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फ़ेसबुक विवाद: बीजेपी सांसद दुबे ने की थरूर को आईटी पैनल से हटाने की माँग

फ़ेसबुक हेट पोस्ट मामले में आज बीजेपी और कांग्रेस के बीच तब और तनातनी बढ़ गई जब भाजपा सांसद और सूचना प्रौद्योगिकी पर स्थायी समिति के सदस्य निशिकांत दुबे ने शशि थरूर को समिति के अध्यक्ष के पद से हटाने की माँग कर दी। निशिकांत दुबे ने इसके लिए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि 'थरूर का कार्यकाल विवादास्पद रहा है... विदेशी लहजे में स्पेंसरियन अंग्रेज़ी में बोलने से किसी व्यक्ति को संसदीय संस्थानों की अवहेलना करने की स्वतंत्रता नहीं मिलती है।'

निशिकांत दुबे ने पिछली घटनाओं का भी ज़िक्र किया है जहाँ उनके अनुसार शशि थरूर ने विवाद पैदा किए। उन्होंने थरूर पर समिति के सदस्यों के साथ चर्चा किए बिना संयुक्त चयन समिति की व्यक्तिगत डेटा संरक्षण बिल की जाँच पर सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने का आरोप लगाया। उन्होंने ऐसे ही आरोप 59 चीनी ऐप पर प्रतिबंध और जम्मू और कश्मीर में 4 जी इंटरनेट उपलब्ध नहीं होने पर थरूर पर टिप्पणी करने के लिए लगाया।

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फ़ेसबुक और बीजेपी की जुगलबंदी को लेकर लग रहे आरोपों के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे भिड़ गए हैं। 

बुधवार को जब शशि थरूर बीजेपी सांसद दुबे के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाए तो दुबे कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और थरूर के ख़िलाफ़ ऐसा ही प्रस्ताव लेकर सामने आ गए। दुबे ने कहा कि इसे लेकर मर्यादा की सारी सीमाएँ लांघी जा चुकी हैं।

संसद के किसी सदस्य द्वारा दूसरे सदस्य के ख़िलाफ़ लाए गए विशेषाधिकार हनन के प्रस्ताव के पास होने पर उस सांसद को सदन से निष्कासित किया जा सकता है। 

यह झगड़ा तब शुरू हुआ था जब थरूर ने कहा था कि 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' की ख़बर को लेकर वह फ़ेसबुक के अधिकारियों को तलब कर सकते हैं। लेकिन इसे लेकर झारखंड से सांसद निशिकांत दुबे बिगड़ गए थे। उन्होंने कहा था कि शशि थरूर को फ़ेसबुक के अधिकारियों को तलब करने से पहले संसद की स्थायी समिति में इसे लेकर चर्चा करनी होगी। 

दुबे ने तीख़ा हमला करते हुए कहा था, ‘शशि थरूर को यह समझना चाहिए कि संसद की स्थायी समिति संसद का ही एक अंग है और यह कांग्रेस पार्टी नहीं है।’ उन्होंने कहा था कि संसद के नियमों के मुताबिक़, केवल स्पीकर ही निजी क्षेत्र के लोगों को बुला सकते हैं। 

दुबे ने तब भी राहुल गांधी और थरूर को अपरोक्ष रूप से निशाना बनाते हुए कहा था कि संसदीय समिति के सदस्यों द्वारा अपने नेताओं के अहंकार को संतुष्ट करने के लिए इसे राजनीति का प्लेटफ़ॉर्म नहीं बनाना चाहिए।

इसके बाद थरूर ने इसे लेकर लोकसभा के स्पीकर ओम बिड़ला को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने कहा था कि दुबे के बयान से उनके सांसद के पद और स्थायी समिति के चेयरमैन के विशेषाधिकारों का हनन हुआ है।

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फेसबुक और वॉट्सएप पर नियंत्रण 

'वॉल स्ट्रीट जर्नल' की ख़बर के सामने आने के बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसे लेकर बीजेपी और आरएसएस पर हमला बोला था। राहुल ने ट्वीट कर कहा था, ‘बीजेपी-आरएसएस भारत में फेसबुक और वॉट्सएप का नियंत्रण करते हैं। इस माध्यम से ये झूठी ख़बरें व नफ़रत फैलाकर वोटरों को फुसलाते हैं।’ ख़ुद को घिरता देख बीजेपी ने केंद्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और तमाम प्रवक्ताओं को इसका जवाब देने के लिए टेलीविजन चैनलों के मोर्चे पर तैनात किया हुआ है। 

विवाद बढ़ने के बाद फ़ेसबुक ने इस पर सफाई दी और कहा है कि वह ऐसी सामग्री जिससे ‘नफ़रत को बढ़ावा मिलता हो’ या ‘हिंसा को उकसावा मिलता हो’ उसे रोक देता है। 

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