'चलो संसद' मार्च के दौरान संसद भवन के क़रीब पहुँचे छात्रों पर लाठीचार्ज और आँसू गैस छोड़े जाने को लेकर विपक्ष ने सरकार पर बड़ा हमला किया है। मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव ने नीट पेपर लीक और राम मंदिर चंदा चोरी मुद्दे को जोर शोर से उठाया।
विपक्षी नेता। (फाइल फोटो)
जंतर-मंतर और संसद के पास प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज और आँसूगैस छोड़े जाने के बाद विपक्षी दलों ने लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन किए जाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि परीक्षा नहीं करा सकते तो सिंहासन छोड़ दीजिए। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं पर चर्चा करने के बजाय उनके खिलाफ बल का इस्तेमाल कर रही है।
उनकी यह प्रतिक्रिया तब आई है जब संसद के मानसून सत्र के पहले दिन शिक्षा व्यवस्था और कथित नीट पेपर लीक को लेकर राजधानी दिल्ली में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े।
खड़गे ने कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज करना लोकतंत्र के खिलाफ है। उन्होंने कहा, 'यह सरकार नौजवानों और छात्रों पर लाठीचार्ज कर रही है। अगर आपको परीक्षाएं कराना नहीं आती तो सिंहासन खाली कर दीजिए, जनता आएगी। ऐसे लोग सत्ता में रहने के लायक नहीं हैं।' खड़गे ने अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा गबन के आरोपों का भी जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मामले की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, क्योंकि ट्रस्ट के गठन की घोषणा उन्होंने संसद में की थी।
ये हमारे बच्चे हैं, संसद भी उन्हीं की: प्रियंका
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने छात्रों पर बल प्रयोग की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार शिक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा करने से बच रही है। उन्होंने कहा, 'देश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े सवाल हैं। हम संसद में चर्चा चाहते हैं, लेकिन सरकार चर्चा नहीं करना चाहती। इसके बजाय बच्चों पर आंसू गैस छोड़ी जा रही है और उन्हें पीटा जा रहा है। आखिर क्यों? ये हमारे बच्चे हैं, देश का भविष्य हैं। यह संसद उनकी भी है।'समाजवादी पार्टी ने कहा है, 'छात्रों पर लाठी और अत्याचार-
इसकी ज़िम्मेदार भाजपा सरकार है।' पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, 'पेपर लीक में जितने लोग शामिल होते हैं वह भाजपाई हैं, कोई भी दोषी नहीं पकड़ा गया। नौकरी भी इसलिए सरकार नहीं देती क्योंकि आरक्षण देना पड़ेगा। मुझे दुख है कि आज लाठी भी चली है।'नीट के साथ राम मंदिर चंदा विवाद का मुद्दा भी उठा
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि विपक्षी दलों की बैठक में तय हुआ है कि मानसून सत्र में दो बड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पहला मुद्दा नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों का है, जबकि दूसरा मुद्दा अयोध्या राम मंदिर में कथित चंदा गबन का है। उन्होंने कहा, 'हमने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। लेकिन वे जवाब देने के लिए भी तैयार नहीं हुए। इस पूरे मामले की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।'
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार पर संसद में चर्चा से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संसद का काम केवल सरकार के विधेयकों की घोषणा करना और उन्हें पारित कराना नहीं है।
थरूर ने कहा, 'संसद वह मंच है जहां जनता की आवाज उठाई जानी चाहिए। विपक्ष NEET पेपर लीक, राम मंदिर चंदा विवाद और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा चाहता है, लेकिन सरकार बहस से डर रही है।' उन्होंने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा, 'यदि कोई शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहा है तो उस पर लाठीचार्ज क्यों किया गया? लाठीचार्ज हिंसा है, अहिंसा नहीं। इसकी क्या जरूरत थी?' उन्होंने कहा कि यदि संसद में जनता के मुद्दों पर चर्चा ही नहीं होगी तो फिर संसद का उद्देश्य क्या रह जाएगा।रेणुका चौधरी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा कि संसद का सत्र चल रहा है और उसी दौरान छात्रों पर आंसू गैस छोड़ी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद के भीतर विपक्षी सांसदों को बाहर निकलने से भी रोका गया।
उन्होंने कहा, 'संसद के अंदर हमारे व्हाट्सएप तक बाधित कर दिए गए और गेट बंद कर दिए गए। बाहर बच्चों पर आँसू गैस छोड़ी जा रही है। क्या इसी तरह सरकार चलती है? संसद सिर्फ सरकार की नहीं, देश के युवाओं की भी है।'
'हमें कैदी बना दिया गया'- सागरिका घोष
प्रदर्शनकारियों के संसद भवन के क़रीब पहुंचने पर संसद के गेट बंद कर दिए गए। तृणमूल कांग्रेस सांसद सागरिका घोष ने आरोप लगाया कि संसद में विपक्षी सांसदों की आवाज़ दबाई जा रही है। उन्होंने कहा, 'सदन हर आधे घंटे में स्थगित हो रहा है। हमें बाहर नहीं जाने दिया जा रहा। गेट बंद कर दिए गए हैं। ऐसा लग रहा है जैसे हम कैदी हों। सरकार प्रदर्शनकारियों को भी संसद तक नहीं पहुंचने दे रही।''लोकतांत्रिक अधिकार है विरोध करना'
कांग्रेस सांसद वामसी कृष्णा गद्दाम ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार पूछ रहा है कि NEET पेपर लीक कैसे हुआ और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस पर जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं।
सोमवार को मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष ने नीट पेपर लीक और राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा विवाद पर चर्चा की मांग की। विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की और पोस्टर दिखाए, जिसके चलते सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।
छात्रों का 'चलो संसद' मार्च
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवा संगठनों ने 'चलो संसद' मार्च निकालने की कोशिश की। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे थे। दिल्ली पुलिस ने संसद क्षेत्र में सुरक्षा के मद्देनजर कई जगह बैरिकेड लगाए थे। जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसी दौरान तनाव बढ़ गया और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई।
घटना के बाद विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया, जबकि सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि संसद सत्र के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद शिक्षा व्यवस्था, नीट पेपर लीक और छात्रों के विरोध प्रदर्शन का मुद्दा संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच सबसे बड़ा टकराव बनता दिखाई दे रहा है।