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कोरोना को एक संतुलित दृष्टिकोण से देखने की ज़रूरत

क्या कोरोना वायरस के ख़तरे को बहुत बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया है? यह बताया जाता है कि कोरोना के कारण 3,163 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, तो यह क्यों नहीं बताया जाता कि टी.बी, फ्लू, मलेरिया, डेंगू, मधुमेह, दिल का दौरा और अन्य कई चिकित्सा समस्याओं से इस काल के दौरान कितने भारतीयों की मृत्यु हुई?
जस्टिस मार्कंडेय काटजू

कुछ समय पहले, 12 फ़रवरी को, मैंने एक लेख लिखा था 'कोरोना वायरस के ख़तरे को बहुत बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया है' जिसे ‘nayadaur.tv’ में प्रकाशित किया गया था।

19 मई को, इंटरनेट पर यह बताया जा रहा है कि पिछले 24 घंटों में भारत में 4970 लोग कोविड-19 पॉजिटिव पाए गये हैं और इसी बीच 134 मौतें हुई हैं। यह भी बताया गया है कि अब तक कुल 1,01,139 भारतीय कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं, जिनमें 3163 भारतीयों की मौत हो गई है।

इसके विपरीत, अमेरिका को, जिसकी आबादी भारत की एक चौथाई है, कोरोना संक्रमित मामलों की सबसे बड़ी संख्या की समस्या से जूझना पड़ रहा है। अब तक अमेरिका में 1.55 मिलियन लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, जिनमें से 91,000 लोगों की मौत हो चुकी है।

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इस संबंध में, मैं निम्नलिखित बात प्रस्तुत करना चाहता हूँ:

(1) जब यह कहा जाता है कि भारत में अब तक कोरोना के कारण  3,163 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, तो यह क्यों नहीं बताया जाता कि टी.बी., फ्लू, मलेरिया, डेंगू, मधुमेह, दिल का दौरा और अन्य कई चिकित्सा समस्याओं से इस काल के दौरान कितने भारतीयों की मृत्यु हुई?

एक तुलनात्मक चार्ट क्यों तैयार नहीं किया जाता? और इसके बजाय केवल कोरोना पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है! यदि यह पाया जाता है कि अन्य बीमारियाँ कहीं अधिक मौतों का कारण बनती हैं, तो क्या कोरोना का ख़तरा 'अतिरंजित' नहीं है?

इसमें कोई संदेह नहीं है कि कोरोना चिंता का विषय है, लेकिन क्या यह ख़तरा इतना बड़ा है कि 135 करोड़ आबादी वाले देश में देशव्यापी तालाबंदी को सही ठहराया जाए? भारत में लोग विभिन्न बीमारियों से मर रहे हैं। क्या कोरोना अकेली ऐसी समस्या है जिसकी वजह से देशव्यापी बंद का आदेश देना पड़े?

(2) क्या कोई गणना की गई है कि कितने लोग (मज़दूर, प्रवासी आदि) भूख से मरेंगे क्योंकि इस तालाबंदी ने उन्हें उनकी आजीविका से वंचित कर दिया है? यदि यह कोरोना के कारण होने वाली मौतों से अधिक है, तो क्या लॉकडाउन उचित है?

(3) कोरोना से संक्रमित होने वाले कितने प्रतिशत लोग इससे मर जाते हैं, और कितने ठीक हो जाते हैं? यदि केवल 2% संक्रमित ही हैं जो इससे मर जाते हैं और बाक़ी ठीक हो जाते हैं, जैसा कि एक रिपोर्ट में कहा गया है, क्या लॉकडाउन उचित है?

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(4) चूँकि भारत की 135 करोड़ आबादी में केवल 3,163 मौतें हुई हैं, जबकि अमेरिका में हमारी जनसंख्या की एक चौथाई आबादी के साथ 91,000 मौतें हुई हैं, क्या इससे यह संकेत नहीं मिलता कि भारतीयों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक है? तो भले ही अमेरिका में तालाबंदी जायज़ हो, लेकिन क्या यह भारत में उचित है?

मुझे लगता है कि इन कठिन सवालों के जवाबों का समय आ गया है, जो दुर्भाग्य से अब तक पूछे ही नहीं गए हैं।

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