भारत के प्रसिद्ध फोटो पत्रकार रघु राय का 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। पढ़िए उनके योगदान, करियर और विरासत कैसी रही।
प्रसिद्ध फोटो पत्रकार रघु राय का 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने रविवार सुबह एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। रघु राय लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। पीटीआई के अनुसार उनके बेटे नितिन राय ने बताया कि उनके पिता दो साल पहले प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित थे। इलाज से वह ठीक हो गए थे। बाद में कैंसर पेट में फैला, उसका भी इलाज हुआ और ठीक हो गए। हाल ही में कैंसर दिमाग तक पहुंच गया था। उम्र से जुड़ी अन्य परेशानियां भी थीं।
परिवार ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करके यह दुखद खबर दी। परिवार ने बताया कि रघु राय का अंतिम संस्कार रविवार को दोपहर 4 बजे नई दिल्ली के लोधी क्रेमेशन ग्राउंड में किया जाएगा।
रघु राय कौन थे?
रघु राय भारत के सबसे मशहूर फोटो पत्रकारों में से एक थे। उनकी कैमरे की आंख ने भारत को उसके हर रंग में कैद किया। उन्होंने गरीबी, युद्ध, त्योहार, राजनीति, संस्कृति और आम लोगों की जिंदगी को बेहद खूबसूरती और सच्चाई के साथ फोटो में उतारा।
उनका सफर
रघु राय का जन्म 18 दिसंबर 1942 को हुआ था। उन्होंने 23 साल की उम्र में यानी 1965 में फोटोग्राफी शुरू की। एक साल बाद 1966 में वे द स्टेट्समैन अखबार के चीफ फोटोग्राफर बन गए और लगभग 10 साल तक वहां काम किया।1971 में उनकी फोटो प्रदर्शनी पेरिस में लगी, जिसे देखकर दुनिया के महान फोटोग्राफर हेनरी कार्तियर-ब्रेसन बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने रघु राय को दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित फोटोग्राफर्स संस्था मैग्नम फोटोज में नामांकित किया। रघु राय 1977 में इसमें शामिल हुए। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध, बांग्लादेशी शरणार्थियों की दर्द भरी कहानी और पाकिस्तान के सरेंडर की फोटोज के लिए उन्हें पद्म श्री पुरस्कार मिला। यह भारत का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है।
सात दशकों के दौरान 1972 के पद्म श्री विजेता ने देश के इतिहास के कई पहलुओं को अपने काम में समेटा, जिसमें 1984 में 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' से ठीक पहले अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीरें भी शामिल हैं। उनकी कुछ सबसे यादगार तस्वीरें भोपाल गैस त्रासदी की जगह और 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान शरणार्थियों की थीं। आपातकाल के दौरान एक फोटो जर्नलिस्ट के तौर पर काम करते हुए, उन्होंने सेंसरशिप से बचकर काम करने के तरीके ढूंढ निकाले।
1992 में उन्हें अमेरिका में "फोटोग्राफर ऑफ द ईयर" का पुरस्कार मिला। यह पुरस्कार नेशनल ज्योग्राफिक में प्रकाशित उनकी कहानी 'Human Management of Wildlife in India' के लिए दिया गया। 2009 में फ्रांस सरकार ने उन्हें Officier des Arts et des Lettres सम्मान से नवाजा। उनकी फोटोज टाइम, लाइफ, जियो, न्यूयॉर्क टाइम्स, न्यूजवीक, वोग आदि जैसे दुनिया की बड़ी-बड़ी मैगजीन और अखबारों में छपीं।
रघु राय अपनी पत्नी गुरमीत, बेटे नितिन और बेटियों लगन, अवनी और पुरवाई के पीछे अपनी यादें छोड़ गए हैं। रघु राय की फोटोज सिर्फ तस्वीरें नहीं थीं, वे भारत की आत्मा को दिखाती थीं। उनके निधन से फोटो पत्रकारिता की दुनिया में एक बड़ा खालीपन आ गया है।