में राज्य मंत्री सदा सरवणकर ने कहा कि ट्रस्ट ने खुद ही वित्तीय गड़बड़ियों की आशंका के बाद कार्रवाई शुरू की थी। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने खुद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी प्रमुख विश्वास नांगरे पाटिल से शिकायत की थी, जिसके बाद जाँच शुरू हुई।कैसे सामने आया चोरी का मामला?
ट्रस्ट के अनुसार मार्च 2026 में मंदिर के एक दानपात्र से नकदी गायब होने का मामला सामने आया। 20 मार्च को मंदिर प्रशासन ने दादर पुलिस थाने में क़रीब 10 हजार रुपये की चोरी की शिकायत दर्ज कराई। जाँच के दौरान पुलिस ने क़रीब 80 हजार रुपये बरामद किए। सीसीटीवी फुटेज की जांच में कथित तौर पर कुछ कर्मचारियों को कई दिनों तक छोटे दानपात्र से नकदी निकालते हुए देखा गया। इसके बाद मुख्य आरोपी राजेंद्र पेंदुरकर सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब तक इस मामले में आठ लोगों के ख़िलाफ़ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। सभी आरोपी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
ट्रस्ट का दावा- हमने ही उजागर की गड़बड़ी
सदा सरवणकर ने कहा कि अगर ट्रस्ट चाहता तो मामला दबाया जा सकता था, लेकिन उसने खुद अधिकारियों को सूचना देकर कार्रवाई कराई। उन्होंने कहा कि संदिग्ध कर्मचारियों को सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हटाया गया और बाद में मुख्य आरोपी सहित कई लोगों की गिरफ्तारी हुई।
सरवणकर ने दावा किया कि इस मामले में कुल क़रीब 45 कर्मचारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है और उन्हें निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गिरफ्तार कुछ लोगों के संबंध शिवसेना यूबीटी से जुड़े नेताओं से हैं। हालाँकि शिवसेना यूबीटी की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सीआईडी जाँच की भी मांग
ट्रस्टी राहुल लोंढे ने कहा कि मंदिर ट्रस्ट चाहता है कि एसीबी जाँच के साथ-साथ सीआईडी जाँच भी कराई जाए ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच हो सके। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राज ठाकरे ने जिस पत्र का ज़िक्र किया, वह आखिर किसका था, क्योंकि ट्रस्ट ने ऐसा कोई पत्र डिप्टी सीएम को नहीं लिखा।
मुंबई का सिद्धिविनायक मंदिर देश के सबसे समृद्ध मंदिरों में गिना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में मंदिर की कुल आय लगभग 182 करोड़ रुपये रही।
विपक्ष हमलावर
राज ठाकरे के आरोपों के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। बीजेपी नेता राम कदम ने कहा कि यदि राज ठाकरे के पास ठोस सबूत हैं तो उन्हें पुलिस या सरकार को सौंपना चाहिए। बिना जाँच के ऐसे आरोप लगाने से करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएँ आहत होती हैं। कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि यदि वास्तव में वित्तीय गड़बड़ियाँ हुई हैं तो निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए, क्योंकि श्रद्धालु अपनी आस्था से दान देते हैं और उसके दुरुपयोग को स्वीकार नहीं किया जा सकता।राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता रोहित पवार ने कहा कि यदि ट्रस्ट के सदस्य स्वयं वित्तीय गड़बड़ियों पर सवाल उठा रहे हैं तो सरकार को मामले की पारदर्शी जाँच करानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन सदा सरवणकर ने सवाल उठाया है कि क्या मंदिर की प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश है।
अब विधि एवं न्याय विभाग द्वारा मांगी गई रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि केवल नियमित ऑडिट कराया जाएगा या फिर किसी विशेष जांच एजेंसी से विस्तृत जांच कराई जाएगी। वहीं, ट्रस्ट का कहना है कि वह जाँच में पूरा सहयोग करेगा और यदि किसी स्तर पर वित्तीय गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।