मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद से पूरे क्षेत्र में राजनीतिक उबाल आ गया है। इस फैसले से नाराज पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने करीब 12 घंटे तक राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) को जाम रखा, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई। इस बवाल के बीच राजनीतिक गलियारों में इस बात की सबसे ज्यादा चर्चा है कि आखिर दतिया के 'डॉन' कहे जाने वाले नरोत्तम मिश्रा का टिकट क्यों काटा गया। जबकि उन्हें अमित शाह का नज़दीकी आदमी माना जाता है। नरोत्तम मिश्रा कभी सीएम पद के भी दावेदार थे।

आखिर क्यों कटा नरोत्तम मिश्रा का टिकट?

पार्टी सूत्रों के अनुसार, नरोत्तम मिश्रा को पूरा भरोसा था कि पार्टी इस उपचुनाव में उन्हीं पर दांव लगाएगी, जिसके लिए उन्होंने नामांकन फॉर्म तक खरीद लिया था। लेकिन ऐन वक्त पर उनका नाम कटने के पीछे निम्नलिखित रणनीतिक कारण रहे:

पार्टी की 'नो रिपीट' और नए नेतृत्व की नीति: 2023 के मुख्य विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा को कांग्रेस के राजेंद्र भारती से 7,500 से अधिक वोटों से करारी हार का सामना करना पड़ा था। पार्टी आलाकमान, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश संगठन के वरिष्ठ नेताओं (जैसे पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान) के बीच हुई बैठकों में यह तय किया गया कि हारे हुए चेहरों को दोबारा मौका देने से जनता में नकारात्मक संदेश जा सकता है।
स्थानीय स्तर पर एंटी-इंकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) को कम करना: नरोत्तम मिश्रा दतिया में एक लंबे समय से सक्रिय थे और उनके कड़े तेवरों के कारण स्थानीय स्तर पर एक बड़े वर्ग में उनके खिलाफ नाराजगी भी थी। पार्टी का मानना था कि किसी नए और विवाद-रहित स्थानीय चेहरे को उतारने से कांग्रेस के खिलाफ लड़ाई आसान होगी।
कोऑपरेटिव बैंक मामला और कानूनी दांव-पेंच: भाजपा इस चुनाव को पूरी तरह से भ्रष्टाचार और कानूनी मर्यादा के मुद्दे पर लड़ना चाहती है। पार्टी किसी भी ऐसे सीनियर नेता को नहीं उतारना चाहती थी जिसके साथ कोई पुराना राजनीतिक गतिरोध जुड़ा हो, इसलिए आशुतोष तिवारी को एक साफ-सुथरे विकल्प के रूप में चुना गया।

नरोत्तम मिश्रा का महत्वपूर्ण बयान

टिकट न मिलने पर बीजेपी नेता नरोत्तम मिश्रा ने कहा, "यह पार्टी का फ़ैसला है। मैं सभी पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील करता हूं - खासकर सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं को पेट्रोल या केरोसिन डालते हुए वीडियो देखने के बाद कि वे ऐसी हरकतें न करें। अपनी बात पार्टी के मंच पर सही तरीके से रखनी चाहिए। उन्हें इस तरह से नहीं बताना चाहिए।"
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हर किसी को टिकट नहीं दिया जा सकताः कैलाश विजयवर्गीय

मध्य प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने दतिया की घटना पर कहा, "पार्टी के अंदर लोकतंत्र है और BJP कार्यकर्ता बहुत अनुशासित हैं। एक बार जब हम उनसे बैठकर बात करेंगे, तो सब साथ आ जाएंगे। मैं अभी कह सकता हूं कि आशुतोष तिवारी भारी अंतर से जीतेंगे।" नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों की नाराज़गी से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, "हम इसे संभाल लेंगे। यह हमारे लिए बहुत छोटी बात है। पार्टी सोच-समझकर फ़ैसले लेती है और इसीलिए हम बड़े अंतर से जीतेंगे। नरोत्तम जी भी पार्टी के लिए काम करेंगे। मैं यह बात आज ही कह रहा हूं। वह पार्टी के अच्छे और सीनियर कार्यकर्ता हैं। कई लोग चुनाव लड़ने की तैयारी करते हैं। विधानसभा की 230 सीटें हैं और लगभग 2,000 लोग टिकट की उम्मीद कर सकते हैं। लेकिन हर किसी को टिकट नहीं दिया जा सकता।"

दतिया में 12 घंटे तक अराजकता: पुलिस पर पथराव, एसपी घायल

जैसे ही शुक्रवार को भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने आशुतोष तिवारी के नाम पर मुहर लगाई, दतिया की सड़कों पर नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा।

हाईवे रहा पूरी तरह ठप: 3,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-44 को घेर लिया और करीब 11 से 12 घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रखा। उग्र भीड़ ने दतिया शहर के बाजारों को भी जबरन बंद कराने का प्रयास किया।

एसपी समेत कई पुलिसकर्मी घायल: दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े और एसपी मयूर खंडेलवाल के मुताबिक, पुलिस ने आदर्श आचार संहिता का हवाला देकर प्रदर्शनकारियों को समझाने और रास्ता खाली करने की बार-बार अपील की। लेकिन उग्र भीड़ ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया और सरकारी वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया।

आंसू गैस का इस्तेमाल और गिरफ्तारियां: पथराव में दतिया एसपी और 6 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए पुलिस को प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज करना पड़ा। पुलिस ने मौके से कई प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया है।

संगठन में बगावत: सामूहिक इस्तीफों की झड़ी

नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने का असर भाजपा के स्थानीय संगठन पर बहुत गहरा पड़ा है। दतिया भाजपा के जिला अध्यक्ष समेत कई स्थानीय पार्षदों और मंडल स्तर के पदाधिकारियों ने पार्टी से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। समर्थकों ने साफ चेतावनी दी है कि वे "नरोत्तम दादा" के बिना किसी अन्य उम्मीदवार के लिए काम नहीं करेंगे और जरूरत पड़ने पर पूरी तरह से भाजपा छोड़ देंगे।

क्यों हो रहा है दतिया में उपचुनाव

इस साल अप्रैल में दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में 3 साल की सजा सुनाई, जिसके कारण नियमों के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द हो गई और यह सीट खाली हो गई। हालांकि, बाद में भारती को जमानत मिल गई, लेकिन सीट खाली होने के कारण चुनाव आयोग ने यहां उपचुनाव कराने का फैसला किया है।

दतिया उपचुनाव का शेड्यूल

चुनाव आयोग के मुताबिक दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान 30 जुलाई को होगा और वोटों की गिनती 3 अगस्त को की जाएगी। फिलहाल पूरे दतिया क्षेत्र में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और संगठन स्तर पर डैमेज कंट्रोल (नाराजगी दूर करने) की कोशिशें जारी हैं।