विकास बटालियन के जवान।
स्पेशल फ़्रंटियर फ़ोर्स में दस बटालियनें यानी करीब दस हजार सैनिक हैं। इस फ़ोर्स के जवानों को किसी भी घटनास्थल पर आपात स्थिति में तैनात करने के लिए अपना गल्फस्ट्रीम विमान, मालवाही हेलिकॉप्टर, टोही हेलिकॉप्टर और इसराइल से आयातित टोही विमान सर्चर और हेरोन के अलावा भारत में विकसित रुस्तम टोही विमान भी सौंपे गए हैं। इस कमांडो फ़ोर्स के जवानों को दुनिया के आधुनिकतम संहारक अमेरिकी सब मशीनगन एम-1, एम-2 और एम-3 से लैस किया गया है।
दुश्मन सेना पर बंदरों की तरह कूद कर हमला करने में माहिर इस बटालियन के जवान पर्वतीय और जंगल युद्ध के लिए प्रशिक्षित किए जाते हैं और इन्हें ऐसे ही इलाक़ों में तैनात किया जाता है।
इस फ़ोर्स में वे तिब्बती जवान भर्ती किए गए जो तिब्बत में चीन के शासन के ख़िलाफ़ विद्रोह कर रहे थे। इन खम्पा विद्रोहियों को स्पेशल फ़ोर्स में भर्ती करने के लिए भारतीय ख़ुफ़िया ब्यूरो द्वारा तिब्बती विद्रोहियों के नेता चुशी गांगद्रुक से सम्पर्क किया गया था।
स्पेशल फ़्रंटियर फ़ोर्स को कई गोपनीय और खुली सैन्य कार्रवाइयों में तैनात किया जा चुका है। इसमें 1971 का भारत-पाक युद्ध, अमृतसर में स्वर्ण मंदिर में हुआ ऑपरेशन ब्लू स्टार, करगिल युद्ध और प्रतिविद्रोही कार्रवाई शामिल हैं।