ईरान युद्ध की कवरेज पर भारतीय टीवी न्यूज़ चैनलों ने क्या सारी हदें पार कर दीं? आख़िर सरकार को टीआरपी पर प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला क्यों लेना पड़ा? मीडिया की भूमिका पर नई बहस छिड़ गई है।
अमेरिका-इसराइल ईरान युद्ध पर भारत के टीवी न्यूज़ चैनलों ने टीआरपी बढ़ाने के लिए ऐसी सनसनी फैलाई है कि सरकार ने 4 हफ़्ते के लिए टीआरपी पर रोक लगा दी है। तो सवाल है कि टीवी न्यूज़ चैनलों ने समाचार को चटपटा बनाकर पेश करने के चक्कर में क्या मीडिया इथिक्स यानी समाचार प्रसारण की नैतिकता को पूरी तरह तिलांजलि दे दी? कम से कम सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने शुक्रवार को जो आदेश जारी किया है उसका मतलब तो यही है।
सरकार ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल यानी बीएआरसी को आदेश दिया है कि वो टीवी न्यूज़ चैनलों की टीआरपी यानी टेलीविजन रेटिंग पॉइंट्स की रिपोर्टिंग तुरंत रोक दे। ये रोक 4 हफ्ते के लिए है या जब तक आगे कोई नया आदेश न आए, तब तक।
टीवी चैनलों की रिपोर्टिंग पर क्या आपत्ति
सरकार ने ये फ़ैसला इसलिए लिया क्योंकि सरकार को लगता है कि इसराइल-ईरान के बीच चल रहे युद्ध की कवरेज में कुछ न्यूज़ चैनल बहुत ज़्यादा सनसनी फैला रहे हैं और अटकलें लगाने वाली ख़बरें चला रहे हैं। इससे आम लोगों में डर और घबराहट फैल सकती है, खासकर उन लोगों में जिनके रिश्तेदार या दोस्त प्रभावित इलाक़ों में हैं।
आधिकारिक आदेश में क्या?
मंत्रालय ने शुक्रवार यानी 6 मार्च को जारी अपने आदेश में लिखा है-
- 2014 के 'पॉलिसी गाइडलाइंस फॉर टेलीविजन रेटिंग एजेंसियां' के तहत बीएआरसी (BARC) रजिस्टर्ड है।
- इसराइल-ईरान संघर्ष के बीच कुछ न्यूज़ चैनल अनावश्यक सनसनीखेज ख़बरें और अटकलें दिखा रहे हैं।
- इससे जनता में घबराहट फैलने का ख़तरा है, खासकर उन इलाक़ों में रहने वालों या वहां के लोगों के परिवार वालों में।
- 2014 की गाइडलाइंस की क्लॉज 24.2 कहती है कि BARC को मंत्रालय के हर आदेश का पालन करना होगा।
- इसलिए सार्वजनिक हित में BARC को न्यूज चैनलों की TRP रिपोर्टिंग रोकने का निर्देश दिया जाता है।
क्यों उठाया गया ये क़दम?
पिछले कुछ दिनों में इसराइल-ईरान के बीच तनाव बहुत बढ़ गया है। मिसाइल हमले, जवाबी कार्रवाई हो रही है। कई रिपोर्टों में कहा गया-
- भारतीय टीवी न्यूज़ चैनलों पर पुरानी फुटेज दोबारा दिखाई जा रही है।
- ग़लत लेबल वाली वीडियो चलाई जा रही हैं।
- ड्रामेटिक सायरन और बैकग्राउंड म्यूजिक के साथ खबरें दिखाई जा रही हैं।
- फेक न्यूज़ और ज़्यादा डरावनी अटकलें फैलाई जा रही हैं।
- बुर्ज खलीफा पर हमला दिखाने वाले फर्जी क्लिप। ये असल में पुराने या AI-मॉडिफाइड थे।
- तेहरान में बड़े प्रदर्शन या इसराइली F-35 विमान गिराए जाने के AI वीडियो।
- ईरानी मिसाइलों से अमेरिकी जहाज USS अब्राहम लिंकन को तबाह करने के दावे, जो बिना सबूत के थे।
- ये फुटेज रिसाइकल्ड पुराने ग़ज़ा या यूक्रेन युद्ध या कंप्यूटर गेम से लिए गए थे।
- युद्ध को 'ईरान बनाम अमेरिका-इसराइल' के बजाय धार्मिक, सांप्रदायिक रंग दिया गया। जैसे शिया-सुन्नी, मुस्लिम दुनिया बनाम पश्चिम।
सरकार का मानना है कि इससे लोग डर सकते हैं, भले ही भारत सीधे प्रभावित न हो। खासकर उन परिवारों में जहां कोई विदेश में है।
TRP क्या होती है?
टीआरपी मतलब टीवी पर चैनल कितना देखा जा रहा है, इसका स्कोर। BARC हर हफ्ते ये रैंकिंग जारी करता है। ज्यादा टीआरपी मतलब ज्यादा विज्ञापन, ज्यादा कमाई। अब 4 हफ्ते तक न्यूज चैनलों की टीआरपी नहीं आएगी तो चैनलों को पता नहीं चलेगा कि कौन सा चैनल आगे है। विज्ञापनदाता फैसला नहीं ले पाएंगे। चैनल सनसनी फैलाकर टीआरपी बढ़ाने की कोशिश नहीं कर पाएंगे। ये कदम चैनलों को जिम्मेदार खबरें दिखाने के लिए मजबूर कर सकता है।
पहले भी ऐसा हुआ है?
2020 में टीआरपी घोटाले के आरोपों के बाद BARC ने न्यूज चैनलों की रेटिंग कुछ हफ्तों के लिए रोकी थी। लेकिन वो अलग वजह से था। अब ये युद्ध कवरेज की वजह से है।बहरहाल, कई मीडिया एक्सपर्ट और सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि ये अच्छा कदम है क्योंकि न्यूज चैनल कभी-कभी ज्यादा ड्रामा करते हैं। लेकिन कुछ लोग कह रहे हैं कि सरकार प्रेस की आजादी पर रोक लगा रही है।
अभी देखना है कि 4 हफ्ते बाद क्या होता है। अगर चैनल जिम्मेदार बने तो रोक हट सकती है, वरना बढ़ भी सकती है। ये फैसला दिखाता है कि सरकार युद्ध जैसी संवेदनशील खबरों में सनसनी रोकना चाहती है।