तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी आंतरिक संकट और बगावत की आंच अब और तेज हो गई है। पार्टी के राज्‍यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ैक ने गुरुवार को राज्‍यसभा की सदस्‍यता से इस्तीफा दे दिया। यह इस सप्ताह का तीसरा बड़ा इस्तीफा है, जिससे ममता बनर्जी की पार्टी पर गहरा संकट मंडरा उठा है।
प्रकाश चिक बड़ैक पश्चिम बंगाल से चुने गए थे और उन्होंने 19 अगस्‍त 2023 को राज्‍यसभा सांसद के रूप में शपथ ली थी। वे अलीपुरद्वार  जिले के पूर्व अध्‍यक्ष और चाय बागान क्षेत्र के प्रमुख चेहरे माने जाते थे। उनके इस्तीफे से टीएमसी की संसदीय ताकत पर एक और हमला हुआ है।

टीएमसी से इस्तीफा देने वाले सांसद (बाएं से) प्रकाश चिक बड़ैक, सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर रॉय

इससे पहले इस सप्ताह 8 जून को वरिष्ठ सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के आरोपों के बीच इस्तीफा दे दिया।10 जून को सुष्मिता देव ने व्यक्तिगत और राजनीतिक कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा सौंपा। उनके बीजेपी में जाने की चर्चा है। क्योंकि इस्तीफे की घोषणा के बाद उन्होंने असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात की और असम के विकास के लिए काम करने की बात कही। हालांकि उनके बीजेपी में शामिल होने की औपचारिक घोषणा बाकी है।
इन इस्तीफों के बाद टीएमसी में बगावत की लहर और तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद पार्टी में असंतोष बढ़ा है। विद्रोही नेताओं ने नेतृत्व पर सत्तावादी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, जिससे दर्जनों विधायकों और सांसदों में विभाजन की स्थिति बन गई है।

महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष ने टीएमसी और ममता से जताई वफादारी

इस संकट के बीच ममता बनर्जी के प्रति वफादारी जताते हुए पार्टी के कुछ प्रमुख चेहरों ने विद्रोहियों पर तीखा हमला बोला है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने विद्रोही नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि अगर असंतुष्ट हैं तो इस्तीफा दें। उन्होंने कहा कि टीएमसी को 2029 के चुनाव के लिए "अविश्वसनीय" नेताओं की जरूरत नहीं है। महुआ ने विद्रोहियों पर ममता बनर्जी का फायदा उठाने और फिर पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया।

कहां हैं 20 सांसद, कुछ होता तो पत्र जारी हो गया होताः महुआ

लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने HT को दिए इंटरव्यू में उन दावों को खारिज कर दिया कि बागी गुट को 20 सांसदों का समर्थन हासिल है। उन्होंने तर्क दिया कि अगर इतनी संख्या होती, तो अब तक कोई पत्र जारी हो गया होता और सार्वजनिक रूप से शक्ति प्रदर्शन भी हो चुका होता। मोइत्रा ने कहा कि संख्या साबित करने की जिम्मेदारी उन लोगों की है जो ऐसा दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि "उनके पास 16 सांसद हैं, लेकिन वे दावा कर रहे हैं कि उनके पास 20 हैं। अब जिम्मेदारी उन्हीं की है। अगर सच में उनके पास 20 सांसद होते, तो मुझे यकीन है कि कोई पत्र जारी होता, हस्ताक्षर सामने आते और (बीजेपी के साथ) संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस होती। मैं पूरे यकीन के साथ कह सकती हूं कि उनके पास 20 सांसद नहीं हैं।" 

टीएमसी के सागरिका घोष (राज्यसभा) और महुआ मोइत्रा (दाएं)

मोइत्रा ने तर्क दिया कि केवल सांसदों का एक समूह होने से दलबदल विरोधी कानून के तहत अपने आप कोई मान्यता प्राप्त गुट नहीं बन जाता। उन्होंने कहा कि दो तिहाई सदस्यों को अलग होकर बीजेपी में शामिल होना होगा। दल-बदल विरोधी कानून लागू न हो, इसके लिए लेजिस्लेटिव पार्टी के नहीं, बल्कि पॉलिटिकल पार्टी के दो-तिहाई सदस्यों को अलग होना होगा। और सिर्फ़ अलग ही नहीं होना, बल्कि उन्हें BJP में विलय भी करना होगा। तो पहली बात, आपके पास पॉलिटिकल पार्टी के दो-तिहाई सदस्य होने चाहिए, सिर्फ़ 19 नहीं, बल्कि दो-तिहाई, जो उनके पास नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी एक भावुक नेता हैं जो सालों से लोगों के प्रति वफ़ादार रही हैं, जबकि इसके उलट बीजेपी की राजनीतिक संस्कृति बेरहम है। "ममता दी, अपनी सहज समझ और नेतृत्व क्षमता के बावजूद, एक बेहद भावुक इंसान हैं जिनमें बहुत स्नेह और लंबे समय तक कायम रहने वाली वफ़ादारी है।"

जहां ममता हैं, वहीं टीएमसी हैः सागरिका

टीएमसी राज्‍यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी ममता बनर्जी के "उल्लेखनीय नेतृत्व" में भरोसा जताया और विद्रोहियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि हार के बाद वफादारी बदलना नैतिकता के खिलाफ है। NDTV से बात करते हुए सागरिका ने कहा कि खुली बगावत के बावजूद, "ममता बनर्जी के बिना तृणमूल कांग्रेस का कोई अस्तित्व नहीं है।" उन्होंने सुष्मिता देव के पार्टी और राज्यसभा छोड़ने को "दुर्भाग्यपूर्ण" बताया। घोष ने कहा, "जिन लोगों ने पार्टी छोड़ने या ममता बनर्जी का साथ छोड़ने का फ़ैसला किया है, क्या वे ऐसा फ़ैसला तब भी करते अगर वह चुनाव जीत गई होतीं? इसलिए, मैं कहूंगी कि इस समय ममता बनर्जी जहां हैं, वहीं तृणमूल कांग्रेस है।" घोष ने केंद्रीय एजेंसियों और पुलिस का कथित तौर पर हथियार की तरह इस्तेमाल करने के लिए BJP की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को सामान्य नहीं माना जाना चाहिए और इसे संवैधानिक लोकतंत्र को खत्म करने जैसा बताया।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा की बड़ी जीत के बाद टीएमसी में बगावत भड़की है। लगभग 50 से ज्यादा विधायकों और 20 सांसदों के विद्रोह की खबरें हैं। कुछ सांसदों ने मुद्दा-आधारित समर्थन का ऐलान कर एनडीए की ओर झुकाव दिखाया है, हालांकि उन्होंने अभी पार्टी नहीं छोड़ी है।
टीएमसी अब उपचुनावों और संसदीय शक्ति के लिहाज से मुश्किल स्थिति में है। पार्टी नेतृत्व ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के खेमे में एकजुटता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन विद्रोह की आग बुझने के संकेत नहीं दिख रहे। यह संकट टीएमसी के भविष्य और पश्चिम बंगाल की राजनीति को काफी प्रभावित कर सकता है। आगे की घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।