देश को बताया गया कि अब लोकपाल की ज़रूरत नहीं है क्योंकि लोकपाल का बाप यानी चौकीदार आ चुका है। ‘भूतो ना भविष्यवति’ वाला पद है, चौकीदार। चौकीदारी एकदम बिंदास चली ‘मैं ही मैं हूँ, दूजा कोई नहीं’ वाले अंदाज़ में। लेकिन अचानक जब चोर-चोर का शोर उठा तो मालूम हुआ कि चौकीदारी जन-धन योजना में बदल दी गई है। सब्सिडी के डायरेक्ट ट्रांसफ़र की तरह चौकीदारी ट्रांसफ़र की जा रही है।
ख़बर यह है कि चौकीदारी को ग़रीब जनता में बाँटने के बाद मोदीजी अब लोकपाल लाने की तैयारी कर रहे हैं। तो क्या आनेवाले दिनों में एक और हैशटैग ट्रेंड करेगा- मैं भी लोकपाल।
मईया जिया तेरे कछु भेद उपजिहैंतूने मोहे जानो परायो...
चोर बोलने का इतना पाप चढ़ेगा, इतना पाप चढ़ेगा कि गंगा स्नान करके भी जनेऊधारी पंडित राहुल गाँधी धो नहीं पाएँगे। भलाई इसी में है कि आ जाएँ प्रभु की शरण में, भूल जाएँ राफेल-वाफेल और ठोक दे एक ट्वीट— मैं भी चौकीदार हूँ।