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महाराष्ट्र: क्या शिवसेना में शामिल होंगी पंकजा मुंडे?

सत्ता के दम पर महाराष्ट्र में दल-बदल का जो खेल बीजेपी ने खेला था क्या वह खेल अब उसे उलटा पड़ने वाला है? बीजेपी नेताओं के जिस तरह के बयान आ रहे हैं उससे तो कुछ ऐसा ही लगता है। पहले, पार्टी के वरिष्ठ नेता एकनाथ खडसे और अब पंकजा मुंडे ने जिस तरह से अपनी नई राह अख्तियार करने की बात फ़ेसबुक पर लिखी है, वह बीजेपी हाई कमान का सिर दर्द बढ़ाने वाली है। कहा जा रहा है कि पंकजा मुंडे अपने पिता गोपीनाथ मुंडे की जयंती (12 दिसंबर) पर कोई बड़ा फ़ैसला कर सकती हैं।

राजनीतिक घटनाक्रम किस करवट बैठते हैं यह समय निर्धारित करेगा लेकिन जो बात पंकजा मुंडे ने फ़ेसबुक पोस्ट में लिखी है, उसके बाद सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या वह बीजेपी छोड़कर शिवसेना का दामन थामने वाली हैं?

पंकजा मुंडे के नए रुख से बीजेपी में किस तरह का हड़कंप मचा है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल, पंकजा की बहन और प्रमोद महाजन की सांसद पुत्री पूनम महाजन, प्रमोद महाजन के बड़े भाई प्रकाश महाजन सहित करीब आधा दर्जन बीजेपी नेताओं के बयान इस विषय पर आ गए हैं। शिवसेना नेता संजय राउत ने यह कहकर इस पूरे मामले को और हवा दे दी है कि बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता शिवसेना में आने के लिए तैयारी कर रहे हैं।

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12 विधायक भी छोड़ेंगे बीजेपी?

पंकजा को लेकर यह संभावनाएं भी जताई जा रही हैं कि अगर वह बीजेपी का दामन छोड़ती हैं तो उनके करीबी माने जाने वाले 12 विधायक भी बीजेपी का साथ छोड़ सकते हैं। अब सवाल यह उठता है कि महाराष्ट्र में बीजेपी की नींव की ईंट माने जाने वाले महाजन-मुंडे घराने का बीजेपी से मोह भंग क्यों हो रहा है? दरअसल, इसका भी सूत्र कहीं ना कहीं गत दिनों प्रदेश में हुए नाटकीय घटनाक्रम से ही जुड़ा है। 

धनंजय का नाम आया था चर्चा में

देवेंद्र फडणवीस के रातों-रात अजीत पवार के साथ मिलकर मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के प्रकरण में एनसीपी के विधायक धनंजय मुंडे का नाम चर्चा में आया था। अजीत पवार ने शपथ लेने से पहले वाली रात को धनंजय मुंडे के घर पर ही एनसीपी विधायकों के साथ चर्चा की थी। यह ख़बरें चली थीं कि धनंजय मुंडे ने ही फडणवीस और अजीत पवार के बीच बातचीत आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी। 

मुंडे परिवार में राजनीतिक विवाद

धनंजय मुंडे ने इस बार हुए विधानसभा चुनाव में पंकजा मुंडे को शिकस्त दी है और वह उनके चचेरे भाई भी हैं। मुंडे परिवार में चल रहे राजनीतिक विवाद की कहानी 2009 में शुरू हुई जब बीड लोकसभा क्षेत्र से गोपीनाथ मुंडे चुनाव जीते और केंद्र की राजनीति में चले गए। गोपीनाथ मुंडे के केंद्र में जाने की वजह से परली विधानसभा सीट खाली हुई और उस पर पंकजा मुंडे को चुनाव लड़ाया गया और वह जीत भी गईं। धनंजय मुंडे भी चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला और इससे वह नाराज थे। उन्हें मनाने के लिए विधान परिषद में भेजा गया। 

