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सेना ने कहा, कश्मीर में जैश-ए-मुहम्मद की टॉप लीडरशिप ख़त्म

पुलवामा आतंकी हमले के बाद आज सीआरपीएफ़ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस की। प्रेस कॉन्फ़्रेंस में चिनार कॉर्प्स के कमांडर लेफ़्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि पुलवामा हमले में पाकिस्तान की सेना और आईएसआई शामिल है। उन्होंने कहा कि जैश-ए-मुहम्मद पाकिस्तानी सेना का ही बच्चा है। प्रेस कॉन्फ़्रेंस में सेना और पुलिस ने पुलवामा हमले में शहीद हुए सैनिकों और उनके परिवार के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की। 

  • लेफ़्टिनेंट जनरल ढिल्लों ने कहा कि सेना ने पुलवामा आतंकी हमले के 100 घंटे से भी कम समय में जैश-ए-मुहम्मद की टॉप लीडरशिप को ख़त्म कर दिया है। प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कश्मीर के आईजी एसपी पाणि ने कहा कि कश्मीर में युवाओं के आतंक से जुड़ने में कमी आई है। ढिल्लों ने कहा, मैं कश्मीर की माताओं से कहना चाहता हूँ कि जिनके बच्चे आतंक की राह पकड़ चुके हैं, वे अपने बेटों को सरेंडर करने के लिए और मुख्यधारा में लौटने के लिए कहें। 

बंदूक उठाने वाले बचेंगे नहीं 

ढिल्लों ने कहा कि सेना की ओर से सख़्त चेतावनी है कि जो भी बंदूक उठाएगा, उसे ख़त्म कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आतंकी वारदातों में शामिल रहने वालों के लिए कोई रहमदिली नहीं दिखाई जाएगी। ढिल्लों ने कहा कि 16 घंटे से ज़्यादा चली मुठभेड़ में जैश के 3 कमांडर ढेर हुए हैं। 

ढिल्लों ने कहा कि हम साफ़ कहना चाहते हैं कि जो घाटी के अंदर ग़लत इरादे से आएगा वह जिंदा बचकर नहीं जाएगा। सेना ने कहा कि पुलवामा हमले के बाद चले एनकाउंटर में कोई भी नागरिक घायल नहीं हुआ है। सवालों का जवाब देते हुए ढिल्लों ने कहा कि घायल ब्रिगेडियर हरदीप सिंह छुट्टी पर थे, एनकाउंटर का पता चलने के बाद वह ख़ुद ही छुट्टी ख़त्म कर घटनास्थल पर पहुँचे थे और पूरे एनकाउंटर का नेतृत्व किया था। 

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी ख़बर के मुताबिक़, पकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद के  21 आतंकी दिसंबर 2018 में जम्मू-कश्मीर में घुस आए थे। इनमें तीन आत्मघाती हमलावर भी शामिल थे। सूत्रों के मुताबिक़, इन आतंकियों को तीन घटनाओं को अंजाम देने के लिए भेजा गया था। इनमें से दो घटनाओं को घाटी के बाहर भी अंजाम दिया जाना था।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के ही मुताबिक़, जैश के मुखिया मसूद अज़हर के भतीजे मोहम्मद उमैर ने अब्दुल रशीद ग़ाज़ी उर्फ़ कामरान के साथ आतंकियों के इस दल का नेतृत्व किया था। कामरान को 18 घंटे तक चली मुठभेड़ में 18 फ़रवरी को सुरक्षा बलों ने मार गिराया था। ख़बर के मुताबिक़, आतंकियों को मसूद अज़हर के भतीजे उस्मान हैदर और अफ़ज़ल गुरु की मौत का बदला लेने के लिए भेजा गया था। 
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