अपने पूरे भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने न सिर्फ़ इक्कीस विपक्षी दलों के सांसदों की प्रतिष्ठापूर्ण समारोह में अनुपस्थिति का एक बार भी ज़िक्र नहीं किया, मोदी जब माहिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों का बखान कर रहे थे बाहर सड़कों पर पुलिस महिला पहलवानों पर टूटी पड़ रही थी और नई संसद के भीतर बैठे आरोपित सांसद अपने नेता के दावों को सुन मेज़ थपथपा रहे थे।
देश को जानकारी है कि 27 अगस्त 2015 को घोषित प्रधानमंत्री की सौ शहरों को ‘स्मार्ट सिटीज़’ में विकसित करने की महत्वाकांक्षी परियोजनाएँ आठ साल के बाद भी आधी-अधूरी हालत में पड़ी अपने ‘उद्धार’ की प्रतीक्षा कर रही हैं। इन परियोजनाओं के भविष्य की अब केवल कल्पना ही की जा सकती है !