अमृतपाल सिंह खालसा और जनरैल सिंह भिंडरावाला
पंजाब में धार्मिक चोला पहनकर सामने आए अमृतपाल सिंह खालसा खुद का जनरैल सिंह भिंडरावाला का अवतार बता रहा है। वो भी भिंडरावाला की तरह खालिस्तान की बात कह रहा है। दोनों और क्या समानताएं हैं, बता रहे हैं पत्रकार अमरीकः
वह दमदमी टकसाल का मुखिया था और यह संस्था तब सिखों के एक विशेष तबके में अपनी अच्छी हैसियत रखती थी। अस्सी के दशक के काला दौर भिंडारांवाला से शुरू होता है। बिगड़ते माहौल के मद्देनजर पहले राज्य सरकार और फिर केंद्र ने सख्त रुख बरता तो वह अपने मुख्यालय से श्री स्वर्ण मंदिर चला गया और वहां सर्वोच्च श्री अकाल तख्त साहिब को अपना ठिकाना बना लिया। उसका मानना था कि यहां उसे कोई नहीं पकड़ सकता। बाद में ऑपरेशन ब्लू स्टार में वह अपने कई सहयोगियों के साथ मारा गया।
अमृतपाल सिंह खालसा धार्मिक चोले में
दो दिन पहले अमृतपाल सिंह ने अजनाला पुलिस थाने पर हमला किया तो उसके साथ भी श्री गुरुग्रंथ साहिब की पालकी थी। वहां पुलिसकर्मियों के खिलाफ जबरदस्त हिंसा हुई और अब जवाब में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और राज्य सरकार के एक मंत्री कहते हैं कि छह जिलों की पुलिस ने 'हथियार' इसलिए छोड़ दिए और बल प्रयोग नहीं किया कि श्री गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी न हो। यानी इतिहास दोहराया गया और पंजाब के 'दूसरे भिंडारांवाले' अमृतपाल सिंह खालसा को बाइज्जत जाने दिया गया।