loader

कश्मीरी पंडितों के पलायन के लिए जगमोहन के विरुद्ध फारुक की जाँच की माँग क्यों?

यदि कश्मीरी पंडितों के पलायन के लिए आज डाॅ. फारुक जगमोहन के विरुद्ध जाँच बिठाने की माँग कर रहे हैं तो उस जाँच की अग्नि-परीक्षा में सबसे पहले ख़ुद डाॅ. फारुक को खरा उतरना होगा। पंडितों के उस पलायन के लिए जो भी ज़िम्मेदार हो, आज ज़रूरी यह है कि कश्मीर के सारे नेता फिर से मैदान में आएँ और ऐसे हालात पैदा करें कि आतंकवाद वहाँ से ख़त्म हो और पंडितों की वापसी हो।
डॉ. वेद प्रताप वैदिक

कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और सुप्रसिद्ध नेता डाॅ. फारुक अब्दुल्ला ने एक वेबिनार में ग़ज़ब की बात कह दी है। उन्होंने कश्मीर के पंडितों की वापसी का स्वागत किया है। कश्मीर से तीस साल पहले लगभग 6-7 लाख पंडित लोग भागकर देश के कई प्रांतों में रहने लगे थे। अब तो कश्मीर के बाहर इनकी दूसरी और तीसरी पीढ़ी तैयार हो गई है। अब कश्मीर में जो कुछ हज़ार पंडित बचे हुए हैं, वे वहाँ मजबूरी में रह रहे हैं। 

ताज़ा ख़बरें

केंद्र की कई सरकारों ने पंडितों की वापसी की घोषणाएँ कीं, उन्हें आर्थिक सहायता देने की बात कही और उन्हें सुरक्षा का आश्वासन भी दिया लेकिन आज तक 100-200 परिवार भी वापस कश्मीर जाने के लिए तैयार नहीं हुए। कुछ प्रवासी पंडित संगठनों ने माँग की है कि यदि उन्हें सारे कश्मीर में अपनी अलग बस्तियाँ बसाने की सुविधा दी जाए तो वे वापस लौट सकते हैं लेकिन कश्मीरी नेताओं का मानना है कि हिंदू पंडितों के लिए यदि अलग बस्तियाँ बनाई गईं तो सांप्रदायिक ज़हर तेज़ी से फैलेगा। अब डाॅ. अबदुल्ला जैसे परिपक्व नेताओं से ही उम्मीद की जाती है कि वे कश्मीरी पंडितों की वापसी का कोई व्यावहारिक तरीक़ा पेश करें।

कश्मीरी पंडितों का पलायन तो उसी समय (1990) शुरू हुआ था, जबकि डाॅ. फारुक अब्दुल्ला मुख्यमंत्री थे। जगमोहन नए-नए राज्यपाल बने थे। उन्हीं दिनों बीजेपी नेता टीकालाल तपलू, हाइकोर्ट के जज नीलकंठ गंजू और पं. प्रेमनाथ भट्ट की हत्याएँ हुई थीं। कई मंदिरों और गुरुद्वारों पर हमले हो रहे थे। मसजिदों से एलान होते थे कि काफिरों कश्मीर खाली करो। पंडितों के घरों और स्त्रियों की सुरक्षा लगभग शून्य हो गई थी। ऐसे में राज्यपाल जगमोहन क्या करते? उन्होंने जान बचाकर भागनेवाले कश्मीरी पंडितों की मदद की। उनकी सुरक्षा और यात्रा की व्यवस्था की। जगमोहन और फारुक के बीच ठन गई। 

विचार से ख़ास

यदि पंडितों के पलायन के लिए आज डाॅ. फारुक जगमोहन के विरुद्ध जाँच बिठाने की माँग कर रहे हैं तो उस जाँच की अग्नि-परीक्षा में सबसे पहले ख़ुद डाॅ. फारुक को खरा उतरना होगा। बेहतर तो यह होगा कि ‘बीती ताहि बिसार दे, आगे की सुध लेय’! पंडितों के उस पलायन के लिए जो भी ज़िम्मेदार हो, आज ज़रूरी यह है कि कश्मीर के सारे नेता फिर से मैदान में आएँ और ऐसे हालात पैदा करें कि आतंकवाद वहाँ से ख़त्म हो और पंडितों की वापसी हो।

(डॉ. वेद प्रताप वैदिक के ब्लॉग www.drvaidik.in से साभार)

'सत्य हिन्दी'
की ताक़त बनिए

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
डॉ. वेद प्रताप वैदिक
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

विचार से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें