संसद के बजट सत्र में परिसीमन बिल का विरोध करने वाली शरद पवार की एनसीपी (एसपी) नेता सुप्रिया सुले ने कहा है कि उनकी पार्टी मोदी सरकार के इस विधेयक का समर्थन करेगी यदि लोकसभा सीटों में 50% की वृद्धि सभी राज्यों में हो।
बीजेपी के साथ गठबंधन होने की अटकलों के बीच एनसीपी (एसपी) नेता सुप्रिया सुले ने कहा है कि उनकी पार्टी मोदी सरकार के परिसीमन बिल का कुछ शर्तों के साथ समर्थन करेगी। पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यदि मोदी सरकार लोकसभा की सीटों में सभी राज्यों के लिए 50 प्रतिशत की समान वृद्धि का प्रावधान करती है तो उनकी पार्टी इस विधेयक का समर्थन करेगी। उन्होंने साफ़ किया है कि यह पार्टी का नया रुख नहीं है, बल्कि पहले से चली आ रही आधिकारिक नीति है।
हालाँकि, अब सुप्रिया सुले ने कहा है कि संसद में जब पहली बार इस विषय पर चर्चा हुई थी, तब तृणमूल कांग्रेस, डीएमके सहित कई विपक्षी दलों ने भी इसी तरह की मांग उठाई थी। लेकिन स्थिति यह है कि अप्रैल 2026 में लोकसभा में परिसीमन संबंधी विधेयकों पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने साफ़ तौर पर कहा था कि सरकार सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों में 50% की समान वृद्धि का प्रावधान कर रही है। उन्होंने इसे महिला आरक्षण को लागू करने और किसी राज्य, खासकर दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम न होने देने के लिए ज़रूरी बताया था।
अमित शाह ने विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि यह वृद्धि सभी राज्यों के लिए समान होगी, ताकि 33% महिला आरक्षण लागू करने पर मौजूदा सीटों का अनुपात नहीं बिगड़े। उन्होंने यहाँ तक कहा था कि अगर विपक्ष चाहे तो वे एक घंटे में बिल में 50% वृद्धि का लिखित संशोधन ला सकते हैं। लेकिन उनके इस आश्वासन के बावजूद विपक्ष नहीं झुका था और इसके लिए तैयार नहीं हुआ था।
सुले ने अब क्या कहा?
सुप्रिया सुले ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ''कागज पर 50 प्रतिशत शर्त दें, फिर हम चर्चा करेंगे।' सुले ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने विधेयक पर चर्चा के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में भाग लिया, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए। उन्होंने दावा किया कि सरकार के पास विधेयक में 50% की सीमा को शामिल करने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा, 'बिल अभी भी हमारे पास नहीं है। जब तक यह हमारे पास नहीं है, मैं बिल पर कुछ नहीं बोल सकती।' उन्होंने कहा,जब बिल आएगा तो हम अध्ययन करेंगे और अपनी राय देंगे। महिला आरक्षण बिल सर्वसम्मति से पारित हुआ था। किरेन रिजिजू ने मुझे, अरविंद सावंत और असदुद्दीन ओवैसी को बुलाया था। अमित शाह भी वहां मौजूद थे। उन्होंने हमें बताया कि उन्होंने सपा, कांग्रेस और डीएमके से भी बात की है। उनके मन में एक प्रस्ताव है। सुप्रिया सुले
एनसीपी एसपी नेता
परिसीमन पर विवाद क्यों?
परिसीमन का मतलब है जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों का पुनर्निर्धारण। इसका मक़सद सभी क्षेत्रों को जनसंख्या के अनुपात में समान प्रतिनिधित्व देना होता है। हालाँकि दक्षिण भारत और कुछ अन्य राज्यों की चिंता है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, इसलिए नई परिसीमन व्यवस्था से उनकी लोकसभा सीटों का अनुपात कम हो सकता है, जबकि अधिक जनसंख्या वाले राज्यों की सीटें बढ़ सकती हैं।
बीजेपी से गठबंधन पर सुले ने क्या कहा?