यहीं से परिवार में जो टकराव शुरू हुआ, उसका धमाका जनवरी 2012 में हुआ जब धनंजय मुंडे ने नगरपालिका के चुनाव में अपने प्रत्याशी को जीत दिला दी। यही नहीं उन्होंने कृषि उत्पन्न बाजार समिति के चुनाव में भी अपना पैनल खड़ा कर चुनाव जीता और गोपीनाथ मुंडे को बड़ा झटका दे दिया और इसके बाद धनजंय एनसीपी में चले गए। 

2013 में धनंजय मुंडे एनसीपी के कोटे से विधान परिषद के लिए चुने गए और 2014 के विधानसभा चुनाव में पंकजा मुंडे के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। यह संघर्ष और बढ़ा जब कुछ ही दिनों बाद हुए नगरपालिका के चुनावों में एनसीपी जीत गई। इस बार जब पंकजा मुंडे चुनाव हारीं तो यह चर्चाएं जोरों पर थीं कि क्या देवेंद्र फडणवीस की इसमें कोई भूमिका रही है? क्योंकि फडणवीस और धनंजय मुंडे की नजदीकियों की चर्चा होती रही है। 

फडणवीस के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने पिछले पांच सालों में पार्टी में अपने हर प्रतिद्वंद्वी का क़द छोटा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। नितिन गडकरी हों, एकनाथ खड़से हों, विनोद तावड़े हों या फिर पंकजा मुंडे, ऐसे कई नाम बीजेपी के सूत्र इस कड़ी में गिनाते हैं।

बताया जाता है कि जब फडणवीस के पुनः मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का मामला आया और उससे धनंजय मुंडे का नाम जुड़ा तो पंकजा मुंडे को कहीं ना कहीं यह महसूस हुआ कि क्या उनके ख़िलाफ़ कोई बड़ी साजिश रचकर उन्हें उनके पिता के विधानसभा क्षेत्र से हराने का काम तो नहीं किया गया? पंकजा ने जो फ़ेसबुक पोस्ट लिखी है उसमें उन्होंने इस बात के संकेत भी दिए हैं। उन्होंने लिखा कि चुनाव में मिली हार के लिए किसी पर आरोप नहीं लगाने हैं लेकिन सभी पहलुओं पर कार्यकर्ताओं से विशेष चर्चा करनी है। 

पंकजा ने कार्यकर्ताओं की जगह ‘मावळे’ शब्द का इस्तेमाल किया है। ‘मावळे’ छत्रपति शिवाजी महाराज के सैनिकों को कहा जाता है और यह शब्द शिवसेना द्वारा अपने कार्यकर्ताओं के लिए प्रयोग किया जाता है। सिर्फ यही नहीं, बाला साहब ठाकरे की पुण्यतिथि, उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री पद की शपथ के बाद जिस तरह से पंकजा मुंडे ने ट्वीट किए हैं, उसे देखकर भी यह संभावनाएं जताई जा रही हैं कि कहीं कुछ तो पक रहा है। 

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सोमवार को पंकजा के ट्वीट का जवाब जब मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दिया तो चर्चाओं का बाज़ार और गर्म हो गया। उद्धव ठाकरे ने बधाई देने के लिए पंकजा मुंडे का आभार व्यक्त किया और यह भी कहा कि महाराष्ट्र विकास आघाडी की सरकार राज्य के हितों को सर्वोपरि मानते हुए काम करेगी और स्व. गोपीनाथ मुंडे साहब ने जिस महाराष्ट्र की कल्पना की थी, वैसा महाराष्ट्र विकसित करने का मैं आपको विश्वास देता हूँ। 

उद्धव ठाकरे ने पंकजा को दिया ट्विटर पर जवाब।
इस पूरे प्रकरण में अभी तक देवेंद्र फडणवीस का कोई बयान नहीं आया है। पंकजा मुंडे ने अपने ट्विटर अकाउंट से अपनी पहचान के रूप में बीजेपी नेता हटा दिया है। उन्होंने अपने पिता की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं से शामिल होने की अपील की है तथा इस बात के संकेत दिए हैं कि वह कोई बड़ा फ़ैसला करेंगी। यह बड़ा फ़ैसला क्या होगा, यह तो 12 तारीख़ को ही पता चलेगा लेकिन इसने महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चाओं का भूचाल ज़रूर ला दिया है।  
संजय राय
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