तमिलनाडु में थलपति विजय की टीवीके को समर्थन की कांग्रेस की घोषणा पर डीएमके आगबबूला है। डीएमके ने कांग्रेस के उस फैसले को ‘पीठ में छुरा घोंपना’ बताया है, जिसमें कांग्रेस ने तमिलगा वेट्ट्री कड़गम यानी TVK को समर्थन देने का ऐलान किया। डीएमके के संयुक्त सचिव और प्रवक्ता सरवनन अन्नादुराई ने कांग्रेस के इस कदम को ‘बेवकूफी भरा फैसला’ करार दिया। उन्होंने कहा कि यह फैसला सिर्फ कुछ लोगों के अहंकार को संतुष्ट करने के लिए लिया गया है। कांग्रेस पर डीएमके के इस हमले ने उस इंडिया गठबंधन में दरार को दिखा दिया है जिसको एक दिन पहले ही बंगाल में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के बयान के बाद मज़बूत होने का संकेत बताया जा रहा था। ममता ने कहा था कि सोनिया, राहुल सहित तमामा विपक्षी नेताओं ने उनको फोन किया था और अब वह 'इंडिया गठबंधन को और मज़बूत' करेंगी।

डीएमके ने क्या कहा?

सरवनन अन्नादुराई ने कांग्रेस को याद दिलाते हुए कहा, '2016 में हमने कांग्रेस को अच्छी सीटें दीं। भाजपा-आरएसएस राहुल गांधी का मजाक उड़ा रहे थे। तब हमारे नेता एमके स्टालिन ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाया। इसी वजह से 2024 में राहुल गांधी की लोकप्रियता बढ़ी। यह सब डीएमके की मेहनत और संसाधनों से हुआ। हमने कांग्रेस को कभी निराश नहीं किया।'
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उन्होंने आगे कहा, 'TVK को बहुमत के लिए 11 सीटों की ज़रूरत है। AIADMK के पास 47 सीटें हैं और वे बिना शर्त समर्थन देने को तैयार हैं। अगर आप विजय हैं तो किसकी बात सुनेंगे- 5 सीटों वाले की या 47 सीटों वाले की? कांग्रेस ने बहुत गलत फैसला लिया है। उन्हें जल्द ही पछतावा होगा।' डीएमके प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस का यह फ़ैसला पूरे देश में INDIA गठबंधन के अन्य साथियों के मन में सवाल पैदा करेगा। उन्होंने अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और उद्धव ठाकरे जैसे नेताओं का नाम लिया। इससे पहले डीएमके के एक प्रवक्ता ने सोशल मीडिया पर सिर्फ एक शब्द लिखा – 'The backstabbers' यानी पीठ में छुरा घोंपने वाले।

कांग्रेस का जवाब

कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने थोड़े नरम लहजे में बात की। उन्होंने कहा, 'डीएमके सरकार के खिलाफ फैसला गया है। आधे से ज्यादा मंत्री अपनी सीट हार गए। हम बिना गलती के नुकसान उठा रहे हैं। अब भाजपा तमिलनाडु पर नजर गड़ाए हुए है। सवाल यह है कि क्या हम उन लोगों के साथ खड़े होंगे जिन्हें जनता ने ठुकरा दिया, या फिर भाजपा विरोधी ताकतों के साथ मिलकर भाजपा को सत्ता से दूर रखेंगे?'

तमिलनाडु में नया समीकरण

इस बार तमिलनाडु में थलपति विजय की पार्टी टीवीके ने शानदार प्रदर्शन किया। पहली बार चुनाव लड़ते हुए टीवीके 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बन गई। लेकिन पूर्ण बहुमत 118 सीटें के लिए उसे अभी कुछ और समर्थन चाहिए। टीवीके ने 108 सीटें जीती हैं। थलपति विजय खुद दो सीटों पेराम्बुर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट से जीते हैं। तो अब इसे बहुमत के लिए 11 और विधायकों के समर्थन की ज़रूरत है। 

कांग्रेस और वामपंथी दलों के कुल 9 विधायक हैं। इनके अलावा वीसीके जैसे छोटे दल भी साथ आ सकते हैं जिनके दो विधायक जीते हैं। डीएमके सत्ता से बाहर हो गई है और कमजोर स्थिति में है। इसी बीच अब कांग्रेस और टीवीके में गठबंधन हुआ है।

इंडिया गठबंधन को झटका?

कांग्रेस पर डीएमके के हमले के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या इंडिया गठबंधन में दरार आ गई है? बीजेपी ने विपक्षी INDIA गठबंधन पर भी हमला करते हुए कहा कि यह गठबंधन अब ताश के पत्तों की तरह बिखर रहा है। इसमें न कोई साझा विचारधारा है और न कोई साझा विजन। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि 4 मई को विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद INDIA गठबंधन खत्म हो गया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'ऐसा कोई नहीं है जिसके साथ कांग्रेस ने धोखा नहीं किया। अगर उन्होंने DMK के साथ ऐसा किया है तो कल वो समाजवादी पार्टी के साथ क्या करेंगे, सोचिए!' शहजाद पूनावाला ने एक वीडियो पोस्ट में इसे INDIA गठबंधन की अंतिम विदाई बताया।

INDIA गठबंधन पर असर

डीएमके का हमला INDIA गठबंधन के अंदर यह पहला बड़ा सार्वजनिक झगड़ा है। डीएमके इंडिया गठबंधन में बड़ी सहयोगी है। भले ही डीएमके के नेता हमलावर हैं, लेकिन कांग्रेस और डीएमके अभी भी INDIA गठबंधन में साथ रह सकती हैं, क्योंकि यह गठबंधन राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए बनाया गया है। कांग्रेस के नेता कहते हैं कि लेफ्ट पार्टियां, टीएमसी और कांग्रेस खुद भी कई राज्यों में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ती हैं, फिर भी गठबंधन में बने हुए हैं। हालाँकि, यह ताज़ा फ़ैसला INDIA गठबंधन की एकता और मजबूती पर सवाल खड़े करेगा।
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लेकिन डीएमके की ऐसी नाराज़गी के बीच भी इंडिया गठबंधन के मज़बूत होने के कयास लगाए जा रहे हैं। खासकर ममता बनर्जी के मंगलवार के बयान के बाद। ममता ने कहा है कि वे 'INDIA गठबंधन को मजबूत करेंगी'। उन्होंने खुद को आम कार्यकर्ता बताया क्योंकि अब उनके पास सत्ता नहीं है, इसलिए वे पूर्ण रूप से गठबंधन को एकजुट करने पर फोकस करेंगी।

ममता बनर्जी ने कहा, 'सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, हेमंत सोरेन आदि कई इंडिया गठबंधन के नेताओं ने उन्हें फोन किया और पूर्ण समर्थन दिया।' उन्होंने कहा कि गठबंधन एकजुट रहेगा और आने वाले दिनों में इसके नतीजे दिखेंगे। वे छोटे कार्यकर्ता की तरह इसे मजबूत बनाने का काम करेंगी। उनका यह बयान बीजेपी से चुनावी हार के ठीक बाद आया, जिसमें ममता ने हार स्वीकार नहीं की, चुनाव आयोग पर धांधली के आरोप लगाए। तमाम विपक्षी नेताओं ने ममता का समर्थन किया। अब सभी विपक्षी नेता अब 'वोट चोरी' को मुद्दा बना रहे हैं और इस पर एक साथ मज़बूती से आने की तैयारी में हैं। तो क्या अभी कांग्रेस से नाराज़ डीएमके भी देर-सबेर इन मुद्दों को लेकर इंडिया गठबंधन में अपना योगदान देगा ही?