जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विवाद और तेज हो गया है। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि इतने बड़े आंदोलन के बावजूद किसी व्यक्ति की मौत नहीं हुई और किसी प्रदर्शनकारी को गंभीर चोट नहीं लगी। इसके जवाब में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला। यहां बताना ज़रूरी है कि सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस की बेंच ने आज मंगलवार को कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की एक उच्चस्तरीय कमेटी जंतर मंतर पर पुलिस बर्बरता और हिंसा के मामले की जांच करेगी। इस कमेटी में रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज, हाईकोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस, रिटायर्ड आईपीएस होंगे।
राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार के मंत्री यह कह रहे हैं कि “दिल्ली पुलिस की तारीफ करनी चाहिए।” उन्होंने सवाल उठाया कि संसद से महज आधा किलोमीटर दूर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन चलने, कील लगी लाठियों के इस्तेमाल और बच्चों के घायल होने की घटनाओं के बाद पुलिस की तारीफ कैसे की जा सकती है।
राहुल गांधी ने पूछा, “संसद से आधा किलोमीटर दूर, शांतिपूर्ण छात्रों पर पैलेट गन चली, कील लगी लाठियाँ चलीं, एक बच्चे की आँख चली गई, एक बच्ची का कान कट गया। इस बर्बरता की तारीफ करनी चाहिए?” उन्होंने दावा किया कि वह खुद घायल छात्रों से मिले हैं और प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं से जुड़े हजारों वीडियो देश के सामने हैं। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को इन घटनाओं को नकारने के बजाय उनकी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।
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‘पहले बच्चों पर लाठी चलाओ, फिर कहो कुछ हुआ ही नहीं’

राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार का मूल मंत्र “असत्य और हिंसा” है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले छात्रों पर बल प्रयोग किया जाता है और बाद में सरकार यह कहती है कि कुछ हुआ ही नहीं। उन्होंने कहा, “इस सरकार का मूल मंत्र ही असत्य और हिंसा है। पहले बच्चों पर लाठी चलाओ, फिर बोल दो कि कुछ हुआ ही नहीं।”
राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे संसद सत्र के दौरान अमित शाह विपक्ष से बचते रहे। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर छात्रों से माफी नहीं मांगने को लेकर भी सवाल उठाया।

किरण रिजिजू ने क्या कहा?

इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस और प्रशासन का बचाव किया था। उन्होंने कहा कि आंदोलन में हजारों लोग शामिल हुए, लेकिन एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई और किसी व्यक्ति की कोई हड्डी नहीं टूटी। रिजिजू ने दावा किया कि कोई भी प्रदर्शनकारी गंभीर चोट के कारण अस्पताल में भर्ती नहीं है। उन्होंने कहा कि आंदोलन का पैमाना बड़ा था और इसमें कथित तौर पर कुछ “अपराधी” भी छात्रों के रूप में शामिल हो गए थे।
उन्होंने विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों पर भी प्रदर्शन के दौरान लोगों को हिंसा के लिए उकसाने का आरोप लगाया। रिजिजू ने आम आदमी पार्टी, “डफली बजाने वाले प्रदर्शनकारियों”, भीम आर्मी और समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों का नाम लेते हुए कहा कि इनमें से कई लोग आंदोलन में आए और उन्होंने लोगों को भड़काया।
रिजिजू ने कांग्रेस के शासनकाल में हुए प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में कई आंदोलनों में हजारों लोगों की मौत हुई थी। उनके मुताबिक, अगर इसी तरह का आंदोलन कांग्रेस के शासनकाल में हुआ होता तो स्थिति कहीं ज्यादा गंभीर हो सकती थी।

‘संसद की ओर बढ़ने पर रोका गया’

किरन रिजिजू ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान दिल्ली प्रशासन ने शुरुआत में एक भी लाठी का इस्तेमाल नहीं किया। उनके मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को तब रोका गया जब उन्होंने जबरन संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर बढ़ने से रोकने के लिए कार्रवाई की और इसके बावजूद किसी की मौत नहीं हुई। इसी आधार पर रिजिजू ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की प्रशंसा किए जाने की बात कही।
रिजिजू के इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को देश के बच्चों से झूठ नहीं बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों के साथ कथित तौर पर हिंसा हुई, वे स्वयं उस घटना को देख और याद कर सकते हैं।

राहुल गांधी ने कहा, “सच्चाई यह है कि इस देश के लिए सबसे बड़ा ख़तरा यही दिमाग से खाली लोग हैं - जिन्हें न अपनी ग़लती दिखती है, और दिखने पर मानते नहीं।” उन्होंने अपने बयान के अंत में कहा, “देश के बच्चों से झूठ मत बोलिए। उनके पास आँखें हैं और याददाश्त भी।”

जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर राहुल गांधी और किरेन रिजिजू के बीच यह बयानबाजी ऐसे समय में सामने आई है, जब छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई, बल प्रयोग और प्रदर्शनकारियों के घायल होने के आरोपों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस जारी है।