INDIA गठबंधन में नेतृत्व को लेकर दावे तेज हो गए हैं। उदयनिधि स्टालिन का कहना है कि डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन को इंडिया गठबंधन का नेतृत्व सौंपा जाना चाहिए। ममता बनर्जी के लिए भी ऐसी ही मांग हुई है। क्या इनका संबंध इन राज्यों में चुनाव से है?
इंडिया गठबंधन का नेतृत्व कौन करेगा
विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक में नेतृत्व को लेकर बहस तेज हो गई है, खासकर उन राज्यों में जहां विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। तमिलनाडु के उप-मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने अपने पिता और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को गठबंधन का नेतृत्व सौंपने की वकालत की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ब्लॉक का नेता बताते हुए राहुल गांधी को पद छोड़ने की सलाह दी है।
यह विवाद आगामी विधानसभा चुनावों से जुड़ा हुआ माना जा रहा है, जहां क्षेत्रीय दलों के नेता खुद को राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार के रूप में प्रोजेक्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। इसका फायदा उन्हें चुनाव में मिल सकता है।
इंडिया ब्लॉक, जो 2024 लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के खिलाफ बनाया गया था, अब राजनीतिक दावों का शिकार हो रहा है। हालांकि हाल के चुनावों में कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन के बाद भी गठबंधन में वैकल्पिक नेतृत्व की मांग बढ़ गई है। शिवसेना (यूबीटी) ने अपनी मुखपत्र 'सामना' में चेतावनी दी है कि इंडिया गठबंधन 'क्रॉसरोड' पर है और राज्य चुनावों से पहले 'फ्रेंडली फायर' से बचना जरूरी है।
- लेकिन पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे पोल-बाउंड राज्यों में यह जंग कई वजहों से तेज है। जानिए:
चुनावी रणनीति और एकता का संकट
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, जहां कांग्रेस, टीएमसी और बीजेपी के बीच मुकाबला है। टीएमसी और कांग्रेस के बीच सीपीएम से गठबंधन न होने से तनाव बढ़ा है। अय्यर ने कोलकाता में कहा कि ममता बनर्जी के बिना इंडिया ब्लॉक का 'आई, एन, डी, आई, ए' टूट जाएगा, और राहुल गांधी को छोटे दलों के नेताओं जैसे स्टालिन, ममता, अखिलेश या तेजस्वी को नेतृत्व सौंपना चाहिए। अय्यर के बयान के बाद गठबंधन की एकता पर सवाल उठ रहे हैं, जो राज्य चुनावों में विपक्ष को कमजोर कर सकता है। लेकिन यह बयान और सारा मामला रणनीतिक लग रहा है। पश्चिम बंगाल में ममता का कद बढ़ाने के लिए इस तरह का बयान सामने आया है। मणिशंकर अय्यर के बयान से बीजेपी को नहीं, ममता बनर्जी को फायदा होगा।
क्षेत्रीय नेताओं की महत्वाकांक्षा
तमिलनाडु में भी 2026 के विधानसभा चुनावों की तैयारी चल रही है। उदयनिधि स्टालिन ने कोयंबटूर में कहा कि अन्य राज्यों के नेता एम.के. स्टालिन को गठबंधन का नेतृत्व करने के लिए कह रहे हैं, क्योंकि वे न सिर्फ तमिलनाडु बल्कि पूरे देश को दिशा दे सकते हैं। यह बहस सवाल उठा रही है कि क्षेत्रीय दल खुद को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय स्तर का दावा ठोक रहे हैं।
राष्ट्रीय संकट में नेतृत्व की जरूरत
विपक्षी नेता मानते हैं कि बीजेपी के खिलाफ लोकतांत्रिक लड़ाई के लिए मजबूत नेतृत्व चाहिए। अय्यर ने कहा कि यह पद छोटे दलों के लिए उपयुक्त है, न कि कांग्रेस के लिए। पोल-बाउंड राज्यों में यह खींचतान इसलिए है क्योंकि चुनावी हार-जीत गठबंधन की राष्ट्रीय छवि को प्रभावित करेगी।
ममता और स्टालिन पर ज़ोर क्यों
सवाल ये है कि क्या यह पूरा घटनाक्रम ममता बनर्जी और एम.के. स्टालिन को पीएम उम्मीदवार प्रोजेक्ट करने से जुड़ा है? हां, यह विवाद सीधे तौर पर ममता बनर्जी और एम.के. स्टालिन को अपने-अपने राज्यों से राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार के रूप में प्रोजेक्ट करने से जुड़ा लगता है। अय्यर ने ममता को ब्लॉक का नेता बताया और स्टालिन समेत अन्यों को वैकल्पिक चेहरा कहा।
उदयनिधि की वकालत से स्टालिन को राष्ट्रीय नेता के रूप में पेश किया जा रहा है। यह रणनीति इसलिए है क्योंकि अगर इंडिया ब्लॉक भविष्य के लोकसभा चुनावों (2029) में मजबूत होता है, तो ब्लॉक का नेता स्वाभाविक रूप से पीएम उम्मीदवार बन सकता है। ममता और स्टालिन जैसे क्षेत्रीय नेता अपनी राज्य सरकारों की सफलताओं (जैसे बंगाल में टीएमसी की लगातार जीत या तमिलनाडु में डीएमके की नीतियां) को राष्ट्रीय मॉडल के रूप में पेश कर रहे हैं। कांग्रेस के हालिया चुनावी प्रदर्शन से खाली हुए स्थान को भरने की कोशिश में ये नेता आगे आ रहे हैं। टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में बीजेपी को वैचारिक चुनौती दी जा रही है।
- वहीं, बंगाल कांग्रेस ने अय्यर को पार्टी से अलग बताते हुए इसे बीजेपी की साजिश कहा।
यह बहस इंडिया गठबंधन की एकता के लिए चुनौती है, लेकिन चुनावी राज्यों में विपक्षी दलों को मजबूत करने का अवसर भी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नेतृत्व पर सहमति नहीं बनी, तो राज्य चुनावों में बीजेपी को फायदा हो सकता है।