विश्व हिंदू परिषद यानी वीएचपी ने महाराष्ट्र में इस बार नवरात्रि के आयोजनों में मुसलमानों के शामिल होने पर रोक लगाने की घोषणा की है। इसने नवरात्रि के तहत गरबा और डांडिया आयोजनों को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। वीएचपी ने कहा है कि पूरे राज्य में गरबा, डांडिया जैसे नवरात्रि के आयोजनों में मुसलमानों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा कार्यक्रमों में आने वाले लोगों के आधार कार्ड की जाँच की जाएगी और उनके माथे पर तिलक लगाना अनिवार्य होगा। वीएचपी का यह फ़ैसला तब आया है जब हाल ही में न्यूयॉर्क में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने सभी धर्मों के सम्मान और सामाजिक समरसता पर जोर दिया था।

वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और संयुक्त महासचिव श्रीराज नायर ने कहा है कि संगठन ने निर्णय लिया है कि नवरात्रि के दौरान आयोजित गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी की अनुमति नहीं होगी। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, 'नवरात्रि केवल नृत्य और मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं है। यह मां दुर्गा की पूजा का पर्व है। जो लोग मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखते उन्हें इस धार्मिक आयोजन में भाग लेने की ज़रूरत नहीं है।' हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस फ़ैसले का उद्देश्य किसी समुदाय के ख़िलाफ़ अभियान चलाना नहीं है।

आधार कार्ड की होगी जांच

वीएचपी की ओर से आयोजकों के लिए जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि कार्यक्रम में आने वाले लोगों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए आधार कार्ड की जांच की जाए। इसके अलावा, आयोजन स्थल पर प्रवेश से पहले लोगों के माथे पर तिलक लगाया जाएगा। संगठन का कहना है कि यह व्यवस्था धार्मिक परंपराओं के पालन और आयोजन की सुरक्षा के लिए की जा रही है।

श्रीराज नायर ने कहा कि संगठन अपने मूल मुद्दों और हिंदू धार्मिक परंपराओं से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि हिंदू त्योहार देश की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं और उनकी मूल भावना को बनाए रखना ज़रूरी है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि ये प्रतिबंध 'एहतियाती कदम' हैं और इन्हें किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं देखा जाना चाहिए।

वीएचपी का यह फ़ैसला तब आया है जब कुछ दिन पहले ही आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि यदि कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमानों के लिए जगह नहीं होनी चाहिए तो वह हिंदू नहीं रह सकता है।

भागवत बोले थे- विविधता समाज की सुंदरता है

आरएसएस प्रमुख ने न्यूयॉर्क में कहा था कि अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और धर्म समाज की सुंदरता हैं। भागवत ने कहा था, 'विविधता प्रकृति का नियम है, लेकिन उसके पीछे एकता का सत्य छिपा है। जैसे मैं अपनी पहचान की रक्षा करता हूं, वैसे ही मुझे दूसरे की पहचान की भी रक्षा करनी चाहिए।' उनके अनुसार समाज में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन उनका समाधान संवाद और परस्पर सम्मान से ही निकल सकता है।

भागवत ने अपने संबोधन में कहा था कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर जाते हैं और हर इंसान की गरिमा समान है। जब वीएचपी प्रवक्ता से भागवत के इस बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने केवल इतना कहा कि वीएचपी भी सामाजिक समरसता और शांति में विश्वास रखती है।

मुस्लिमों के लिए क्या कहा?

वीएचपी प्रवक्ता ने कहा कि यदि मुस्लिम समुदाय के लोग नवरात्रि उत्सव मनाना चाहते हैं तो वे अपने परिवार के साथ अपने क्षेत्रों या अपने धार्मिक और सामाजिक स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि संगठन अपने धार्मिक आयोजनों के नियमों में बदलाव नहीं करेगा।

वीएचपी की इस घोषणा के बाद राज्य में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज होने की संभावना है। समर्थकों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों के नियम तय करने का अधिकार आयोजकों को है, जबकि आलोचक इसे धार्मिक आधार पर भेदभाव वाला फ़ैसला बता रहे हैं।

फिलहाल यह साफ़ नहीं है कि वीएचपी अपना यह दिशा-निर्देश केवल वीएचपी द्वारा आयोजित या समर्थित कार्यक्रमों पर लागू करेगा या सभी निजी गरबा-डांडिया आयोजनों पर थोपेगा।