टीवीके-कांग्रेस गठबंधन के बाद द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम बेहद नाराज़ है। डीएमके सांसद कणिमोड़ी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है कि 'कांग्रेस के साथ हमारा गठबंधन खत्म हो गया है। इसलिए DMK सांसदों को कांग्रेस के बगल वाली सीटों से अलग बैठने की व्यवस्था की जाए।'
एमके स्टालिन और राहुल गांधी
विपक्षी INDIA गठबंधन में बड़ी दरार पड़ गई है। कांग्रेस ने दो दिन पहले ही डीएमके को छोड़ विजय की टीवीके के साथ हाथ मिलाया और अब डीएमके ने इंडिया गठबंधन में हलचल मचा दी है। इसने कांग्रेस से अलग होने का ऐलान कर दिया। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर डीएमके सांसदों के लिए अलग सीटिंग की मांग कर दी गई है। कांग्रेस के साथ दशकों पुराना गठबंधन टूटने के बाद डीएमके सांसद कणिमोड़ी ने साफ कहा कि अब उनके साथ बैठना मुनासिब नहीं। यानी अब विपक्षी इंडिया गठबंधन में बड़ी फूट साफ़ नजर आ रही है।
द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम यानी DMK ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर कहा है कि उसके सांसदों को कांग्रेस सांसदों के साथ बैठना ठीक नहीं रहेगा। डीएमके सांसद कणिमोड़ी करुणानिधि ने स्पीकर को लिखे पत्र में कहा, 'बदलती राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए कांग्रेस के साथ हमारा गठबंधन ख़त्म हो गया है। इसलिए हमारी पार्टी के सांसदों को कांग्रेस के साथ वाली मौजूदा सीटिंग में नहीं रखना चाहिए। हमें अलग जगह दी जाए ताकि हम अपनी जिम्मेदारियां अच्छे से निभा सकें।'
डीएमके कांग्रेस से नाराज़ क्यों?
यह घटना सिर्फ़ दो दिन बाद हुई है जब कांग्रेस ने डीएमके को छोड़ दिया और तमिलनाडु में अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी TVK के साथ मिलकर सरकार बनाने का फ़ैसला किया। कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन कई दशकों पुराना था, लेकिन अब यह टूट गया है। डीएमके लोकसभा में इंडिया गठबंधन में 22 सांसदों वाली चौथी सबसे बड़ी पार्टी है। इसके अलावा राज्यसभा में भी इसके 8 सदस्य हैं।इंडिया गठबंधन पर असर
यह घटना इंडिया गठबंधन के भविष्य के लिए बड़ा संकेत मानी जा रही है। गठबंधन बीजेपी और एनडीए के खिलाफ बनाया गया था, लेकिन अब इसमें फूट दिख रही है। कांग्रेस के इस फ़ैसले पर विपक्षी दलों में दो राय हैं। कुछ नेता इसे रणनीतिक कदम बता रहे हैं ताकि तमिलनाडु में बीजेपी की सरकार न बने। वहीं कई नेता डीएमके के साथ खड़े हैं और कांग्रेस पर 'गद्दारी' का आरोप लगा रहे हैं।
अखिलेश यादव का तंज
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि वे मुश्किल वक्त में अपने साथियों को नहीं छोड़ते। उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जहां कांग्रेस और सपा साथ लड़ने वाले हैं। अखिलेश का यह बयान गठबंधन के अंदर बदलते समीकरणों को दिखाता है।
मणि शंकर अय्यर का हमला
तमिलनाडु में टीवीके समर्थन देने पर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता मणि शंकर अय्यर अपनी ही पार्टी पर हमलावर हैं। उन्होंने इसे महात्मा गांधी की 'नैतिकता' वाली सरकार की अवधारणा का उल्लंघन बताया और इसे 'राजनीतिक मूर्खता' तथा 'अनैतिकता' करार दिया। अय्यर ने शुक्रवार को कहा, "लगभग सौ साल पहले नवंबर 1925 में महात्मा गांधी ने अपनी गुजराती पत्रिका 'नवजीवन' में बताया था कि स्वराज मिलने पर 'नैतिकता' द्वारा सरकार किस तरह चलाई जाएगी। कांग्रेस पार्टी महात्मा गांधी की पार्टी है और इसने TVK के साथ 'गठबंधन' करके इस निर्देश का उल्लंघन किया है।"ममता ने 'इंडिया' को मज़बूत करने की बात कही
एमके की ऐसी नाराज़गी के बीच भी ममता बनर्जी के मंगलवार के बयान के बाद इंडिया गठबंधन के मज़बूत होने के कयास लगाए गए। बंगाल चुनाव में हार के बाद ममता ने कहा कि वे 'INDIA गठबंधन को मजबूत करेंगी'। उन्होंने खुद को आम कार्यकर्ता बताया क्योंकि अब उनके पास सत्ता नहीं है, इसलिए वे पूर्ण रूप से गठबंधन को एकजुट करने पर फोकस करेंगी।
ममता बनर्जी ने दो दिन पहले कहा था, 'सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, हेमंत सोरेन आदि कई इंडिया गठबंधन के नेताओं ने उन्हें फोन किया और पूर्ण समर्थन दिया।' उन्होंने कहा कि गठबंधन एकजुट रहेगा और आने वाले दिनों में इसके नतीजे दिखेंगे। वे छोटे कार्यकर्ता की तरह इसे मजबूत बनाने का काम करेंगी। उनका यह बयान बीजेपी से चुनावी हार के ठीक बाद आया, जिसमें ममता ने हार स्वीकार नहीं की, चुनाव आयोग पर धांधली के आरोप लगाए। तमाम विपक्षी नेताओं ने ममता का समर्थन किया। अब सभी विपक्षी नेता अब 'वोट चोरी' को मुद्दा बना रहे हैं और इस पर एक साथ मज़बूती से आने की तैयारी में हैं। इंडिया गठबंधन का भविष्य
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि डीएमके का यह क़दम लोकसभा में इंडिया गठबंधन की एकता पर सवाल उठाता है। अगर बड़े दलों में ऐसी फूट बढ़ती गई तो संसद में विपक्ष मजबूती से सरकार के खिलाफ आवाज नहीं उठा पाएगा। डीएमके की मांग पर स्पीकर ओम बिरला अब फैसला लेंगे। फिलहाल यह घटना पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि यह दिखाती है कि राज्य स्तर के राजनीतिक हित राष्ट्रीय गठबंधन से ऊपर आ सकते हैं। यह इंडिया गठबंधन की एकता और भविष्य दोनों पर सवाल खड़े करता है।