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महाराष्ट्र: 25 कांग्रेसी विधायक सोनिया से क्यों मिलना चाहते हैं, सबकुछ ठीक नहीं?

राष्ट्रीय स्तर पर और कई राज्यों में भी मुश्किल दौर से गुजर रही कांग्रेस के लिए क्या महाराष्ट्र में भी एक नयी समस्या खड़ी होने वाली है? महाराष्ट्र के कम से कम 25 कांग्रेस विधायकों ने महा विकास अघाड़ी सरकार में कांग्रेस के मंत्रियों के ख़िलाफ़ शिकायत करने के लिए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मिलने का समय मांगा है। राष्ट्रीय स्तर जी-23 नेताओं से मेलजोल करने में जुटीं सोनिया को अब महाराष्ट्र में भी दखल देना पड़ सकता है।

एक रिपोर्ट के अनुसार जिन 25 विधायकों ने सोनिया से मिलने का समय मांगा है उनकी शिकायत है कि महाराष्ट्र की सरकार में शामिल कांग्रेस के मंत्रियों ने 'उनकी चिंताओं का समाधान नहीं किया' है। विधायकों ने एक पत्र में गांधी से 'चीजों को ठीक करने' के लिए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।

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महाराष्ट्र कांग्रेस के विधायकों की यह नयी परेशानी कांग्रेस नेतृत्व के लिए ऐसे वक़्त में आयी है जब वह पंजाब और उत्तराखंड जैसे राज्यों में भी चीजें ठीक नहीं कर पाया है। दोनों राज्यों में चुनाव नतीजे आए क़रीब तीन हफ़्ते हो गए लेकिन अभी तक कांग्रेस यह तय नहीं कर पाई है कि उन राज्यों में उसके विपक्ष के नेता कौन होंगे, उन राज्यों में पार्टी का नेतृत्व कौन संभालेगा। बीजेपी जैसी पार्टी से लड़ने के लिए क्या कांग्रेस इतनी धीमी प्रक्रिया से काम कर उसके मुक़ाबले में आ पाएगी?

इन राज्यों की बात छोड़ दें तो भी केंद्र स्तर पर ही कांग्रेस नेतृत्व जी-23 नेताओं द्वारा पैदा किए गए हालात से जूझ रहा है। यह वही जी-23 गुट है जिसने साल 2020 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी नेतृत्व के कामकाज को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। इसके बाद भी अक्सर वे कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल दागते रहते हैं।

जी-23 गुट के प्रमुख नेताओं में गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, शशि थरूर आदि शामिल हैं। पाँच राज्यों के चुनाव में हार के बाद जब जी-23 के नेताओं के आलोचनात्मक बयान आने लगे तो सोनिया गांधी ने उन नेताओं से बातचीत शुरू की। 

इसी महीने क़रीब दो हफ्ते पहले सोनिया ने गुलाम नबी आजाद से मुलाकात की थी। इनके अलावा आनंद शर्मा, मनीष तिवारी और विवेक तन्खा से भी सोनिया ने बातचीत की थी।

इन्हीं हालातों के बीच अब महाराष्ट्र के कांग्रेसी विधायकों का मामला सामने आ गया। कुछ विधायकों ने ईटी को बताया कि महाराष्ट्र विकास अघाडी यानी एमवीए सरकार में मंत्री, ख़ासकर कांग्रेस के मंत्री, उनके साथ 'समन्वय नहीं' कर रहे हैं। विधायकों में से एक ने पूछा, 'अगर मंत्री विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में काम को लागू करने के अनुरोधों की अनदेखी करते हैं तो पार्टी चुनावों में अच्छा प्रदर्शन कैसे करेगी।'

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रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी में समन्वय की कमी का संकेत देते हुए विधायकों ने कहा है कि उन्हें पिछले सप्ताह ही पता चला कि कांग्रेस के प्रत्येक मंत्री को तीन विधायकों के मुद्दों को ठीक से निपटाने के लिए ज़िम्मेदारी सौंपी गयी थी। एक अन्य कांग्रेसी विधायक ने कहा, 'हमें तब पता चला जब एचके पाटिल ने हाल ही में एक बैठक की थी कि कांग्रेस मंत्रियों को तीन-तीन विधायक आवंटित किए गए थे। यह स्पष्ट रूप से एमवीए सरकार बनने के कुछ महीने बाद किया गया था, लेकिन हमें इसके बारे में केवल अब पता चला जब अगले चुनाव के 2.5 साल बचे हैं। अब भी, कोई नहीं जानता कि कौन सा मंत्री हमसे जुड़ा हुआ है।' 

कांग्रेस के अन्य विधायकों ने कहा कि पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से पिछड़ गई क्योंकि उपमुख्यमंत्री अजीत पवार नियमित रूप से राकांपा विधायकों से मिलते हैं, धन आवंटित करते हैं और उनकी शिकायतें सुनते हैं। कांग्रेस के एक अन्य विधायक ने कहा, 'राकांपा हम पर हमला कर रही है। राकांपा मंत्रालयों को अधिक धन आवंटित किया जाता है और अगर चीजें ऐसी ही रहती हैं, तो महाराष्ट्र में कांग्रेस अन्य राज्यों की तरह हाशिए पर चली जाएगी।' 

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बहरहाल, महाराष्ट्र कांग्रेस के विधायक पाँच राज्यों में चुनाव का हवाला देते हुए सचेत कर रहे हैं कि यदि ध्यान नहीं दिया गया तो कांग्रेस की हालत अन्य राज्यों की तरह यहाँ भी हो जाएगी। महाराष्ट्र में ये हालात क्या सुधरेंगे, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उन्हें नेतृत्व से मिलने का मौक़ा मिलता है या नहीं और उनकी समस्याओं को सुना जाता है या नहीं।
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