असम में ज़मीन के अधिकारों के लिए आंदोलन चला रहे सामाजिक कार्यकर्ता प्रणब डोले को एनएसए के तहत हिरासत में लिए जाने पर कांग्रेस ने बीजेपी सरकार पर विरोध की आवाज़ को दबाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार असहमति की आवाज़ को दबाने के लिए कड़े क़ानूनों का दुरुपयोग कर रही है और यह लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को कहा कि डोले को जिला अदालत से ज़मानत मिलने के सिर्फ एक दिन बाद उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून यानी एनएसए लगा दिया गया। उन्होंने इसे प्रिवेंटिव डिटेंशन कानूनों का खुला दुरुपयोग बताया।
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किसका विरोध कर रहे हैं प्रणब डोले?

एक्टिविस्ट प्रणब डोले असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास प्रस्तावित एक फाइव स्टार होटल परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस परियोजना से स्थानीय लोगों की ज़मीन और क्षेत्र की संवेदनशील पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचेगा।

डोले को 13 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। वे गोलाघाट ज़िला जेल में बंद थे। 29 जुलाई को एक जिला अदालत ने उन्हें ज़मानत दे दी, लेकिन अगले ही दिन असम सरकार ने उनके खिलाफ एनएसए लागू कर दिया। इससे उनकी रिहाई रुक गई और उन्हें जेल में ही रखा गया।

जयराम रमेश ने क्या कहा?

जयराम रमेश ने रविवार को सोशल मीडिया पर कहा कि डोले स्थानीय ग्रामीणों के ज़मीन के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे थे। 2022 से गोलाघाट के लोग इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनकी ज़मीन जबरन ली गई। इसी मामले को लेकर लोगों ने पहले गुवाहाटी हाईकोर्ट का भी दरवाज़ा खटखटाया था।
उन्होंने कहा कि अदालत ने ज़मानत देते समय माना था कि 'जहां पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी समुदाय के अस्तित्व का सवाल हो, वहां लोगों की वास्तविक चिंताओं को दबाने के लिए आपराधिक कानून का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।' कांग्रेस का आरोप है कि अदालत की इस टिप्पणी के बावजूद सरकार ने एनएसए लगाकर न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश की।

NSA लगाने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

जयराम रमेश ने कहा कि डोले के खिलाफ एनएसए आदेश में यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने 'संदिग्ध विदेशी स्रोतों से संदिग्ध वित्तीय लेन-देन' किए हैं, लेकिन इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

जयराम रमेश का कहना है कि इस तरह के अस्पष्ट आरोप लगाकर सरकार असहमति जताने वालों को निशाना बना रही है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी शासित राज्यों में विरोध करने वालों के ख़िलाफ़ लगातार कठोर क़ानूनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

'यूपी में भी एनएसए लगाया गया था'

जयराम रमेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी मजदूर अधिकारों के लिए प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ताओं पर एनएसए लगाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकारें मजदूरों, आदिवासियों और हाशिए पर रहने वाले समुदायों की आवाज़ को दबाने के लिए ऐसे कानूनों का सहारा ले रही हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और कई हाईकोर्ट पहले भी साफ़ कर चुके हैं कि किसी व्यक्ति को ज़मानत मिलने के बाद केवल उसे जेल में बनाए रखने के लिए निवारक हिरासत कानूनों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

गौरव गोगोई का हिमंता सरमा पर हमला

असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने भी राज्य सरकार की कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इससे साफ़ है कि असम सरकार किसी भी तरह की असहमति को स्वीकार नहीं करना चाहती। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पहले भी कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई की चेतावनी दे चुके हैं।

सरकार ने NSA क्यों लगाया?

असम सरकार के राजनीतिक विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि प्रणब डोले की गतिविधियां 'सार्वजनिक व्यवस्था और राज्य की सुरक्षा के लिए हानिकारक' हो सकती हैं। सरकार का कहना है कि यदि उन्हें रिहा किया गया तो उनके फिर से ऐसी गतिविधियों में शामिल होने की आशंका है। इसी आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, 1980 की धारा 3(2) के तहत उन्हें हिरासत में रखने का आदेश दिया गया।

होटल परियोजना को लेकर लगातार विरोध

प्रणब डोले लंबे समय से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास बनने वाले प्रस्तावित फाइव स्टार होटल का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे क्षेत्र की जैव विविधता, वन्यजीवों और स्थानीय समुदायों की आजीविका पर असर पड़ेगा।
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डोले किसान अधिकारों से जुड़े आंदोलनों में भी सक्रिय रहे हैं। वे विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं, लेकिन चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली थी। अब उनके खिलाफ एनएसए लगाए जाने के बाद यह मामला राजनीतिक और क़ानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रही है, जबकि असम सरकार का कहना है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम ज़रूरी था।