विपक्षी INDIA ब्लॉक विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद बड़ी बैठक करने वाला है। रिपोर्ट है कि इस बैठक में दो बड़े मुद्दों पर रणनीति बनाई जाएगी। एक मुद्दा है लोकसभा सीटों का Delimitation यानी नये सिरे से सीमांकन और दूसरा है महिला आरक्षण बिल। हाल ही में इन दोनों मुद्दों पर बुलाए गए संसद के विशेष सत्र में विपक्षी गठबंधन ने मोदी सरकार को पटखनी दी थी। इससे जुड़ा संशोधन विधेयक संसद में गिर गया था और माना जा रहा है कि बीजेपी इसे फिर से नये रूप में पेश कर सकती है। इसी को लेकर INDIA ब्लॉक की बैठक दिल्ली में हो सकती है। इसका समय 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद रखा गया है।

बैठक क्यों हो रही है?

सरकार लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) बिल 2026 लाई थी। इसमें लोकसभा सीटों के Delimitation और महिला आरक्षण लागू करने की बात थी। लेकिन विपक्ष ने मिलकर इस बिल को गिरा दिया। बिल पास होने के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए था। लेकिन एनडीए को 298 वोट मिले और विपक्ष को 230 वोट मिले थे। सरकार को वोट कम पड़ गए इसलिए बिल पास नहीं हो सका।
अब विपक्ष को आशंका है कि सरकार हार के बाद नया बिल लाकर फिर कोशिश कर सकती है। इसलिए इंडिया ब्लॉक अब अपनी रणनीति बनाना चाहता है।

विपक्ष क्या चाहता है?

विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि संसद में मौजूदा 543 सीटों पर ही 33% महिलाओं को आरक्षण दिया जाए। लेकिन सरकार इसे नए सीट बंटवारे यानी Delimitation के साथ जोड़ना चाहती है। विपक्ष का कहना है कि डिलिमिटेशन तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक जैसे दक्षिण भारत के राज्यों के साथ अन्याय करेगा। ये राज्य पहले से जनसंख्या नियंत्रण में सफल रहे हैं, लेकिन डिलिमिटेशन उत्तरी राज्यों को ज्यादा सीटें दे सकता है।

बैठक में क्या चर्चा होगी?

विपक्ष इस रणनीति पर काम कर रहा है कि अगर सरकार नया बिल लाई तो उसका सामना कैसे करें। डेक्केन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि वे इस बात पर चर्चा करेंगे कि सरकार के अगले क़दम से कैसे निपटा जाए, यदि वह परिसीमन पर कोई नया बिल लाने और फिर उसे महिलाओं के लिए आरक्षण से जोड़ने की योजना बनाती है। नेता ने कहा, 'वे अपनी हार से बौखलाए हुए हैं, लेकिन वे इसे इतनी आसानी से छोड़ने वाले नहीं हैं; इसलिए हमें एक रणनीति बनानी होगी।'

विपक्षी दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साझा पत्र लिखकर महिला आरक्षण तुरंत लागू करने की मांग करने को लेकर चर्चा होगी। माना जा रहा है कि चुनाव नतीजों, खासकर पश्चिम बंगाल और केरल, का असर बैठक पर पड़ेगा। तृणमूल कांग्रेस अगर ममता बनर्जी की जीत होती है तो ज्यादा सक्रिय भूमिका की मांग कर सकती है।

विपक्ष का आरोप

विपक्षी नेता कहते हैं कि सरकार का असली मक़सद 2029 के चुनाव के लिए तैयार होना था। उन्होंने सोचा था कि विपक्ष एकजुट नहीं होगा, लेकिन समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके सभी साथ आए। विपक्ष का कहना है कि गृहमंत्री अमित शाह ने सरकार ने मार्च में एक बैठक में कुछ दलों से कहा था कि बिल में लिखा होगा कि सभी राज्यों में लोकसभा सीटें 50% बढ़ा दी जाएंगी। लेकिन बिल में ऐसा कुछ नहीं लिखा था, ऐसा आरोप लगता रहा है। विपक्ष कहता है कि यह सरकार की नीयत को दिखाता है।
विपक्षी नेता ने डेक्केन हेराल्ड से कहा, 'इस बिल का मकसद 2029 का चुनाव जीतना था। हमने उनके इरादों को भांप लिया था। बीजेपी को विपक्ष में एकता की उम्मीद नहीं थी। उन्हें लगा था कि समाजवादी पार्टी शायद दूसरे सहयोगियों के साथ हाथ न मिलाए, जबकि तृणमूल कांग्रेस और डीएमके के बड़ी संख्या में सांसद चुनाव प्रचार की वजह से गैर-हाज़िर रहेंगे। लेकिन, इनमें से कुछ भी ऐसा नहीं हुआ।'

अभी क्या स्थिति है?

बीजेपी और एनडीए शासित राज्यों में महिला आरक्षण बिल व डिलिमिटेशन पर विपक्ष के रवैये के ख़िलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। विधानसभाओं में प्रस्ताव पास किए जा रहे हैं। लेकिन विपक्ष दावा कर रहा है कि वह एकजुट रहकर सरकार के किसी भी नए कदम का मुकाबला करेगा।
हालाँकि, यह बैठक चुनाव नतीजों के बाद होगी, लेकिन इसमें हार-जीत का पोस्टमॉर्टम नहीं, बल्कि आगे की रणनीति पर फोकस रहेगा। इंडिया ब्लॉक के नेता मानते हैं कि महिला आरक्षण और डिलिमिटेशन जैसे मुद्दे देश की राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित करेंगे। इसलिए वे तैयार रहना चाहते हैं। अभी इंतजार है कि 4 मई के बाद बैठक कब होती है और उसमें क्या फैसले लिए जाते हैं। यह बैठक विपक्षी एकता को और मजबूत करने का मौक़ा भी हो सकती है।