देश में नफ़रत फैलाने के मामले लगातार आते रहे हैं और क्रिसमस डे भी इसका अपवाद नहीं रहा। जानिए, क्रिसमस पर कुछ दक्षिणपंथियों ने क्या किया।
इसी से जुड़ा ये नैरेटिव भी बड़े पैमाने पर चलाया गया है कि हम धीरे-धीरे अपनी संस्कृति भूलते जा रहे हैं। यह उन लोगों को भी ऐसे अभियानों से अनायास ही जोड़ देता है जो आसाराम बापू या नफ़रत की राजनीति से दूर ही रहना चाहते हैं।