एनसीपी टूट गई है तो अब कांग्रेस को उसके साथ किस तरह का रिश्ता रखना चाहिए? जिस एनसीपी ने कांग्रेस को महाराष्ट्र में ख़त्म करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, क्या उसको अब भी साथ रहना चाहिए?
अब एनसीपी टूट गयी तब भी वो विपक्ष के नेता का पद चाहती है। इतना ही नहीं, उसने कांग्रेस से अभी रुकने कहा है। कांग्रेस ये बात क्यों मान रही है?