मध्यप्रदेश भाजपा ने जिन 39 सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित किये हैं उनका चुनाव प्रचार सरकारी खर्च पर शुरू हो चुका है । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री अपने लाव -लश्कर के साथ लाड़ली बहना सम्मान समारोहों के नाम पर अपने प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार पर बेहिसाब खर्च कर रहे हैं। भाजपा को फिलहाल अपने देव् दुर्लभ कार्यकर्ताओं की सेवाओं की जरूरत नहीं है । अघोषित चुनावी सभाओं का सारा इंतजाम सरकारी खर्च पर दक्ष 'ईवेंट 'कंपनियां कर रहीं हैं। सञ्चालन से लेकर आधुनिक पंडाल बनाने से लेकर मुख्यमत्री के लिए फैशन शो की तर्ज पर रेम्प बनाने तक का काम निजी कंपनियों से कराया जा रहा है और भुगतान कर रहा है मध्यप्रदेश सरकार का प्रतिष्ठान ' माध्यम '। इन अघोषित चुनावी सभाओं यानि महिला एटीएम सम्मान समारोहों में वोट के लिए खुले आम मतदाताओं से सौदेबाज़ी की जा रही है । सरकारी योजनाओं के शिलान्यास जानबूझकर इसी समय के लिए रोककर रखे गए हैं। मुख्यमंत्री सीधे रेम्प पर चलते हुए अपनी लाड़ली बहनों से कहते हैं की ' तुम मुझे वोट दो ,मै तुम्हें नोट दूंगा ।' ये रकम अभी एक हजार रूपये महीना है जो बढ़ते-बढ़ते तीन हजार रूपये कर दी जाएगी।’
पिछले विधानसभा चुनाव में हारी सीटें जीतने के लिए शुरू किये गए भाजपा के इस अनादर्श चुनाव प्रचार का पिछोर एक नमूना भर है। पिछोर में एक दिन में 409 करोड़ रूपये की योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया । ऐसा ही कुछ शेष 38 विधानसभा क्षेत्रों में किया जा रहा है जहां कि प्रत्याशियों की घोषणा कर दी गयी है ,इस अनैतिक चुनाव प्रचार से चुनाव आयोग अनभिज्ञ नहीं है किन्तु उसने अपनी आँखें बंद कर लीं है। कांग्रेस के पास इस अभियान का कोई तोड़ नहीं है। कांग्रेस सरकार के मुकाबले खर्च करने की स्थिति में है ही नहीं।