महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में दरारें गहरी होती जा रही हैं। 15 जनवरी को होने वाले बीएमसी और पुणे नगर निगम चुनाव से पहले डिप्टी सीएम अजीत पवार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एक-दूसरे पर गंभीर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। पूरी रिपोर्ट पढ़िए।
महाराष्ट्र की सत्ताधारी महायुति गठबंधन में दरारें अब खुलकर सामने आ गई हैं। उपमुख्यमंत्री अजित पवार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच नगर निकाय चुनावों को लेकर गवर्नेंस, फ्रीबीज और भ्रष्टाचार के आरोपों पर तीखी बयानबाजी छिड़ गई है। यह विवाद खासकर पुणे, पिंपरी-चिंचवाड़ और आगामी बीएमसी चुनावों से पहले महत्वपूर्ण हो गया है।
रविवार को पिंपरी में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान अजित पवार ने अपने एनसीपी और शरद पवार की एनसीपी (एसपी) का संयुक्त घोषणापत्र जारी करते हुए कहा कि वे बीजेपी की आलोचना नहीं कर रहे, बल्कि पिंपरी-चिंचवाड़ म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (पीसीएमसी) में गवर्नेंस की कमियों को उजागर कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "मैं बीजेपी की आलोचना नहीं कर रहा हूं। मैं सिर्फ पीसीएमसी की गलतियों को सामने ला रहा हूं। गलतियों को इंगित करना आलोचना नहीं है।" उन्होंने जोर दिया कि नौ साल बाद होने वाले इन सिविक चुनावों के कारण उनकी आलोचना तेज हुई है।
अजित पवार ने 2017 से 2022 तक बीजेपी के शासनकाल में भ्रष्टाचार और कुशासन का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के 27 वादों में से कोई भी पूरा नहीं हुआ। उन्होंने स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (एसआरए) प्रोजेक्ट्स में अनियमितताओं की जांच की मांग की, खासकर रावेत और भोसरी इलाकों में, और ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) से किसे फायदा हुआ, यह सवाल उठाया। उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में लागत वृद्धि का उदाहरण देते हुए एक ब्रिज प्रोजेक्ट का जिक्र किया, जिसकी लागत 70 लाख से बढ़कर 7 करोड़ हो गई।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे में मराठी अभिनेत्री गिरिजा ओक के साथ बातचीत के दौरान तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा, "अजित दादा सिर्फ बात करते हैं, मैं काम करता हूं।" फडणवीस ने जोर दिया कि उनकी सरकार सरकार की परफॉर्मेंस को महत्व देती है। उन्होंने याद दिलाया कि बीजेपी और अजित पवार की एनसीपी ने पहले सहमति जताई थी कि पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में चुनाव "फ्रेंडली" होंगे और पर्सनल अटैक नहीं होंगे। फडणवीस ने कहा, "मैंने संयम बरता है, लेकिन उन्होंने धैर्य खो दिया है।" और चुनावी दबाव को इसका कारण बताया।
फ्रीबीज पर कटाक्ष करते हुए फडणवीस ने एनसीपी-एसपी गठबंधन के फ्री मेट्रो यात्रा वादे को अवास्तविक बताया। उन्होंने कहा कि मेट्रो किराया तय करने वाली फेयर फिक्सेशन कमिटी केंद्र और राज्य दोनों से जुड़ी है, इसलिए किराया माफ करना संभव नहीं। "पुणे के लोग फ्रीबीज से ज्यादा विश्वसनीय सेवाएं चाहते हैं।" व्यंग्यात्मक अंदाज में उन्होंने कहा कि वे (अजित पवार) पुणे की महिलाओं के लिए फ्री एयर ट्रैवल का ऐलान कर सकते हैं।
फडणवीस ने एनसीपी पर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार उतारने का भी आरोप लगाया और कहा कि चुने जाने पर भी "उनकी जगह जेल में होगी, न कि म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफिस में।" उन्होंने बीजेपी के विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे विरोधी "निराश और गुस्से" में हैं। उन्होंने पीएम आवास योजना के तहत हाउसिंग प्रोजेक्ट्स का उदाहरण दिया और पहले एनसीपी शासन में खराब क्वालिटी के निर्माण की तुलना की।
यह जुबानी जंग ऐसे समय में हो रही है जब महाराष्ट्र में महत्वपूर्ण सिविक चुनाव होने वाले हैं। बीएमसी सहित 28 अन्य म्युनिसिपल कॉर्पोरेशनों (जिनमें पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ शामिल हैं) के चुनाव 15 जनवरी को होंगे, जबकि मतगणना 16 जनवरी को होगी। कुल 2,869 सीटें दांव पर हैं और 3.48 करोड़ से ज्यादा मतदाता वोट डालेंगे। बीएमसी चुनाव खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद पहला होगा और देश की सबसे अमीर सिविक बॉडी पर नियंत्रण तय करेगा। चुनावी रोल में "वोट चोरी" के आरोप भी लग रहे हैं।
दोनों पवार की पार्टियों का संयुक्त घोषणापत्र
अपने गठबंधन के घोषणापत्र में अजित पवार ने कई बड़े वादे किए, जिनमें 500 वर्ग फुट तक के घरों के लिए 1 अप्रैल 2026 से प्रॉपर्टी टैक्स माफी, ड्राफ्ट डेवलपमेंट प्लान रद्द करना, रोजाना पानी की आपूर्ति, फ्री बस और मेट्रो यात्रा, बेहतर सड़कें, प्रदूषण नियंत्रण, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं, मॉडल स्कूल, छात्रों के लिए फ्री टैबलेट और स्किल ट्रेनिंग पूरी करने वाली महिलाओं के लिए 5 लाख तक के ब्याज-मुक्त लोन शामिल हैं।
गठबंधन में बढ़ती दरारों और तेज होती बयानबाजी के साथ, महाराष्ट्र की सिविक जंग, खासकर बीएमसी रेस, अंतिम चरण में और तेज होने की उम्मीद है।