पूर्व पीएम इंदिरा गांधी पर विपक्षी नेता जिस 'गूंगी गुड़िया' से तंज कसते रहे थे उसी 'गूंगी गुड़िया' से महाराष्ट्र की उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार पर तंज कसे जाने से बवाल मच गया। यह बवाल तब मचा जब महाराष्ट्र कांग्रेस द्वारा उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को लेकर सोशल मीडिया पर की गई 'गूंगी गुड़िया' टिप्पणी पर एनसीपी ने पलटवार किया। एनसीपी ने कांग्रेस से सवाल पूछा कि क्या अब वह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लिए कभी इस्तेमाल किए गए इसी शब्द को सही मानती है?


यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब महाराष्ट्र कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर सुनेत्रा पवार की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो साझा किया। कांग्रेस द्वारा साझा किए गए वीडियो में बीड जिले की क़ानून-व्यवस्था को लेकर पत्रकार सुनेत्रा पवार से सवाल पूछने की कोशिश करते दिखाई देते हैं। आरोप है कि इसी दौरान विधायक धनंजय मुंडे पत्रकार को रोक देते हैं और प्रेस कॉन्फ्रेंस जल्द ख़त्म हो जाती है।
ताज़ा ख़बरें
वीडियो के साथ कांग्रेस ने लिखा, "सुनेत्रा पवार आखिर कब तक 'गूंगी गुड़िया' बनी रहेंगी?' कांग्रेस का कहना था कि बीड की संरक्षक मंत्री होने के बावजूद सुनेत्रा पवार ने पत्रकारों के सवालों का जवाब नहीं दिया।

एनसीपी का कांग्रेस पर पलटवार

कांग्रेस की इस टिप्पणी पर एनसीपी के प्रवक्ता उमेश पाटील ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद और सरकार की आलोचना स्वाभाविक है, लेकिन महिलाओं के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किसी भी राजनीतिक दल को शोभा नहीं देता।

एनसीपी प्रवक्ता उमेश पाटील ने पूछा, "क्या कांग्रेस अब यह मान रही है कि इंदिरा गांधी के ख़िलाफ़ कभी इस्तेमाल की गई 'गूंगी गुड़िया' जैसी टिप्पणी सही थी?" उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने ही राजनीतिक इतिहास का विरोधाभास पैदा कर दिया है।

इंदिरा गांधी का उदाहरण दिया

उमेश पाटील ने कहा कि इंदिरा गांधी को भी उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत में विरोधियों ने 'गूंगी गुड़िया' कहा था। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने अपने काम, नेतृत्व और बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान लिए गए फ़ैसलों से आलोचकों को जवाब दिया और दुनिया की प्रभावशाली नेताओं में अपनी पहचान बनाई। एनसीपी ने कांग्रेस से अपील की कि वह यह टिप्पणी वापस ले और राजनीतिक संवाद की गरिमा बनाए रखे।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी कांग्रेस की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने कहा, 'महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा इस्तेमाल करना शर्मनाक है। यह राज्य की सभी महिलाओं का अपमान है।' उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इस बयान पर शर्म आनी चाहिए।

रोहित पवार ने क्या कहा?

एनसीपी (शरद पवार) के विधायक रोहित पवार ने कहा कि पूरे घटनाक्रम का संदर्भ भी देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "पत्रकार अपना सवाल पूछना चाहते थे लेकिन एक स्थानीय नेता ने उन्हें रोक दिया। सुनेत्रा पवार चाहतीं तो हस्तक्षेप कर सकती थीं, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा।" रोहित पवार ने भी माना कि इंदिरा गांधी को कभी 'गूंगी गुड़िया' कहा गया था, लेकिन उन्होंने अपने काम से उस छवि को बदल दिया था।

कांग्रेस ने अपने बयान का बचाव किया

विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस ने कहा कि उसका मकसद किसी महिला का अपमान करना नहीं था। कांग्रेस प्रवक्ता हनुमंत पवार ने कहा कि सुनेत्रा पवार बीड की संरक्षक मंत्री हैं, इसलिए उन्हें पत्रकारों के सवालों का जवाब देना चाहिए था। उन्होंने कहा, "उन्हें बीच में हस्तक्षेप करना चाहिए था और पत्रकारों के सवालों का जवाब देना चाहिए था। लेकिन उन्होंने चुप रहना चुना, इसलिए यह सवाल उठाया गया।"

इस विवाद के बाद कुछ एनसीपी कार्यकर्ता कांग्रेस कार्यालय भी पहुंच गए और सुनेत्रा पवार के लिए इस्तेमाल किए गए शब्दों पर माफी की मांग की। स्थिति को देखते हुए वहां सुरक्षा भी बढ़ाई गई।
महाराष्ट्र से और खबरें

'गूंगी गुड़िया' शब्द का इतिहास

'गूंगी गुड़िया' शब्द भारतीय राजनीति में नया नहीं है। साल 1966 में समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की शांत राजनीतिक शैली पर टिप्पणी करते हुए यह शब्द इस्तेमाल किया था। बाद में इंदिरा गांधी ने अपने राजनीतिक फैसलों और नेतृत्व के दम पर आलोचकों को जवाब दिया और देश की सबसे प्रभावशाली प्रधानमंत्रियों में शामिल हुईं।

सुनेत्रा पवार को लेकर कांग्रेस की टिप्पणी ने महाराष्ट्र में राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। कांग्रेस इसे जवाबदेही का सवाल बता रही है, जबकि एनसीपी इसे महिलाओं और इंदिरा गांधी दोनों का अपमान बता रही है। विवाद के बाद दोनों दल एक-दूसरे पर लगातार हमलावर हैं और मामला अब राजनीतिक बयानबाज़ी से आगे बढ़कर सार्वजनिक मर्यादा और राजनीतिक भाषा की बहस का विषय बन गया है।