शशि थरूर कांग्रेस में रहेंगे या नहीं? यह सवाल फिर से तब उठ खड़ा हुआ जब थरूर ने केरल चुनाव को लेकर पार्टी की एक अहम बैठक में हिस्सा नहीं लिया। इससे पार्टी में थरूर को लेकर नई बहस छिड़ गई है। यह बैठक शुक्रवार को दिल्ली में हुई, जहां केरल के विधानसभा चुनावों की रणनीति पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि थरूर राहुल गांधी के कथित अनदेखी से नाराज़ हैं और इसीलिए उन्होंने इस बैठक को नजरअंदाज कर दिया।

थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच पिछले कुछ समय से तनाव की ख़बरें लगातार आती रही हैं, लेकिन इस महीने की शुरुआत में वायनाड में कांग्रेस की दो दिवसीय बैठक के दौरान थरूर और केरल के अन्य कांग्रेस नेताओं की साथ में बातचीत की तस्वीरें आई थीं। इससे लग रहा था कि थरूर और पार्टी लीडरशिप के बीच मतभेद ख़त्म हो गए हैं। लेकिन अब ऐसा लगता है कि पुरानी नाराजगी अभी भी बाकी है और वह भी तब जब केरल में अप्रैल 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं।

कांग्रेस की बैठक में क्या हुआ

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में केरल के टॉप नेता दिल्ली आए थे। बैठक की अध्यक्षता पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने की और राहुल गांधी भी मौजूद थे। इस बैठक में चुनाव की रणनीति, गठबंधन में सीट बंटवारा और उम्मीदवार चुनने जैसे मुद्दों पर बात हुई। लेकिन थरूर इस बैठक में नहीं पहुँचे।
ताज़ा ख़बरें
केरल कांग्रेस के नेता थरूर की अनुपस्थिति को कमतर दिखा रहे हैं, लेकिन पार्टी के अंदरूनी लोगों में चर्चा है कि थरूर फिर से खुद को अनदेखा महसूस कर रहे हैं। थरूर कभी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना चाहते थे, लेकिन अब वे पार्टी में खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं।

राहुल ने महापंचायत में नहीं लिया था थरूर का नाम

पिछले दिनों कोच्चि में कांग्रेस की बड़ी महापंचायत हुई थी। इसका उद्घाटन लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने किया। राहुल गांधी ने भाषण शुरू करते हुए मंच पर बैठे कई नेताओं का नाम लिया, लेकिन थरूर का नाम नहीं लिया। द इंडियन एक्सप्रेस ने पार्टी सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि राहुल गांधी ने थरूर को अभिवादन भी नहीं किया।

रिपोर्ट के अनुसार राज्य नेतृत्व ने थरूर से कहा था कि वे अपना भाषण जल्दी खत्म करें क्योंकि राहुल गांधी आने वाले हैं। थरूर ने ऐसा किया, लेकिन राहुल गांधी के आने के बाद भी गैर-सीडब्ल्यूसी सदस्य सहित छह अन्य नेताओं ने भाषण दिए। राहुल गांधी ने 12 नेताओं का नाम लिया, लेकिन थरूर का नहीं।

मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि थरूर को यह बात बहुत बुरी लगी। उन्हें लगा कि पार्टी उन्हें जानबूझकर अनदेखा कर रही है। थरूर ने एआईसीसी के केरल प्रभारी दीपा दासमुंशी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को बताया कि वे शुक्रवार की बैठक में नहीं आ पाएंगे क्योंकि शनिवार को कोझीकोड में केरल लिटरेचर फेस्टिवल में उनके दो कार्यक्रम हैं। सूत्र बताते हैं कि वेणुगोपाल और दासमुंशी थरूर की नाराजगी से वाकिफ थे। थरूर का मानना है कि वे अपनी 'सेल्फ रिस्पेक्ट' पर समझौता नहीं कर सकते। थरूर से इस पर टिप्पणी के लिए संपर्क नहीं हो सका।

