तमाम पत्रकार, विश्लेषक, चिंतक अक्सर सवाल करते थे कि आखिर राहुल गांधी सड़क पर आकर आंदोलन क्यों नहीं करते। राहुल ने आज 21 जुलाई को उनकी इस मांग को पूरा कर दिया। लेकिन यह अचानक हुआ। पहले से इसकी कोई योजना नहीं थी। दरअसल, राष्ट्रपति भवन के लिए विपक्ष के मार्च की योजना लीक होने और पुलिस द्वारा रास्ता रोकने की पूरी घेरेबंदी के बाद राहुल ने योजना बदल दी। लेकिन इसकी जानकारी उनकी पार्टी को भी नहीं थी।

कैसे बना यह गुप्त प्लान?

प्लान में अचानक बदलाव: संसद की कार्यवाही लगातार दूसरे दिन स्थगित होने के बाद कांग्रेस ने पहले विजय चौक तक मार्च निकालने और वहां से राष्ट्रपति भवन तक मार्च करते हुए जाने की योजना बनाई थी। लेकिन वो खबर लीक हो गई और सुरक्षा बल अलर्ट हो गए। एक न्यूज़ एजेंसी ने तो कांग्रेस सूत्रों के हवाले से खबर भी चला दी थी कि विपक्षी सांसद राष्ट्रपति भवन तक मार्च करेंगे।
  • बर्थडे लंच का बहाना: पुलिस और एजेंसियों को चकमा देने के लिए दोपहर लगभग 3 बजे कांग्रेस के कुछ चुनिंदा सांसद और वरिष्ठ नेता खड़गे के निवास (10, राजाजी मार्ग) पर जमा हुए। ऐसा दिखाया गया कि सभी सिर्फ जन्मदिन के लंच में शामिल होने आए हैं।
  • अचानक पीएम आवास की ओर रुख: जैसे ही राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य प्रमुख नेता खड़गे के घर पहुंचे, वे सभी गाड़ियों से सीधे 2.3 किलोमीटर दूर स्थित प्रधानमंत्री आवास के लिए रवाना हो गए।

पीएम आवास के बाहर क्या हुआ?

सड़क पर बैठे नेता: दिल्ली पुलिस ने आनन-फानन में नेताओं को 7, लोक कल्याण मार्ग से कुछ ही मीटर पहले रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी अन्य नेताओं के साथ सड़क पर ही धरने पर बैठ गए।

इस्तीफे की मांग: प्रदर्शनकारियों ने संसद मार्च के दौरान हुए घटनाक्रम के विरोध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की और जमकर नारेबाजी की।

मंत्री को भेजा गया: अचानक हुए इस प्रदर्शन को संभालने के लिए केंद्र सरकार ने पीएमओ राज्य मंत्री (MoS) जितेंद्र सिंह को भेजा, लेकिन राहुल गांधी अपनी मांगों पर अड़े रहे।
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राहुल गांधी और पीएमओ में मंत्री जितेंद्र सिंह के बीच शाम 6 बजे तक बातचीत चलती रही। राहुल गांधी ने शुरुआत में पांच मांगे रखीं लेकिन बाद में कम से कम एक मांग तुरंत पूरी करने को कहा, वो थी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। जबकि पीएमओ के मंत्री जितेंद्र सिंह राहुल गांधी को इधर-उधर की बातों का हवाला देकर उनकी मांगें मानने का भरोसा देते रहे।
राहुल गांधी जब धरना खत्म करने पर राज़ी नहीं हुए तो पुलिस को इशारा किया गया। पुलिस ने फौरन ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में लेना शुरू किया। सबसे पहले पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी को पुलिस ले गई। फिर बुजुर्ग एमएस रंधावा को पुलिस ने कब्जे में लिया। फिर कन्हैया कुमार को हिरासत में लिया गया। पौने सात बजे ऊपरी आदेश के तहत राहुल गांधी को धरना स्थल से हटाने के लिए पुलिस कोशिश करती नज़र आई। राहुल गांधी को पुलिस ने वहां से हटाने के लिए बुरी तरह घसीटा।

राहुल के प्रदर्शन का प्रतीकात्मक असर

नेता विपक्ष राहुल गांधी के आज 21 जुलाई के प्रदर्शन का कांग्रेस संगठन और इसके कार्यकर्ताओं को बड़ा संदेश चला गया है। यानी राहुल गांधी अब सड़क पर उतरने को तैयार हैं। आज के घटनाक्रम से राज्यों में कांग्रेस के कार्यकर्ता और वहां की जिला यूनिटें सक्रिय हो सकती हैं। खासतौर पर बीजेपी शासित राज्यों में कांग्रेस के आंदोलन की झड़ी लग सकती है।

आम आदमी पार्टी क्यों बौखलाई

राहुल गांधी के प्रदर्शन से जितना बीजेपी परेशान नहीं दिखी, उससे ज्यादा आम आदमी पार्टी परेशान दिखी। आप नेताओं के फौरन बयान आने लगे कि जंतर मंतर के धरने को नुकसान पहुंचाने के लिए पीएम मोदी ने राहुल गांधी को धरने पर बैठाया है। सूत्रों का कहना है कि आप प्रमुख अरविन्द केजरीवाल के संकेत पर आप सांसद संजय सिंह, पूर्व सीएम आतिशी ने हमला बोला। आप नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी पीएम मोदी के इशारे पर यह सब कर रहे हैं। लेकिन आप के बयानों को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। जिस तरह से आप के नेता सीजेपी के आंदोलन को प्रोजेक्ट करते दिखे, उससे साफ हो गया कि जंतर मंतर का धरना और सीजेपी का आंदोलन आम आदमी पार्टी से प्रेरित है या फिर उसके समर्थन से सबकुछ किया जा रहा है। सोनम वांगचुक के एक्शन से भी इस आंदोलन को लेकर तमाम बातें सामने आईं। 
कांग्रेस के आज मंगलवार को तीखे तेवर के बाद देखना है कि वो आगे इस मामले को किस तरह आगे बढ़ाती है। जंतर मंतर पर सीजेपी का आंदोलन किस तरह आगे बढ़ता है। संसद में कल तीसरे दिन क्या होता है। क्योंकि दूसरे दिन भी सरकार ने विपक्ष को छात्रों का मुद्दा उठाने नहीं दिया।