बहरहाल, पिछले कुछ दिनों से ऐसी ख़बरें सामने आ रही हैं कि एनसीपी (एसपी) के कुछ विधायक बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ जाने के पक्ष में हैं। इसकी वजह हाल के दिनों में पार्टी नेताओं की बीजेपी नेताओं और महाराष्ट्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों से हुई मुलाकातों को माना जा रहा है। इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रिया सुले ने कहा, 'जब मैं लखनऊ में संसदीय समिति की बैठक में गई थी, तब मैंने खुले तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। अगर हमें बीजेपी से गठबंधन करना होता तो हम इसे छिपाकर नहीं करते।' सुले ने कहा कि केवल किसी नेता से मिलने भर से राजनीतिक गठबंधन की अटकलें लगाना उचित नहीं है।जयंत पाटिल, फडणवीस की मुलाकात
सुप्रिया सुले का यह बयान तब आया है जब एनसीपी (एसपी) के महाराष्ट्र अध्यक्ष जयंत पाटिल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से देर रात मुलाकात की। इससे पहले वे शरद पवार से भी मिले थे। उधर, एनसीपी (अजित पवार गुट) के नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल ने भी उसी रात मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इन बैठकों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई।
हालाँकि जयंत पाटिल ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी मुलाकात केवल इस्लामपुर नगर परिषद से जुड़े एक प्रशासनिक मुद्दे पर थी और इसका किसी राजनीतिक गठबंधन से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा, 'मैं शरद पवार के साथ हूं। मीडिया में मेरे पार्टी छोड़ने की ख़बरें देखकर दुख होता है।'
पार्टी के भीतर क्या चल रही है चर्चा?
मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से ऐसी चर्चा है कि एनसीपी (एसपी) के कुछ विधायक मानते हैं कि विपक्ष में रहने के कारण उनके क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए पर्याप्त सरकारी सहयोग नहीं मिल पा रहा है। इसलिए पार्टी के भीतर एनडीए के साथ जाने को लेकर चर्चा हो रही है। बताया जा रहा है कि पार्टी के लगभग आधे विधायक इस विकल्प पर विचार कर रहे हैं। हालाँकि पार्टी नेतृत्व ने इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।शिवसेना यूबीटी में टूट के बाद बढ़ी हलचल
हाल ही में उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी के छह लोकसभा सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए थे। उन्होंने सरकार के साथ रहने पर क्षेत्र में विकास कार्यों में आसानी होने की बात कही थी। इसी घटनाक्रम के बाद एनसीपी (एसपी) के भीतर भी राजनीतिक रणनीति पर नए सिरे से चर्चा शुरू होने की खबरें सामने आई हैं।
पी. चिदंबरम ने जताई चिंता
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने भी परिसीमन के मुद्दे पर बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए एनसीपी (एसपी) और डीएमके का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने दोनों दलों से अपील की कि वे इस विधेयक का समर्थन न करें क्योंकि इससे परिसीमन के ज़रिए कुछ राज्यों के साथ अन्याय हो सकता है। चिदंबरम का कहना है कि जो राज्य जनसंख्या नियंत्रण नीति का सफलतापूर्वक पालन कर चुके हैं, उन्हें वर्तमान परिसीमन व्यवस्था के तहत नुकसान उठाना पड़ सकता है।सरकार के लिए क्यों अहम है समर्थन?
केंद्र सरकार संसद के आगामी मानसून सत्र में परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में है। लेकिन संविधान संशोधन पारित कराने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की ज़रूरत होती है। हाल के राजनीतिक बदलावों के बाद भी एनडीए के पास अभी जरूरी संख्या पूरी नहीं मानी जा रही है। ऐसे में क्षेत्रीय दलों का समर्थन सरकार के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
फ़िलहाल एनसीपी (एसपी) ने साफ कर दिया है कि वह बिना शर्त परिसीमन विधेयक का समर्थन नहीं करेगी। पार्टी का कहना है कि यदि सभी राज्यों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित किया जाता है और लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत वृद्धि की जाती है, तभी वह विधेयक के पक्ष में मतदान करेगी। उधर, बीजेपी के साथ संभावित गठबंधन की चर्चाओं को पार्टी नेतृत्व लगातार खारिज कर रहा है, लेकिन महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के कारण हलचल बनी हुई है।