कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने काफी लंबे अरसे बाद शुक्रवार को सार्वजनिक तौर राहुल गांधी की जमकर तारीफ़ की है। इसके साथ ही उन्होंने साफ-साफ कहा कि वे कांग्रेस पार्टी छोड़कर कहीं नहीं जा रहे हैं। उन्होंने पार्टी छोड़ने की चल रही अफवाहों को पूरी तरह नकार दिया। यह बयान उन्होंने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात के ठीक एक दिन बाद शुक्रवार को दिया।

थरूर ने शुक्रवार को पत्रकारों से राहुल गांधी की तारीफ़ में कहा, 'राहुल गांधी एक ऐसे नेता हैं जिनका राजनीतिक रुख बेहद साफ़ है। वे सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ मज़बूती से खड़े हैं।'
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पार्टी के रुख के ख़िलाफ़ नहीं: थरूर

थरूर ने यह भी समझाया कि पार्टी की राय सबसे ऊपर है, लेकिन कभी-कभी वे अपनी निजी राय भी रखते हैं। उन्होंने कहा, 'जहां पार्टी का कोई आधिकारिक रुख होता है, वहां मैं कोई दूसरी बात नहीं करता। लेकिन कुछ मामलों में, खासकर विकास के अच्छे कामों पर, मैं अपनी राय रखता हूं और अच्छी बातों को सामने लाता हूं।'

उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका ध्यान राष्ट्रीय मुद्दों पर है, न कि पार्टी की आंतरिक लड़ाई पर। उन्होंने कहा,
मैं राजनीति की बात नहीं करना चाहता, मैं देश के लिए बोलना चाहता हूं। 2009 से मैं यही कह रहा हूं। पार्टी के आधिकारिक रुख के खिलाफ किसी को बोलने का हक नहीं है।
शशि थरूर
कांग्रेस नेता

'मेरी वफादारी पर संदेह क्यों?'

कांग्रेस में वह रहेंगे या नहीं, पत्रकारों द्वारा यह सवाल पूछे जाने पर भी उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया दी। थरूर ने सवाल उठाया कि उनकी वफादारी पर बार-बार संदेह क्यों किया जाता है। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस में रहने की बात मुझे क्यों दोहरानी पड़ रही है? यह सवाल सिर्फ मुझसे ही क्यों पूछा जा रहा है? मैं कांग्रेस के साथ पूरी तरह मज़बूती से खड़ा हूँ।'

इससे पहले थरूर ने गुरुवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात की तस्वीर को बड़े उत्साह के साथ साझा किया था। उन्होंने कहा था कि कई मुद्दों पर उन्होंने चर्चा की और उन्हें पता चल गया कि वे एक ही जैसे सोचते हैं। उनका यह बयान तब आया है जब हाल में पीएम मोदी व उनकी कुछ नीतियों की तारीफ़ पर थरूर को कांग्रेस में ही विरोध का सामना करना पड़ा था। सवाल तो यहाँ तक उठने लगे थे कि थरूर कब पार्टी से बाहर होंगे या बाहर किए जाएँगे।
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थरूर का यह बयान अहम क्यों?

दरअसल, पिछले कुछ महीनों से थरूर और कांग्रेस के बीच तनाव की ख़बरें आ रही थीं। कई बार थरूर की पार्टी से नाराजगी दिखी। वे महत्वपूर्ण बैठकों में नहीं गए या कुछ फैसलों पर अलग राय रखी। हाल ही में कोच्चि में एक बड़ी महापंचायत हुई थी, जिसका उद्घाटन राहुल गांधी ने किया। राहुल गांधी ने भाषण में मंच पर मौजूद कई नेताओं का नाम लिया, लेकिन थरूर का नाम नहीं लिया। कई रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि इससे थरूर को बुरा लगा और उन्होंने इसे कथित तौर पर अपमान माना। इसके बाद केरल चुनाव को लेकर हुई कांग्रेस की उच्चस्तरीय बैठक में भी थरूर मौजूद नहीं थे। 

पिछले साल भी थरूर का एक बयान विवाद में आया था। पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों और कूटनीति पर उनकी टिप्पणी कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से अलग थी, जिससे पार्टी में कई लोगों ने उनकी आलोचना की। पहलगाम हमले के बाद भारत की काउंटर-टेररिज्म नीति और पाकिस्तान पर दबाव के लिए अमेरिका आदि देशों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले डेलीगेशन का नेतृत्व भी किया था। इस बीच सोशल मीडिया पर लोग कहने लगे कि वे कांग्रेस छोड़ सकते हैं, लेकिन थरूर ने इन्हें खारिज किया।
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केरल चुनाव में होगा फायदा?

इसी बीच, थरूर ने गुरुवार को संसद भवन परिसर में खड़गे और राहुल गांधी से लंबी मुलाकात की। बैठक के बाद थरूर ने कहा था कि सभी मुद्दे सुलझ गए हैं, अब सब कुछ ठीक है और वे पार्टी के साथ मिलकर आगे बढ़ रहे हैं। शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में थरूर ने कहा, 'मैं कांग्रेस में हूँ और कहीं नहीं जा रहा। मैं केरल के चुनाव अभियान में पूरी तरह हिस्सा लूंगा और यूडीएफ (संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा) की जीत के लिए काम करूंगा। आगामी केरल विधानसभा चुनाव में मैं कांग्रेस का नेतृत्व करते हुए आगे रहूंगा।'

यह सब केरल में होने वाले चुनाव से पहले हो रहा है। केरल में आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए थरूर बेहद अहम हैं। अगले कुछ महीनों में कई राज्यों में चुनाव हैं, लेकिन केरल ही एक ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस को जीतने का अच्छा मौका दिखता है। हाल में केरल में मेयर पद पर पहली बार बीजेपी की जीत के बाद थरूर का कांग्रेस के साथ सबकुछ ठीक होना पार्टी के लिए अच्छे संकेत हैं। इससे कांग्रेस को मज़बूती मिलेगी। इसलिए पार्टी थरूर को साथ रखना चाहती है, क्योंकि वे तिरुवनंतपुरम से मजबूत सांसद हैं और पार्टी के लिए एक बड़ा चेहरा हैं।