रिजीम चेंज विवाद पर कांग्रेस का बीजेपी पर हमला
'रिजीम चेंज' यानी सत्ता और व्यवस्था में बदलाव की बात पर अब बवाल हो गया है। कांग्रेस ने पूछा है कि बीजेपी आखिर रिजीम चेंज की बात पर बौखलाई क्यों है? कांग्रेस ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा है कि चुनाव के ज़रिए सरकार बदलने की बात करना लोकतंत्र का सामान्य हिस्सा है, लेकिन बीजेपी इसे लेकर इस तरह प्रतिक्रिया दे रही है जैसे सरकार बदलने की मांग करना कोई गैरकानूनी काम हो।
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि बीजेपी 'रिजीम चेंज' की बात से इसलिए बौखलाई हुई है क्योंकि उसे अब लोकतंत्र में सवालों का सामना करने और सत्ता से बाहर होने की संभावना को स्वीकार करने की आदत नहीं रही। उन्होंने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह के बयान पर तंज कसते हुए पूछा कि वह इस मुद्दे पर 'जग्गा जासूस' बनकर क्यों सामने आए हैं, जबकि कांग्रेस और विपक्ष खुले तौर पर कह रहे हैं कि वे चुनाव के ज़रिए सरकार और व्यवस्था बदलना चाहते हैं।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक्टिविस्ट प्रशांत भूषण ने गुरुवार को साफ़ तौर पर कह दिया कि सरकार और व्यवस्था में बदलाव लाना उनके अभियान का मक़सद है। इसके बाद बीजेपी ने 'रिजीम चेंज' की मांग को लेकर विपक्ष पर हमला तेज कर दिया। राजनाथ सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि विपक्ष की लड़ाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से नहीं है, बल्कि विपक्ष सरकार गिराना चाहता है।
राजनाथ सिंह 'जग्गा जासूस' क्यों बन गए: खेड़ा
राजनाथ सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पवन खेड़ा ने कहा कि कांग्रेस अपने अभियान का उद्देश्य पहले से ही साफ़ करती रही है। उन्होंने 'वोट चोर-गद्दी छोड़' अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष का मक़सद मौजूदा सरकार को चुनाव में हराना और व्यवस्था में बदलाव लाना है। खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा कि जब विपक्ष खुले तौर पर यह बात कह रहा है तो राजनाथ सिंह 'जग्गा जासूस' या 'शेरलॉक होम्स' की तरह यह पता लगाने की कोशिश क्यों कर रहे हैं कि विपक्ष का असली मक़सद क्या है।पवन खेड़ा ने कहा, 'हम तो कह रहे हैं कि रिजीम चेंज करेंगे। 1977 में क्या रिजीम नहीं बदला था? 2014 में क्या रिजीम नहीं बदला था?' कांग्रेस प्रवक्ता का तर्क था कि भारत में चुनावों के ज़रिए सरकारें बदलती रही हैं। 1977 में आपातकाल के बाद हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई थी और जनता पार्टी की सरकार बनी थी। इसी तरह 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व में नई सरकार बनी। इसलिए चुनाव के ज़रिए सत्ता में बदलाव को लोकतंत्र के ख़िलाफ़ बताना सही नहीं है।
कांग्रेस के अनुसार विपक्ष का काम केवल सरकार की नीतियों की आलोचना करना नहीं, बल्कि जनता के सामने उसके कामकाज पर सवाल उठाना और चुनाव में उसे हराने की कोशिश करना भी है।
'Oppose, Expose, Depose' विपक्ष की जिम्मेदारी: कांग्रेस
पवन खेड़ा ने पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे प्रणब मुखर्जी की एक टिप्पणी का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि मुखर्जी ने विपक्ष की भूमिका को इन शब्दों में समझाया था- 'Oppose, expose and if possible depose', यानी विरोध करना, सरकार की कमियां उजागर करना और संभव हो तो उसे सत्ता से हटाना। खेड़ा ने कहा कि विपक्ष का काम ही सरकार का विरोध करना, उसके कामकाज की कमियां सामने लाना और चुनाव के जरिए उसे सत्ता से बाहर करने का प्रयास करना है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर विपक्ष कब यह मांग करता है कि सरकार को पांच साल के बजाय दस साल तक सत्ता में रहने दिया जाए।उनका कहना था कि जब कोई पार्टी विपक्ष में होती है तो वह सरकार की नीतियों और फैसलों का विरोध करती है। यह राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा है और चुनावी लोकतंत्र में सरकार बदलने की संभावना हमेशा बनी रहती है। खेड़ा ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार को विपक्ष की इस भूमिका पर आपत्ति है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार यह मानती है कि आंदोलन करना और चुनाव के जरिए सत्ता बदलने की इच्छा रखना गलत है, तो उसे संविधान में बदलाव करके यह साफ़ करना चाहिए।
