महाराष्ट्र में कल्याण-डोम्बिवली नगर निगम (केडीएमसी) के चार पार्षदों के लापता होने के बाद शिवसेना (यूबीटी) ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। आशंका है कि ये पार्षद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो रहे हैं। संजय राउत ने इन्हें गद्दार बताया है।
महाराष्ट्र के कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (केडीएमसी) में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने चार पार्षदों के लापता होने की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई है। पार्टी को आशंका है कि ये पार्षद एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “हमने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है क्योंकि हमारे पार्षद गायब हैं। हम केडीएमसी में पोस्टर लगाएंगे। वे हमारे चिह्न पर चुने गए थे। वे विश्वासघाती हैं और जीत के महज 24 घंटे बाद ही उन्होंने अलग रास्ता चुन लिया।”
शिकायत कोलसेवाड़ी पुलिस थाने में शिवसेना (यूबीटी) के स्थानीय नेता शरद पाटिल ने दर्ज की। लापता बताए जा रहे पार्षदों के नाम हैं- मधुर म्हात्रे, कीर्ति धोने, राहुल कोट और स्वप्निल केने। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें से दो पार्षद शिंदे गुट से संपर्क में हैं, जबकि बाकी दो का ठिकाना hle नहीं चल रहा और शायद वे महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) में वापस लौट सकते हैं, क्योंकि स्थानीय समीकरणों के कारण उन्होंने यूबीटी के सिंबल पर चुनाव लड़ा था।
122 सदस्यीय केडीएमसी में बहुमत का आंकड़ा 62 है। शिंदे गुट के पास फिलहाल 53 पार्षद हैं, भाजपा के 50 और मनसे के 5 पार्षदों का समर्थन है। यदि ये चारों लापता पार्षद शिंदे गुट में शामिल हो जाते हैं, तो बहुमत आसानी से हासिल हो जाएगा। शिवसेना (यूबीटी) के पास कुल 11 पार्षद हैं, लेकिन केवल 7 ने ही कोंकण विभागीय आयुक्त के पास आधिकारिक ग्रुप रजिस्टर किया है।
एक वरिष्ठ मनसे नेता ने कहा कि यदि मनसे ने शिंदे गुट का समर्थन नहीं किया होता, तो मनसे के पार्षद भी उसमें चले जाते। शिवसेना (यूबीटी) ने मनसे के इस रुख पर नाराजगी जताई है।
ठाणे पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी तक कोई गुमशुदगी का मामला दर्ज नहीं किया गया है, क्योंकि माना जा रहा है कि पार्षद अपनी मर्जी से ऐसा कर रहे हैं।
इस बीच, मीरा भायंदर महानगरपालिका (एमबीएमसी) में शिवसेना ने विपक्ष में बैठने का फैसला किया है। यहां भाजपा ने 95 में से 78 सीटें जीतीं, कांग्रेस को 13 और शिवसेना को 3 सीटें मिलीं। महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुजफ्फर हुसैन ने कहा, “हम और शिवसेना विपक्ष में रहेंगे।”
यह घटना ठाकरे गुट और शिंदे गुट के बीच चल रही राजनीतिक जंग का नया अध्याय है, जहां नगर निगम चुनावों के बाद दल-बदल की आशंकाएं बढ़ गई हैं। स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।