हालाँकि, कांग्रेस में उनकी स्थिति को लेकर लिटरेचर फेस्टिवल में ऑडिएंस से पूछे गए एक सवाल के जवाब में थरूर ने कहा है कि उन्होंने संसद में कांग्रेस की किसी भी पोजीशन का उल्लंघन नहीं किया। उन्होंने कहा कि एकमात्र मुद्दा 'ऑपरेशन सिंदूर' पर था, जहां उन्होंने मजबूत रुख अपनाया। थरूर ने कहा, "मैंने पार्लियामेंट में कांग्रेस के किसी भी रुख का कभी उल्लंघन नहीं किया है। जिस एकमात्र मुद्दे पर सिद्धांत के तौर पर सार्वजनिक तौर पर असहमति हुई है, वह ऑपरेशन सिंदूर है। इस पर मैंने बहुत कड़ा रुख अपनाया था, और मैं उस पर कोई माफी नहीं मांगूंगा क्योंकि पहलगाम की घटना के बाद मैंने खुद एक ऑब्ज़र्वर और कमेंटेटर के तौर पर इंडियन एक्सप्रेस में एक कॉलम लिखा था, जिसका टाइटल मैंने शायद 'आफ्टर पहलगाम' दिया था, उन्होंने उसे 'हिट हार्ड, हिट स्मार्ट' टाइटल दिया। मैंने उस आर्टिकल में कहा था - इसे बिना सज़ा के नहीं छोड़ा जा सकता; इसका जवाब देना ही होगा।"
राजनीति से और ख़बरें

थरूर की कांग्रेस से असहमति क्यों?

शशि थरूर कांग्रेस पार्टी के एक प्रमुख नेता हैं, जो तिरुवनंतपुरम से सांसद हैं। पिछले कुछ समय से थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच कई मुद्दों पर टकराव देखा गया है। ये टकराव मुख्य रूप से पार्टी लाइन से अलग राय रखने, सम्मान की कमी और किनारे कर देने से जुड़े हैं।

थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की तारीफ की, जो कांग्रेस के लिए असुविधाजनक थी। पार्टी ने इसे 'लक्ष्मण रेखा' पार करने वाला बताया। 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे मुद्दों पर भी थरूर ने मजबूत स्टैंड लिया, जो पार्टी की लाइन से अलग था। उन्होंने कहा कि वे अपनी राय पर अड़े रहेंगे और पार्टी लाइन कभी नहीं तोड़ी।

मोदी सरकार की कुछ नीतियों की सराहना करने पर भी कुछ कांग्रेस नेताओं ने थरूर को फटकार लगाई। सूत्रों के हवाले से कई बार ऐसी ख़बरें आई हैं कि थरूर को लगता है कि पार्टी उन्हें किनारे कर रही है। उन्हें संसदीय समितियों से या बड़े डिबेट्स से बाहर रखने की रिपोर्टें भी आईं। बता दें कि 2022 में थरूर ने कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें लगा कि चुनाव अनफेयर था। उसके बाद से उनकी राय कई मुद्दों पर कांग्रेस से अलग होती गई।
सर्वाधिक पढ़ी गयी ख़बरें

थरूर का अब क्या होगा?

बहरहाल, केरल कांग्रेस के लिए यह बैठक बेहद अहम थी। अगले कुछ महीनों में कई राज्यों में चुनाव हैं, लेकिन केरल ही एकमात्र राज्य है जहां कांग्रेस को जीत का वास्तविक मौका है। तमिलनाडु में कांग्रेस छोटी पार्टी है, पश्चिम बंगाल में हाशिए पर है और असम में मुश्किल चुनौती है।

पार्टी हाईकमान ने केरल नेतृत्व से कहा है कि गठबंधन में सीट बंटवारा शांतिपूर्ण तरीके से पूरा करें और उम्मीदवार चुनने में कोई देरी न हो। कैंपेन कमिटी और मेनिफेस्टो कमिटी जैसे चुनाव से जुड़े महत्वपूर्ण पैनल बनाए जाएं। अगले हफ्ते तिरुवनंतपुरम में राज्य चुनाव समिति की बैठक होगी, जहां ये फैसले लिए जाएंगे।

थरूर 2009 से राजनीति में हैं और राज्य-राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते हैं, जिससे पार्टी के कुछ नेता असहज होते हैं। थरूर और पार्टी लीडरशिप कई मुद्दों पर एकमत नहीं हैं। इससे अटकलें लगती हैं कि थरूर पार्टी में रहेंगे या नहीं। अब सवाल है कि वायनाड बैठक के बाद और शुक्रवार की बैठक के बीच क्या बदला? जो भी बदला, उसके बाद भी यही सवाल उठ रहा है कि थरूर पार्टी में रहेंगे या नहीं।