शरद पवार खेमे के नेता रोहित पवार ने महाराष्ट्र SIR में गैर बीजेपी वोटरों के ख़िलाफ़ बीजेपी की बड़ी साज़िश का आरोप लगाया है। रोहित ने दावा किया कि बीजेपी अपने बूथ लेवल एजेंट यानी बीएलए के ज़रिए गैर बीजेपी वोटरों की पहचान कर रहा है। उन्होंने पूछा है कि वोटरों को 'हमारे', 'संदिग्ध' और 'विरोधी' जैसी श्रेणियों में बांट कर क्या उनके नाम हटाने की तैयारी नहीं है?

रोहित पवार ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए ख़तरा बताते हुए चुनाव आयोग से मामले की जाँच कराने की मांग की। वहीं बीजेपी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि सभी राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग के नियमों के तहत बीएलए नियुक्त करने का अधिकार है और पार्टी उसी प्रक्रिया का पालन कर रही है।
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रोहित पवार ने क्या आरोप लगाए?

रोहित पवार ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि एसआईआर अभियान के दौरान बीजेपी के बीएलए के एक ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए वोटरों के नाम के सामने तीन विकल्प दिए जा रहे हैं- हमारे, संदिग्ध और विरोधी। उनका आरोप है कि इन विकल्पों के आधार पर मतदाताओं का वर्गीकरण किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान विपक्षी विचारधारा वाले मतदाताओं के नाम हटाने या दूसरी जगह स्थानांतरित करने के आरोप पहले ही सामने आ चुके हैं। अब महाराष्ट्र में भी उसी तरह की प्रक्रिया अपनाए जाने की आशंका है।

रोहित पवार ने उठाए तीन बड़े सवाल

रोहित पवार ने चुनाव आयोग और बीजेपी से कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा-
  • जब SIR की प्रक्रिया चुनाव आयोग की सरकारी मशीनरी के जरिए चल रही है तो बीजेपी समानांतर सत्यापन कैसे कर रही है?
  • क्या "संदिग्ध" और "विरोधी" श्रेणी में रखे गए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने या दूसरी जगह स्थानांतरित करने की तैयारी है?
  • यदि अदालत ने राजनीतिक दलों को मतदाताओं के निजी रिकॉर्ड के आधार पर समानांतर प्रक्रिया चलाने का अधिकार नहीं दिया है तो बीजेपी किस कानूनी अधिकार से ऐसा कर रही है?
उन्होंने चुनाव आयोग से पूरे मामले का संज्ञान लेने और जांच कराने की मांग की।

बीजेपी ने क्या दिया जवाब?

महाराष्ट्र बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने रोहित पवार के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग हर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल को बूथ लेवल एजेंट यानी बीएलए नियुक्त करने की अनुमति देता है ताकि वे बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ की सहायता कर सकें। उनका कहना था कि बीजेपी पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार ही चला रही है और इसमें कुछ भी गैरकानूनी नहीं है।
नवनाथ बन ने रोहित पवार पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें पहले SIR की पूरी प्रक्रिया समझनी चाहिए या चुनाव आयोग के अधिकारियों से जानकारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर राजनीतिक दल को बीएलए नियुक्त करने का अधिकार है और बीजेपी उसी अधिकार का उपयोग कर रही है। बीजेपी नेता ने यह भी दावा किया कि एनसीपी (शरद पवार गुट) के पास पर्याप्त कार्यकर्ता नहीं हैं, इसलिए वह इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है।

महाराष्ट्र में चल रहा है SIR अभियान

महाराष्ट्र में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर की गणना प्रक्रिया 30 जून से शुरू हुई है। इस अभियान के तहत मतदाता सूची का सत्यापन किया जा रहा है ताकि गलत, डुप्लीकेट या अपात्र नामों की पहचान की जा सके। इसी प्रक्रिया के बीच रोहित पवार के आरोपों ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
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चुनाव आयोग से जांच की मांग

रोहित पवार ने कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल द्वारा मतदाताओं को राजनीतिक आधार पर वर्गीकृत किया जा रहा है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने चुनाव आयोग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि कोई नियमों का उल्लंघन हुआ हो तो उचित कार्रवाई करने की मांग की।

वहीं बीजेपी का कहना है कि विपक्ष बिना तथ्यों के भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है और एसआईआर की पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग की निगरानी में तय नियमों के अनुसार ही चल रही है। फिलहाल इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।