कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की नई ग्रामीण रोजगार योजना 'VB-GRAM-G' को 'जुमला' बताया है। उन्होंने इसे गरीबों के अधिकारों पर हमला करार दिया। दिल्ली में 'मनरेगा बचाओ संग्राम' के राष्ट्रीय सम्मेलन में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। दोनों नेताओं ने कहा कि यह नया कानून महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा को ख़त्म करके गरीब मजदूरों को बंधुआ मजदूर बनाने की साजिश है।

मनरेगा 2005 में यूपीए सरकार ने बनाया था, जो ग्रामीण परिवारों को साल में कम से कम 100 दिन का काम देने की कानूनी गारंटी देता था। यह काम पंचायतों के जरिए होता था, जहां ग्राम सभा फैसले लेती थी। मजदूरों को अपनी पसंद की जगह पर काम मिलता था, और इसमें काम के अधिकार कानून की व्यवस्था थी।
अब मोदी सरकार ने दिसंबर 2025 में संसद से 'VB-GRAM-G' बिल पास करवाया, जो मनरेगा की जगह लेगा। इसका पूरा नाम 'विकसित भारत - गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' है। नई योजना में काम के दिन 125 तक बढ़ाए गए हैं, लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि फिलहाल 40 दिन भी काम नहीं दिया जा रहा है तो काम के दिन बढ़ाना एक छलावा है। इसने कहा कि बीजेपी असल में इस गारंटी को कमजोर कर रही है। केंद्र तय करेगा कि कहां कितना पैसा जाएगा, कब काम होगा और मजदूरी कितनी मिलेगी। पंचायतों की ताकत कम हो जाएगी, और ठेकेदारों को ज्यादा फायदा होगा।

राहुल गांधी ने क्या कहा

राहुल गांधी ने सम्मेलन में कहा, 'VB-GRAM-G जुमला है। यह गरीबों के हक पर हमला है। मनरेगा ने गरीबों को सम्मान के साथ काम मांगने का अधिकार दिया था। इसमें लोगों की आवाज थी, पंचायती राज था। मोदी जी इसे ख़त्म करने में लगे हैं। पहले किसानों पर तीन काले कृषि क़ानून लाए गए थे, लेकिन किसानों ने एकजुट होकर रोक दिया। अब मज़दूरों पर वही हमला हो रहा है।' उन्होंने कहा, 'बीजेपी डरपोक है। अगर हम सब एक साथ खड़े हो गए, तो मोदी जी को पीछे हटना पड़ेगा और मनरेगा बहाल हो जाएगा।'

राहुल ने आगे कहा,
बीजेपी चाहती है कि लोकतंत्र, संविधान और 'एक व्यक्ति-एक वोट' का कॉन्सेप्ट खत्म हो जाए। ये लोग आजादी से पहले वाला हिंदुस्तान लाना चाहते हैं, जहां राजा सब तय करता था।
राहुल गांधी
कांग्रेस नेता

खड़गे बोले- 'बंधुआ मजदूर बनाने की साजिश'

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "मोदी सरकार मनरेगा ख़त्म इसलिए कर रही है ताकि दबे-कुचले लोगों को बंधुआ मज़दूर बनाया जा सके। अमीरों के हाथ में सौंप दिया जाएगा, ताकि मज़दूर उनकी मर्जी पर काम करें। मनरेगा में 100 दिन काम की गारंटी थी, लेकिन मोदी सरकार 40 दिन भी नहीं दे पाती। अब 125 दिन की बात कर रही है, जबकि साल में 2 महीने भी काम नहीं मिलेगा।"

खड़गे ने कहा, 'गांधी जी ग्राम स्वराज चाहते थे, लेकिन मोदी जी आरएसएस के फैसलों पर मुहर लगा रहे हैं। हम मनरेगा और काम के अधिकार की लड़ाई लड़ेंगे।'

कांग्रेस की योजना क्या?

कांग्रेस ने 'मनरेगा बचाओ संग्राम' नाम से 45 दिन का देशव्यापी अभियान शुरू किया है। राहुल गांधी ने मजदूरों से एकजुट होने की अपील की और कहा कि किसानों ने दिखाया है कि एकजुट होकर सरकार को झुकाया जा सकता है। पार्टी संसद के बजट सत्र में भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएगी।

विपक्ष का कहना है कि नया कानून केंद्र को ज्यादा ताकत देता है, जिससे विपक्ष शासित राज्यों में कम फंडिंग हो सकती है। सरकार का दावा है कि नई योजना विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जुड़ी है और मजदूरों को ज्यादा फायदा देगी, लेकिन कांग्रेस इसे गरीब विरोधी बता रही है।

यह विवाद ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था और करोड़ों मजदूरों के भविष्य से जुड़ा है। आने वाले दिनों में विरोध और तेज हो सकता है।