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार के खिलाफ सवाल उठाने वालों को अलग-अलग नामों से निशाना बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि लोगों को कभी 'दिमागी नक्सली', कभी 'देशविरोधी' और कभी 'लेफ्टिस्ट' बताने की कोशिश की जाती है। खेड़ा के मुताबिक़ इस तरह की भाषा सरकार की बेचैनी दिखाती है। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार का राजनीतिक नैरेटिव कमजोर पड़ रहा है और लोगों के बीच उसके कामकाज को लेकर सवाल बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब सरकार से सवाल पूछे जाते हैं तो उसे जवाब देना चाहिए। लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि सवालों का जवाब देने के बजाय बीजेपी सवाल उठाने वालों पर ही आरोप लगाने लगती है।
'RSS ने भारत का संघीकरण कर दिया'
पवन खेड़ा ने इस विवाद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा और सरकारी संस्थाओं में उसके कथित प्रभाव से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से संघ की विचारधारा का विरोध करती रही है। खेड़ा के अनुसार, कांग्रेस का उद्देश्य संघ और उससे जुड़े संगठनों को भारतीय समाज की विविधता के अनुरूप बदलने का था, लेकिन उनके आरोप में संघ ने इसके उलट पूरे देश और व्यवस्था को अपनी विचारधारा के अनुरूप ढालने की कोशिश की।ज्ञानेश कुमार को हटाने का मुद्दा भी उठाया
पवन खेड़ा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि ज्ञानेश कुमार को पद से क्यों नहीं हटाया जा रहा है और मोदी सरकार उन्हें हटाने के लिए तैयार क्यों नहीं है। कांग्रेस और विपक्ष के अन्य नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए हैं। 'वोट चोर-गद्दी छोड़' अभियान के जरिए कांग्रेस चुनावी व्यवस्था और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश कर रही है।खेड़ा ने कहा कि बीते कई दिनों से लोग और युवा विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलित हैं। उनके मुताबिक, सवाल मुख्य चुनाव आयुक्त से पूछे जा रहे हैं, लेकिन जवाब देने के लिए केंद्र सरकार के नेता सामने आ रहे हैं। उन्होंने इस स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले प्रधानमंत्री से सवाल पूछे जाने पर ज्ञानेश कुमार जवाब देते थे, जबकि अब मुख्य चुनाव आयुक्त से सवाल किए जाने पर बीजेपी के नेता जवाब दे रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार को चुनाव आयोग से जुड़े सवालों का सीधे जवाब देना चाहिए और यह साफ़ करना चाहिए कि ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ उठाई जा रही आपत्तियों पर उसका रुख क्या है।
अमित शाह पर भी आरोप
पवन खेड़ा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि शाह मीडिया संस्थानों के संपादकों को दावत दे रहे हैं और उन्हें 'ऑफ रिकॉर्ड' ब्रीफिंग के जरिए जानकारी दे रहे हैं। खेड़ा ने दावा किया कि उन्हें इस बारे में कुछ संपादकों से जानकारी मिलती है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार चुनाव आयोग और उससे जुड़े विवादों पर सार्वजनिक रूप से जवाब देने के बजाय मीडिया के जरिए अपना पक्ष रखने की कोशिश कर रही है।'रिजीम चेंज' विवाद क्या है?
'रिजीम चेंज' का मतलब शासन या व्यवस्था में बदलाव है। राजनीति में इसका इस्तेमाल केवल किसी सरकार को हटाकर दूसरी सरकार लाने के लिए ही नहीं, बल्कि सत्ता चलाने के तरीके, नीतियों और संस्थागत व्यवस्था में व्यापक बदलाव की मांग के लिए भी किया जा सकता है। इस विवाद में कांग्रेस इसे चुनाव के ज़रिए सरकार बदलने और व्यवस्था में बदलाव लाने के अपने उद्देश्य के रूप में पेश कर रही है।
बीजेपी की ओर से राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि विपक्ष की लड़ाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तक सीमित नहीं है और उसका मकसद सरकार गिराना है। कांग्रेस ने इस आरोप को खारिज करने के बजाय कहा है कि सरकार को चुनाव में हराना ही विपक्ष की लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है।