Rahul Gandhi Chhatron Ki Goonj Indore: राहुल गांधी ने इंदौर में छात्रों की गूंज प्रोग्राम में कहा कि छात्र सवाल पूछते हैं और यही बात कथित ‘सिस्टम’ को पसंद नहीं है। अंधभक्त उन्हें सवाल पूछने से रोकते हैं। नेता विपक्ष राहुल गांधी ने अंधभक्त की परिभाषा भी बताई।
नेता विपक्ष राहुल गांधी छात्रों की गूंज इंदौर में शनिवार रात को
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में केंद्र सरकार और देश की मौजूदा राजनीतिक-आर्थिक व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स’ था। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश की राजनीतिक, संस्थागत और आर्थिक व्यवस्था पर कुछ चुनिंदा लोगों का नियंत्रण है और छात्रों को शिक्षा, भर्ती, विश्वविद्यालयों तथा संस्थाओं से जुड़े सवाल उठाने से हतोत्साहित किया जा रहा है।
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि उस ‘सिस्टम’ से है, जिसके बारे में उनका दावा है कि उसने देश की तमाम संस्थाओं में अपने लोगों को स्थापित कर रखा है।
‘सिस्टम के टॉप लेवल पर छह लोग’
राहुल गांधी ने कहा कि इस सिस्टम की कई परतें हैं और सबसे ऊपर छह लोग बैठे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत तथा उद्योगपति गौतम अडानी और मुकेश अंबानी के नाम लिए।राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर छात्रों को डराने का आरोप लगाया और अमित शाह को इस व्यवस्था का ‘enforcer’ यानी लागू कराने वाला बताया। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लेकर आरोप लगाया कि सोशल मीडिया और संचार माध्यमों पर निगरानी की जाती है और फोन टैपिंग जैसी गतिविधियों के जरिए सूचनाएं जुटाई जाती हैं।
उन्होंने मोहन भागवत को इस कथित सिस्टम की वैचारिक परत से जोड़ा और अडानी तथा अंबानी को इसके आर्थिक पक्ष से जोड़ा। राहुल ने दावा किया कि इस व्यवस्था ने देश की लगभग हर संस्था में अपने लोगों को घुसा रखा है। उसके जरिये पूरे सिस्टम को कंट्रोल किया जा रहा है।
क्रिकेट प्रशासन का उदाहरण
राहुल गांधी ने सत्ता के केंद्रीकरण का उदाहरण क्रिकेट प्रशासन से भी दिया। उन्होंने कहा कि देश में सचिन तेंदुलकर, कपिल देव समेत अनेक बड़े क्रिकेटर रहे हैं, लेकिन क्रिकेट प्रशासन की पूरी व्यवस्था अमित शाह के बेटे को सौंप दी गई है। आप लोग खुद सोचिये कि कभी अमित शाह या उनके बेटे जय शाह का क्रिकेट से कोई संबंध रहा है। कभी आपने उन्हें क्रिकेट खेलते हुए देखा है। यह टिप्पणी जय शाह के क्रिकेट प्रशासन में पद को लेकर राहुल गांधी की राजनीतिक आलोचना का हिस्सा थी।‘सिस्टम छात्रों को सवाल पूछने से रोकता है’
राहुल गांधी ने कहा कि छात्र स्वभाव से सवाल पूछते हैं और यही बात कथित ‘सिस्टम’ को पसंद नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्र पूछते हैं कि बेरोजगारी क्यों है, भर्ती क्यों रुकी हुई है, विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता क्यों नहीं है और संस्थाएं ठीक से काम क्यों नहीं कर रही हैं। उन्होंने कहा कि छात्र अडानी, अंबानी और जय शाह जैसे लोगों को लेकर भी सवाल पूछ रहे हैं, लेकिन उन्हें उनके अनुसार ‘अंधभक्तों’ के विरोध का सामना करना पड़ता है।राहुल गांधी ने छात्र और ‘अंधभक्त’ के बीच अंतर बताते हुए कहा कि छात्र में जिज्ञासा, प्रेम, विनम्रता, सहनशीलता और ईमानदारी होती है, जबकि उनके शब्दों में ‘अंधभक्त’ सवाल नहीं पूछता और नफरत फैलाता है।
13 फीसदी सरकारी भर्तियां अटकी होने का मुद्दा उठा
कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए छात्रों ने भर्ती और शिक्षा से जुड़े मुद्दे राहुल गांधी के सामने रखे। राजगढ़ की सपना गुर्जर ने बताया कि उन्होंने और उनके जैसे कई उम्मीदवारों ने राज्य सरकार की परीक्षाएं पास की हैं, लेकिन 13 फीसदी नियुक्तियां ओबीसी आरक्षण से जुड़े कानूनी विवाद के कारण रुकी हुई हैं। यह विवाद राज्य में सरकारी भर्ती के लिए इस्तेमाल किए जा रहे 87:13 फार्मूले और ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामलों से संबंधित है।राहुल गांधी ने इस मुद्दे को छात्रों और नौकरी के अभ्यर्थियों की परेशानी से जोड़ते हुए भर्ती प्रक्रिया में देरी का सवाल उठाया।MPPSC को लेकर छात्र ने बताई FIR और जेल जाने की बात
