जब ममता बनर्जी इंडिया गठबंधन की बैठक में व्यस्त थीं तो टीएमसी के क़रीब 15 बागी सांसद दिल्ली में ही बीजेपी मंत्री के घर पहुँचे हुए थे। इन बैठकों से पहले ही ख़बर आयी कि टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी और राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है।

इस इस्तीफे के बीच तब और बड़ा झटका लगा जब टीएमसी के लोकसभा सांसद दिल्ली में बीजेपी मंत्री के घर पहुँचे। कई रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी दिल्ली में पहुँचे हैं और टीएमसी के बागी नेता उनसे मिले। इससे पहले इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट दी है कि टीएमसी के 20 लोकसभा सांसद दिल्ली में अज्ञात जगह पर जुटे हैं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार 14 सांसदों ने बीजेपी के मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर उनसे मुलाक़ात की। हालाँकि, आरएसएस से जुड़ी पत्रिका पान्चजन्य ने रिपोर्ट दी है कि 15 सांसद भूपेंद्र यादव के घर पहुँचे। रिपोर्ट है कि इस दौरान शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे।
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होने आए हुए हैं।

दिल्ली में विद्रोह की आग

टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से करीब 20 सांसद दिल्ली के किसी अज्ञात स्थान पर पहले से ही बैठक कर रहे थे। बाद में इनमें से 15 सांसद भाजपा नेता और बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के घर पहुंच गए। कभी ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी रहे शुभेंदु अधिकारी सोमवार को ही दिल्ली पहुंचे हैं।
द इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि विद्रोही सांसद दो मुख्य विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं- पहला, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर खुद को अलग ब्लॉक घोषित करवाना और अभिषेक बनर्जी को संसदीय दल का नेता न मानना। दूसरा, सामूहिक इस्तीफा देना। 

यदि टीएमसी के ये बागी सांसद कोई कदम उठाते हैं तो ममता बनर्जी को दिल्ली यात्रा के दौरान बहुत बड़ा झटका लगेगा।

रिपोर्ट के अनुसार ममता बनर्जी के करीबी एक टीएमसी नेता ने दावा किया कि विद्रोही सांसदों की संख्या 20 नहीं है। अगर कम संख्या में विद्रोह हुआ तो उन्हें एंटी-डिफेक्शन कानून यानी दलबदल विरोधी कानून का सामना करना पड़ सकता है।

सुखेंदु शेखर रॉय का इस्तीफा

सुखेंदु शेखर रॉय टीएमसी के सबसे पुराने राज्यसभा सांसदों में से एक थे। इस्तीफा देते हुए उन्होंने कहा, 'पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में लोगों ने बीजेपी को भारी समर्थन दिया। इससे 15 साल के तृणमूल कांग्रेस के अराजक शासन का अंत हुआ। भ्रष्टाचार, महिलाओं पर अत्याचार, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, कानून-व्यवस्था और रोजगार में पूरी विफलता रही। नई सरकार अब विकास का काम शुरू कर रही है। इसलिए मैं लोगों के इस फैसले का सम्मान करते हुए राज्यसभा और तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दे रहा हूं।' जब उनसे पूछा गया कि वे किसी दूसरी पार्टी में जाएंगे या नहीं, तो रॉय ने कहा, 'मैं 59 साल से राजनीति में हूं। अब सोच-समझकर फैसला लूंगा।' उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अपने अन्य राज्यसभा सहयोगियों के इस्तीफे की कोई जानकारी नहीं है।

विधानसभा में पहले से बगावत

इससे पहले विधानसभा में भी विद्रोह हो चुका है। ममता बनर्जी द्वारा सोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाए जाने का कई विधायकों ने विरोध किया। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विद्रोही विधायकों ने कहा कि वे ऋतब्रत को नेता चाहते हैं, लेकिन ममता बनर्जी को अपना मार्गदर्शक मानते हैं। वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार पहले ही पार्टी पदों से इस्तीफा दे चुकी हैं। उन्होंने आरजी कर डॉक्टर बलात्कार-हत्या मामले और भ्रष्टाचार को हार का बड़ा कारण बताया था।

सुखेंदु शेखर रॉय ने भी आरजी कर मामले में विरोध प्रदर्शन किया था। उन्होंने लिखा था, 'महिलाओं के खिलाफ क्रूरता अब काफी हुई। हम सब मिलकर इसका विरोध करेंगे।'

ममता का डैमेज कंट्रोल

पार्टी को संभालने के लिए ममता बनर्जी ने संगठन में बड़ा बदलाव किया है। अभिषेक बनर्जी अब भी राष्ट्रीय महासचिव बने हुए हैं, लेकिन डेरेक ओब्रायन और डोला सेन को संयुक्त राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। इसे अभिषेक की शक्तियों को कम करने की कोशिश माना जा रहा है।एक वरिष्ठ टीएमसी सांसद ने कहा, 'ममता दीदी समझ गई हैं कि पार्टी में नाराजगी मुख्य रूप से अभिषेक बनर्जी के खिलाफ है। इसलिए उन्होंने अन्य वरिष्ठ नेताओं को आगे लाया है।' टीएमसी में यह संकट पार्टी के भविष्य के लिए बहुत गंभीर माना जा रहा है।