शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस के साथ गठबंधन का बचाव किया, लेकिन इसमें विलय की अटकलों को खारिज कर दिया। इधर, एकनाथ शिंदे ने उद्धव पर कांग्रेस की गोद में बैठने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह सिर्फ ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है।
शिवसेना यूबीटी में छह सांसदों की बगावत के बीच उद्धव ठाकरे ने पार्टी प्रमुख पद छोड़ने की पेशकश कर दी है। उन्होंने कहा कि अगर कार्यकर्ताओं को उन पर भरोसा नहीं है तो वह पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वह किसी भी कार्यकर्ता को पार्टी का नेतृत्व सौंप सकते हैं, लेकिन वह पार्टी की विचारधारा की लड़ाई नहीं छोड़ेंगे।
शिवसेना स्थापना दिवस पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा, 'मैं हार नहीं मानूंगा। लेकिन जिस दिन आपको लगे कि मैं इस पद के लिए सही नहीं हूं, उस दिन मैं चला जाऊंगा। मैं किसी भी व्यक्ति को पार्टी अध्यक्ष बना सकता हूं।' उद्धव ने कहा कि कुछ लोग सोच रहे होंगे कि पार्टी हिम्मत हार जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं होगा। उन्होंने बाल ठाकरे का हवाला देते हुए कहा कि बालासाहेब ने पहले भी संगठन से गद्दारी करने वालों से निपटने का निर्देश दिया था।
बगावत के लिए वोटरों से माफी मांगी
पार्टी में बगावत को लेकर उद्धव ठाकरे ने मतदाताओं से माफी मांगी और कहा, 'आज मैं मतदाताओं से माफी मांगता हूं। उन्होंने हमें वोट दिया, लेकिन हमारे सांसद चले गए।' उन्होंने बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए कहा कि शिवसेना ने बहुत से नेताओं को बनाया है। जिन बागियों ने उन पर आसानी से उपलब्ध न होने का आरोप लगाया है उनको संबोधित करते हुए ठाकरे ने कहा कि शिवसेना ने ही कई नेताओं को आज इस मुकाम तक पहुँचाया है। उन्होंने ऐसे आरोपों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर वे उपलब्ध नहीं थे, तो ये नेता चुनाव कैसे जीत पाए।
कांग्रेस गठबंधन पर सफाई
उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस के साथ गठबंधन का बचाव किया, लेकिन किसी भी तरह के विलय की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा,30 साल तक हम बीजेपी के साथ थे, फिर भी विलय नहीं हुआ। तो कांग्रेस के साथ विलय कैसे होगा? भले ही कांग्रेस के साथ पहले राजनीतिक मतभेद रहे हों, लेकिन पार्टी ने कभी मातोश्री का अपमान नहीं किया। बीजेपी के हिंदुत्व से कांग्रेस बेहतर है। उद्धव ठाकरे
शिवसेना यूबीटी प्रमुख
6 सांसदों ने की है बगावत
उद्धव ठाकरे का यह बयान तब आया है जब इस हफ्ते शिवसेना यूबीटी को बगावत के रूप में बड़ा झटका लगा। पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 ने नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी। ये सांसद गुरुवार को उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई संसदीय दल की बैठक में भी नहीं पहुंचे। ये सांसद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की तैयारी में बताए जा रहे हैं। बागी सांसदों का आरोप है कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना बाल ठाकरे की विचारधारा से दूर हो रही है और कांग्रेस के करीब आ रही है। उद्धव गुट ने इन आरोपों को खारिज किया है और बागी सांसदों को नोटिस जारी कर कार्रवाई शुरू कर दी है।अभी ट्रेलर, पूरी फिल्म बाकी: शिंदे
इधर, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा, 'जिन लोगों ने बालासाहेब की निंदा की थी, आज आप उन्हीं की पूजा कर रहे हैं। एनसीपी और कांग्रेस ने शिवसेना तोड़ी थी, अब आप उनकी गोद में बैठे हो।'
शिंदे ने आगे कहा, 'यह सिर्फ ट्रेलर है, पूरी फिल्म अभी बाकी है। आगे क्या होता है, इंतजार कीजिए।' शिंदे ने दावा किया कि असली शिवसेना उनकी है, जो बाल ठाकरे के सपनों को पूरा कर रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की और कहा कि महायुति गठबंधन मजबूती से एकजुट है।
2022 के बाद बड़ा संकट
यह 2022 के बाद उद्धव ठाकरे गुट का सबसे बड़ा संकट है, जब एकनाथ शिंदे अलग होकर बीजेपी के साथ सरकार बना चुके हैं। अब 6 सांसदों के बागी होने से उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बागी सांसद लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर अलग गुट के रूप में मान्यता मांग रहे हैं।
शिवसेना यूबीटी में यह आंतरिक कलह पार्टी को और कमजोर कर रही है। दोनों गुट एक-दूसरे पर बाल ठाकरे की विचारधारा से दूर जाने का आरोप लगा रहे हैं। उद्धव ठाकरे ने पद छोड़ने की पेशकश कर दी है, लेकिन उन्होंने कहा है कि लड़ाई जारी रहेगी। एकनाथ शिंदे का कहना है कि आगे और बड़े राजनीतिक घटनाक्रम हो सकते हैं।