चुनाव आयोग क्या मदद करेगाः इसी तरह के एक मामले को चुनाव आयोग ने जब संभाला था तो खासा विवाद हुआ था। महाराष्ट्र में जब शिवसेना पार्टी दो हिस्सों में बंट गई थी - एकनाथ शिंदे खेमा और उद्धव ठाकरे खेमा। चुनाव आयोग ने तब एकनाथ शिंदे गुट को पार्टी का नाम "शिवसेना" और पार्टी का प्रतीक "धनुष और तीर" आवंटित किया था। चुनाव आयोग ने अपने कदम को सही ठहराते हुए कहा था कि शिंदे का समर्थन करने वाले विधायकों को 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में 55 विजयी शिवसेना उम्मीदवारों के पक्ष में लगभग 76 प्रतिशत वोट मिले। सूत्रों का कहना है कि अजित पवार ने भी चुनाव आयोग से संपर्क साधा है और अलग नाम और चुनाव चिन्ह मांगा है। हालांकि अभी इस सूचना की पुष्टि किसी पक्ष ने नहीं की है।
शरद पवार गुट का क्या है दावाः इस बीच, शरद पवार के खेमे से जयंत पाटिल ने कहा कि उनके गुट के पास 44 विधायक हैं। उन्होंने कहा, "कल (रविवार) शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए कई विधायकों ने शरद पवार से मुलाकात की है। हमने इन विधायकों को 5 जुलाई तक का समय दिया है।" पाटिल ने कहा, "मैंने आज सुबह स्पीकर से बात की और उनसे हमारे मामले पर गौर करने का अनुरोध किया। उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि वह जल्द से जल्द इस पर गौर करेंगे।"पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह तथा अजित पवार द्वारा एनसीपी के नाम और चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ने के दावे के बारे में पूछे जाने पर पाटिल ने कहा, "पार्टी अध्यक्ष हमारे साथ हैं। कोई हमारी पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर दावा कैसे कर सकता है।"