अजित पवार की मौत के बाद एनसीपी में सत्ता संघर्ष को लेकर रोहित पवार ने बड़ा दावा है। क्या प्रफुल्ल पटेल ने पार्टी पर कब्जे की कोशिश की?
अजित पवार के प्लेन क्रैश पर रोहित पवार
अजित पवार की मौत के बाद क्या पार्टी पर कब्जे की कोशिश हुई? कम से कम अजित पवार के भतीजे रोहित पवार ने तो यही दावा किया है। उन्होंने कहा कि एनसीपी पर प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने कब्जा करने की कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि इसको सुनेत्रा पवार ने विफल कर दिया। एनसीपी (शरदचंद्र पवार गुट) के नेता और विधायक रोहित पवार ने अपने दावे के समर्थन में प्रफुल्ल पटेल और तटकरे द्वारा चुनाव आयोग को भेजे गए एक ख़त को पेश किया। हालाँकि उनके इस दावे को सुनील तटकरे ने सिरे से खारिज कर दिया और दावा किया कि शरद पवार गुट ही पार्टी का विलय कराकर पार्टी पर कब्जा करना चाहता था।
इन आरोपों पर तटकरे ने क्या-क्या जवाब दिया है, यह जानने से पहले यह जान लें कि रोहित पवार ने क्या दावा किया है। रोहित ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल और महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने पार्टी पर कब्जा करने की कोशिश की थी।
रोहित पवार ने कहा कि अजित पवार की मौत 28 जनवरी को हुई थी और सिर्फ 18 दिन बाद 16 फ़रवरी को प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और एनसीपी के राष्ट्रीय सचिव बृजमोहन श्रीवास्तव ने चुनाव आयोग को एक पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि इसमें उन्होंने झूठा दावा किया कि पार्टी के संविधान में बदलाव कर दिया गया है और कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल को सारी शक्तियां सौंप दी जाएँ।
रोहित पवार ने कहा, 'यह पहले से प्लान किया गया षड्यंत्र था। उन्होंने सुनेत्रा पवार और परिवार के अन्य सदस्यों को अंधेरे में रखा। न तो सुनेत्रा पवार को बताया गया और न ही उनके बेटे पार्थ पवार को। पार्टी के विधायकों को भी कुछ पता नहीं था।' बाद में जब सुनेत्रा को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने चुनाव आयोग को एक पत्र भेजकर पहले भेजे गये पत्र को अमान्य मानने की अपील की।
रोहित ने दिखाए 2 ख़त
रोहित पवार ने मीडिया के सामने दोनों पत्र दिखाए। एक प्रफुल्ल पटेल का 16 फरवरी का पत्र और दूसरा सुनेत्रा पवार का 10 मार्च का पत्र। रोहित ने कहा है कि सुनेत्रा पवार जब पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं तब उन्हें इस पत्र की जानकारी मिली। उन्होंने 10 मार्च को चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा कि 2 जनवरी से लेकर उनके अध्यक्ष बनने तक का कोई भी पत्र मान्य नहीं होना चाहिए। इससे प्रफुल्ल पटेल की कोशिश नाकाम हो गई।
रोहित पवार ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का भी जिक्र किया। अजित पवार की मौत के बाद गोयल ने कहा था कि प्रफुल्ल पटेल अब एनसीपी के अध्यक्ष बन गए हैं। बाद में गोयल ने माफी मांगी और कहा कि उनकी जानकारी ग़लत थी।
सुनील तटकरे का जवाब
इस आरोप पर एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, 'पार्टी पर कब्जा करने की कोशिश हमने नहीं, बल्कि वे (एनसीपी एसपी) कर रहे थे। इसलिए अजित पवार की मौत के तुरंत बाद विलय की बात उठाई गई। हम सब सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में एकजुट हैं।' तटकरे ने कहा कि बाहर से लोग पार्टी में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पूरी टीम सुनेत्रा पवार के साथ खड़ी है।
अजित पवार का प्लेन क्रैश साज़िश: रोहित
अजित पवार 28 जनवरी 2026 को बारामती में प्लेन क्रैश में अपनी जान गँवा चुके थे। उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार बाद में एनसीपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं। उन्होंने महाराष्ट्र में उपमुख्यमंत्री का पद भी संभाला। रोहित पवार ने इस मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह पूरी घटना एक बड़ी साजिश हो सकती है।
प्लेन क्रैश पर एफ़आईआर
अजित पवार विमान हादसे में कई कोशिशों के बाद भी महाराष्ट्र में एफ़आईआर दर्ज नहीं होने पर अब उनके भतीजे रोहित पवार ने बेंगलुरु में ज़ीरो एफ़आईआर दर्ज कराई है। रोहित ने एफ़आईआर में अजित पवार की मौत के मामले में आपराधिक साजिश का आरोप लागाया है। अब बेंगलुरु की हाई ग्राउंड पुलिस स्टेशन ने यह ज़ीरो एफ़आईआर महाराष्ट्र पुलिस को ट्रांसफर कर दी है।ज़ीरो एफ़आईआर एक ऐसी पुलिस शिकायत है जिसे किसी भी पुलिस थाने में दर्ज कराया जा सकता है, भले ही अपराध असल में कहीं और हुआ हो। इस एफ़आईआर को 'ज़ीरो' इसलिए कहा जाता है, क्योंकि जाँच के लिए इसे सही पुलिस थाने में भेजने से पहले, शुरू में इसे 0 सीरियल नंबर के साथ रजिस्टर किया जाता है।
पुलिस ने बताया है कि 23 मार्च को दर्ज हुई यह एफ़आईआर अब महाराष्ट्र के बारामती ग्रामीण पुलिस स्टेशन को भेज दी गई है। रोहित पवार का कहना है कि उनके चाचा अजित पवार की मौत कोई सामान्य एक्सीडेंट नहीं थी, बल्कि यह एक बड़ी आपराधिक साजिश का हिस्सा थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले शिकायतें किए जाने के बावजूद इस मामले को महाराष्ट्र में रजिस्टर नहीं किया गया, जिसके चलते उन्हें बेंगलुरु में पुलिस से संपर्क करना पड़ा। रोहित ने किस किस तरह के आरोप लगाए हैं, यह जानने से पहले यह जान लें कि दुर्घटना क्या थी।
बहरहाल, रोहित पवार का यह दावा एनसीपी में नई बहस छेड़ रहा है। पार्टी के अंदरूनी कलह की चर्चा फिर से शुरू हो गई है। दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।