देवास से आए एक छात्र ने राहुल गांधी को बताया कि जब उसने और दूसरे छात्रों ने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया तो उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई और उन्हें जेल भेज दिया गया। कार्यक्रम में छात्रों ने परीक्षा परिणामों में देरी, भर्ती प्रक्रिया, सरकारी पदों की रिक्तियों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं भी उठाईं।शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों के आंदोलन में शामिल होने की पेशकश
राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में शिक्षक पदों के लिए आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने उनके चल रहे प्रदर्शन में शामिल होने की पेशकश की। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं को अपनी समस्याओं को लेकर सवाल पूछने का अधिकार है और शिक्षा तथा रोजगार से जुड़े मुद्दों पर उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए।‘देश में 10 लाख शिक्षक पद खाली’
राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई आंकड़े भी पेश किए। उन्होंने दावा किया कि देश में 10 लाख शिक्षक पद खाली हैं और करीब एक लाख स्कूल बंद हो चुके हैं, जिनमें उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में 55 फीसदी स्कूल शामिल हैं। ये आंकड़े राहुल गांधी द्वारा कार्यक्रम में किए गए दावे हैं।
उन्होंने शिक्षा पर सरकारी खर्च को लेकर भी सवाल उठाया। राहुल गांधी के अनुसार, 2014 में शिक्षा के लिए बजट का 4.6 फीसदी आवंटित किया गया था, जो अब घटकर 2.6 फीसदी रह गया है। उन्होंने इसे करीब 7.7 लाख करोड़ रुपये के शिक्षा बजट से जोड़ा।विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता का सवाल
कार्यक्रम में एक छात्र ने विश्वविद्यालयों में कथित भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी का मुद्दा उठाया। छात्र ने कहा कि विश्वविद्यालय छात्रों के साथ सहयोग नहीं कर रहे हैं और कई जगह अनियमितताओं की शिकायतें हैं। राहुल गांधी ने जवाब में कहा कि छात्रों को जिस व्यवस्था से सुरक्षा और मदद मिलनी चाहिए, वही व्यवस्था उनके अनुसार छात्रों और विश्वविद्यालयों के खिलाफ काम कर रही है।क्या है छात्रों की गूंज
राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम उनकी छात्रों और युवाओं से संवाद की पहल का हिस्सा है। इससे पहले यह पहल कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे जैसे शहरों में भी आयोजित की जा चुकी है। इसमें शिक्षा, परीक्षा, भर्ती और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर छात्रों से सीधे संवाद किया जाता है। इंदौर में यह कार्यक्रम पहले जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में प्रस्तावित था, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के बाद स्थान और कार्यक्रम की व्यवस्था में बदलाव किया गया। बाद में क्षेत्रीय पार्क के सामने आईडीए ग्राउंड के पास कार्यक्रम आयोजित किया गया। आयोजन को लेकर पुलिस ने सुरक्षा की 31 शर्तें भी रखी थीं।
राहुल का संदेश- ‘सवाल पूछना छात्र की पहचान’
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने छात्रों को लोकतांत्रिक व्यवस्था में सवाल पूछने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना था कि छात्र जिज्ञासु और निडर होते हैं तथा सवाल पूछना उनकी बुनियादी विशेषता है। इंदौर के इस कार्यक्रम में राहुल गांधी ने शिक्षा, सरकारी नौकरियों, भर्ती में देरी, विश्वविद्यालयों की पारदर्शिता और संस्थाओं की स्वतंत्रता को अपने व्यापक ‘सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स’ तर्क से जोड़ा।