ममता बनर्जी को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। TMC सांसद शर्मिला सरकार ने कहा है कि 'हम 20 सांसद हैं। हमने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में भूपेंद्र यादव के घर पर एक बैठक की। बंगाल के विकास के लिए हमें NDA का समर्थन करना होगा।'
पश्चिम बंगाल विधानसभा में ममता बनर्जी के भाषण के बीच हंगामा
ममता बनर्जी को सोमवार को तब अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा जब टीएमसी के विधायक दल के बाद अब संसदीय दल में भी टूट हो गई है। पार्टी के कुल 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर घोषणा कर दी है कि वे ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी से अलग होकर बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल होना चाहते हैं। यह फ़ैसला सोमवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई बैठक में लिया गया। बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे।
काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में बगावत
बागी सांसदों का नेतृत्व वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं। बगावत में शामिल बर्दवान पूर्व सीट से सांसद शर्मिला सरकार ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। शर्मिला सरकार ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'हमने बैठक की। हम अलग से बैठना चाहते हैं। मैं दीदी का सम्मान करती हूं। मैं काम करना चाहती थी, लेकिन नहीं कर पाई। काकोली दी के नेतृत्व में यह अलग ब्लॉक बना है। इससे बंगाल के विकास में मदद मिलेगी।'
टीएमसी से बागी हुईं शर्मिला ने आगे कहा, 'हम 20 सांसद हैं। हम भूपेंद्र यादव जी के घर पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में मिले थे। बंगाल के विकास के लिए हमें एनडीए का साथ देना चाहिए। काकोली दी ने स्पीकर को पत्र सौंपा है। अभी वे ही हमारे ब्लॉक की नेता हैं।'जिस दिन ममता दिल्ली में उसी दिन टूट
यह पूरा घटनाक्रम उसी दिन हुआ जब टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली आए हुए थे। माना जा रहा है कि विरोधियों का एक मक़सद ममता बनर्जी को यह जताना रहा हो कि जब वह इंडिया गठबंधन के साथ एकजुटता जता रही हों तब उनके अपने ही लोग उनके साथ नहीं होंगे। इन 20 लोकसभा सांसदों के अलावा राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने सोमवार को ही पार्टी और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा दे दिया है। सुखेंदु शेखर रॉय ने इस्तीफा देते हुए कहा है कि लोगों ने 15 साल के टीएमसी शासन को भ्रष्टाचार, महिलाओं पर अत्याचार और विकास की विफलता के कारण खारिज कर दिया है।
20 सांसदों की बगावत अहम क्यों?
टीएमसी के 20 सांसदों का यह विद्रोह इसलिए बेहद अहम है क्योंकि-
- कुल 28 में से 20 सांसद यानी दो-तिहाई से ज्यादा होने के कारण दलबदल विरोधी कानून से बचाव हो जाता है।
- एनडीए को संसद में मजबूत बहुमत मिलने में मदद मिलेगी।
- विपक्ष की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी टीएमसी का संसदीय दल लगभग ख़त्म हो जाएगा।
बीजेपी की नज़र सांसदों पर क्यों?
लोकसभा और राज्यसभा में कुल मिलाकर टीएमसी के 41 सांसद हैं। यदि लोकसभा के ये 20 सांसद भी बीजेपी में चले गए तो ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगेगा। वैसे कहा जा रहा है कि विधायकों की बगावत से बीजेपी को कुछ फायदा नहीं होना वाला है और उसका असली मक़सद सांसदों को तोड़ना ही है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि बीजेपी को लोकसभा में बहुमत नहीं है और वह चाहेगी कि संसद में वह मज़बूत हो।
लोकसभा में दो-तिहाई यानी करीब 20 सांसद टूट जाएँ तो यह बीजेपी के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। बीजेपी के पास फिलहाल 240 सांसद हैं, बहुमत के लिए 272 चाहिए। टीएमसी के 20 सांसद जुड़ने से बीजेपी बहुमत के करीब पहुंच जाएगी और एनडीए सहयोगियों पर निर्भरता कम हो जाएगी। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार पहले ही पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे चुकी हैं और नाराजगी जता रही हैं।राज्यसभा के 245 सदस्यों में बीजेपी के 113 सांसद हैं, बहुमत के लिए 123 चाहिए। आप के 7 सांसदों के दल-बदल से बीजेपी ने अपनी ताकत बढ़ाई है, लेकिन अभी भी बहुमत से दूर है। दोनों सदनों में बीजेपी को बहुमत नहीं होने से मनचाहे विधेयकों को पारित कराने में दिक्कतें आती हैं।
पहले भी हो चुका है विधायकों का विद्रोह
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव हारने के बाद ही टीएमसी में बगावत शुरू हो गई थी। अब पार्टी आधे-आधे में बंट चुकी है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 60 विधायकों के एक गुट ने खुद को 'असली तृणमूल' बताया है। इस गुट ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता घोषित किया और विधानसभा स्पीकर ने भी इसे मंजूरी दे दी है। ये गुट खुलकर ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल चुका है। टीएमसी के बाक़ी सांसदों का क्या होगा?
पार्टी के अंदर अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व और तरीके को लेकर काफी नाराजगी बताई जा रही है। कई नेता कह रहे हैं कि वे बंगाल के विकास के लिए एनडीए का साथ देना चाहते हैं। 20 सांसदों का ख़त लोकसभा स्पीकर को दिए जाने के बाद अब सवाल बाक़ी सांसदों को लेकर उठ रहे हैं। अभी यह साफ नहीं है कि बाकी बचे हुए 8 लोकसभा सांसद और राज्यसभा के 13 सांसद क्या फैसला लेंगे।
टीएमसी में यह टूट पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति पर भी बड़ा असर डालेगी। अब बड़ा सवाल यह है कि ममता बनर्जी इस भारी संकट से पार्टी को कैसे संभालती हैं।