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दिल्ली में आरएसएस की बैठक, यूपी चुनाव, बंगाल हिंसा अहम मुद्दे

बीजेपी के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की तीन दिवसीय बैठक दिल्ली में हो रही है। इस बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत सहित तमाम बड़े पदाधिकारी शामिल हो रहे हैं। बैठक में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव और पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा पर चर्चा होगी। संघ के सभी सह सरकार्यवाह और कार्यवाह भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं। भागवत कुछ दिन तक दिल्ली में ही रुकेंगे। 

दिल्ली में चल रही बैठक के दौरान संघ प्रमुख को कोरोना की दूसरी लहर के दौरान तमाम राज्य सरकारों द्वारा उठाए गए क़दमों के बारे में जानकारी दी जाएगी। विशेषकर ऐसे राज्यों में जहां चुनाव होने वाले हैं और उन जगहों पर संघ ने इस दौरान काम किया है। 

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यूपी को लेकर गंभीर

उत्तर प्रदेश के चुनाव को लेकर कुछ दिन पहले भी संघ ने बीजेपी के बड़े नेताओं से मुलाक़ात की थी। यह बैठक इतनी अहम थी कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए थे। इसके अलावा बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले और उत्तर प्रदेश बीजेपी के संगठन (महामंत्री) सुनील बंसल भी बैठक में शामिल रहे थे। कहा गया था कि कोरोना काल के दौरान जनता के बीच बनी धारणा को लेकर बीजेपी और संघ ने चिंता जताई थी।

RSS Meeting in delhi discussion on UP election 2022  - Satya Hindi

कामकाज की समीक्षा 

उत्तर प्रदेश में 8 महीने बाद चुनाव होने हैं और बीते दिनों बीजेपी आलाकमान और संघ ने योगी के कामकाज की समीक्षा की है और अटकलें यहां तक लगी थीं कि क्या मुख्यमंत्री को बदला जा सकता है लेकिन अब ऐसी अटकलों पर विराम लग गया है। उत्तर प्रदेश के अलावा फ़रवरी 2022 में पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड में भी चुनाव होने हैं। इसे लेकर भी संघ परिवार चर्चा करेगा। 

संघ प्रमुख ने कुछ दिन पहले केंद्र सरकार को चेताया था और कहा था कि कोरोना की पहली लहर के बाद सरकार लापरवाह हो गई थी। 

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बंगाल की हार से सबक

संघ के लिए उत्तर प्रदेश का चुनाव इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि बंगाल में उसके और बीजेपी के पूरी ताक़त झोंकने के बाद भी जीत हासिल नहीं हो सकी। कोरोना महामारी की दूसरी लहर में जिस तरह उत्तर प्रदेश में बदइंतजामियां हुईं इसे लेकर, पंचायत चुनाव के नतीजे और किसान आंदोलन को लेकर भी संघ चिंतित है कि इन कारणों से उत्तर प्रदेश में बीजेपी को राजनीतिक नुक़सान हो सकता है। 

हालांकि संघ कहता है कि वह चुनावी राजनीति से हमेशा दूर रहता है लेकिन यह सभी जानते हैं कि उसके तमाम संगठन बीजेपी के लिए वोट जुटाने का काम करते हैं। 

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