चुनाव आयोग के SIR फैसले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंजूरी दिए जाने और वोटर लिस्ट से नाम कटने पर नागरिकता संदिग्ध होने के मामले में राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव ने कड़ी टिप्पणी की है। इस मामले में वह लिटिगेंट थे और कोर्ट में उनको बात रखने का मौक़ा मिला था।
इस याचिका के ताबूत में आख़िरी कील तब ठोकी गई, जब उसी बेंच के सामने एक और याचिका पर सुनवाई चल रही थी; और एक माननीय जज ने टिप्पणी की कि जिन लाखों लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित किया गया है, उन्हें घबराने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि वे अगले चुनाव में वोट दे सकते हैं। उसी पल कोर्ट ने अपनी संवैधानिक ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।