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कांग्रेस अध्यक्ष पर फ़ैसला टला, कार्यसमिति में बनेगी चुनाव की व्यवस्था

कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर अभी सस्पेंस कुछ दिन और बना रह सकता है। हालाँकि शुक्रवार शाम तय माना जा रहा था कि शनिवार सुबह होने वाली कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी का नया अध्यक्ष चुन लिया जाएगा। तब कयास लगाए गए कि नए अध्यक्ष के लिए मुकुल वासनिक का नाम लगभग तय हो चुका है और उनके नाम पर सिर्फ़ कार्यसमिति की मुहर लगना बाक़ी है। लेकिन कांग्रेस के वार रूम 15 गुरुद्वारा रकाबगंज रोड पर देर रात तक चली महासचिवों और प्रभारियों के साथ वरिष्ठ नेताओं की अहम बैठक के बाद हालात बदल गए हैं।

कार्यसमिति की बैठक से पहले राहुल गाँधी की मौजूदगी में हुई वरिष्ठ नेताओं की इस बैठक में यह तय हुआ है कि कार्यसमिति की बैठक में नए अध्यक्ष चुनने की व्यवस्था बना ली जाए और इसके कुछ दिन बाद नया अध्यक्ष चुना जाए। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक़ राहुल गाँधी चाहते हैं कि इस बार कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव समिति की प्रदेश इकाइयों से भी इसके लिए सहमति ली जाए। इसमें थोड़ा वक़्त लग सकता है। सूत्रों के मुताबिक़ राहुल गाँधी ने पार्टी के नेताओं से कहा कि इस बार केवल कांग्रेस कार्यसमिति अकेले अध्‍यक्ष का फ़ैसला नहीं करेगी। बल्कि कांग्रेस की प्रदेश कमेटियाँ और पार्टी की अन्‍य ईकाइयाँ मिलकर फ़ैसला करेंगी।

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सूत्रों के मुताबिक़, राहुल गाँधी ने कहा कि शनिवार को कांग्रेस कार्यसमि‍ति की बैठक में अध्‍यक्ष के चयन को लेकर व्‍यवस्‍था बना ली जाएगी और अगले कुछ दिनों के अंदर नए अध्यक्ष के बारे में फ़ैसला लिया जाएगा। बता दें कि कांग्रेस कार्यसमिति ने राहुल गाँधी का इस्‍तीफ़ा अभी भी स्‍वीकार नहीं किया है। लिहाज़ा राहुल अभी भी कांग्रेस के अध्‍यक्ष हैं। इस नाते राहुल गाँधी ने मंगलवार को ही कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक की अध्यक्षता की थी शुक्रवार की बैठक की भी उन्होंने अध्यक्षता की और शनिवार को होने वाली कार्य समिति की अध्यक्षा भी वही करेंगे।

राहुल ने क्या कहा?

बैठक में मौजूद एक नेता के मुताबिक़ राहुल ने यह भरोसा दिलाया है कि वे अध्यक्ष नहीं रहते हुए भी पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह विचारधारा की लड़ाई है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि विचारधारा की लड़ाई आख़िर अंत में कांग्रेस ही जीतेगी और केंद्र के साथ-साथ राज्यों की सत्ता में भी वापसी करेगी। सूत्रों के मुताबिक़ नए अध्यक्ष के चयन के फ़ैसले को लेकर शनिवार को सीडब्ल्यूसी की बैठक में व्यापक विचार-विमर्श होगा और चयन के लिए कोई व्यवस्था बनाई जाएगी। बता दें कि कांग्रेस के दिग्गज नेता और लंबे अरसे तक पार्टी महासचिव रहे जनार्दन द्विवेदी ने एक महीना पहले यह सवाल उठाया था कि अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ी देने के बाद राहुल गाँधी को नए अध्यक्ष चुनने के लिए व्यवस्था बना देनी चाहिए थी।

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सोनिया गाँधी से मिले वरिष्ठ नेता

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक से एक दिन पहले पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने शुक्रवार को यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गाँधी से मुलाक़ात की। सूत्रों के मुताबिक़ अहमद पटेल, एके एंटनी और केसी वेणुगोपाल सोनिया गाँधी से मिले थे। सूत्रों के मुताबिक़ इन नेताओं ने पार्टी के नए नेताओं के नाम पर चल रहे विचार-विमर्श के बारे में सोनिया गाँधी को पूरी जानकारी दी थी। इसी मुलाक़ात के बाद में अध्यक्ष के लिए मुकुल वासनिक का नाम सामने आया था। पार्टी नेताओं को राहुल गाँधी की तरफ़ से दिए गए दिशा-निर्देशों के बाद अब लगने लगा है कि अध्यक्ष पद पर फ़ैसला फिलहाल कुछ दिनों के लिए टल गया है।

राहुल के बाद संकट

बता दें कि 23 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद 25 मई को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़े की पेशकश कर दी थी। वरिष्ठ नेताओं के काफी मनाने के बावजूद वह इस्तीफ़ा वापस लेने को राज़ी नहीं हुए। पहले उन्होंने पार्टी नेताओं को एक नया अध्यक्ष चुनने के लिए एक महीने का वक़्त दिया था। 

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जब पार्टी के नेता महीने भर में नया अध्यक्ष नहीं चुन पाए, तो राहुल गांधी ने 4 पेज की चिट्ठी लिख कर 3 जुलाई को ट्विटर पर पोस्ट कर दी थी। यह उनका इस्तीफ़ा था। इसमें उन्होंने इस बात पर नाराज़गी जताई थी कि पार्टी उन्हें मनाने की कोशिश करती रही। नया अध्यक्ष चुनने में एक महीने से ज्यादा वक़्त बरबाद कर दिया गया।

प्रियंका ने किया इनकार

उसके बाद कई नेताओं ने पार्टी में अध्यक्ष को लेकर चल रही क़वायद पर गंभीर सवाल उठाए थे और कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाकर अध्यक्ष चुनने की मांग की थी। इन नेताओं में डा. कर्ण सिंह और जनार्दन द्विवेदी के नाम प्रमुख हैं। वहीं, पंजाब के मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी कार्यसमिति की बैठक बुलाने की मांग की थी। उन्होंने किसी युवा नेता को पार्टी की कमान सौंपी जाने की भी मांग की थी। उनका इशारा प्रियंका गांधी की तरफ था। 

राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद जब प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में सक्रिय हुईं तो श्रीप्रकाश जायसवाल और अनिल शास्त्री जैसे 10 जनपथ के क़रीबी समझे जाने वाले नेताओं ने प्रियंका के पक्ष में माहौल बनाने की पूरी कोशिश की।
प्रियंका ने इस ज़िम्मेदारी लेने से मना कर दिया। इसके बावजूद शशि थरूर और कैप्टन अमरेंद्र सिंह प्रियंका गांधी को अध्यक्ष बनाने की वकालत करते करते दिखे।
पिछले करीब महीने भर से नए अध्यक्ष चुनने की क़वायद चल रही है। इस बीच अशोक गहलोत, सुशील सुशील कुमार शिंदे, मलिकार्जुन खड़गे, मुकुल वासनिक, मीरा कुमार जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट जैसे नौजवान नेताओं के नाम पर भी चर्चा हुई। मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा ने बाकायदा बयान जारी करके सुशील कुमार, ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट में से किसी एक को पार्टी का अध्यक्ष बनाने की मांग की थी।
यूसुफ़ अंसारी
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